JD(U)
RJD
JSP
नोटा
NOTA
IND
RLJP
TPP
SKVP
IND
INSAF
RJSBP
Bihar Election Result 2025 Live: हिलसा विधानसभा सीट पर JD(U) को दोबारा मिली जीत
Hilsa Vidhan Sabha Result Live: बिहार इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
Bihar Assembly Election Results 2025 Live: दिग्गज कैंडिडेट्स के क्या हैं हाल?
Hilsa Assembly Election Results Live: Bihar की Hilsa सीट पर मुकाबला एकतरफा! JD(U) ने ली बड़ी बढ़त
Hilsa Chunav Results Live: हिलसा सीट पर JD(U) का वर्चस्व, 15353 वोटों के विशाल अंतर से RJD को पछाड़ा
Bihar Election Results Live: बिहार चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
हिलसा बिहार के नालंदा जिले का एक उपखंड स्तरीय कस्बा है, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यह कस्बा सोन और फल्गु नदियों के निकट स्थित है. सोन नदी लगभग 50 किलोमीटर और फल्गु नदी करीब 30 किलोमीटर दूर है. जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से यह 32 किलोमीटर पश्चिम में तथा राज्य की राजधानी पटना से केवल 43 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
हिलसा की एक विशेषता है. यह दो प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों- पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) और नालंदा से काफी करीब है. नालंदा के प्रसिद्ध अवशेष, जिन्हें नालंदा महाविहार कहा जाता है और जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, हिलसा से केवल 29 किलोमीटर दूर हैं. यह निकटता हिलसा को बौद्धिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बनाती है. प्राचीन काल में हिलसा को "हलधरपुर" नाम से जाना जाता था, और इसके ऐतिहासिक जुड़ाव द्वापर युग तक बताए जाते हैं. यहां सूर्य मंदिर, काली मंदिर और बाबा अभयनाथ मंदिर जैसे कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जो इसकी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं.
‘हिलसा’ नाम मछली से जुड़ा नहीं है, जैसा आम तौर पर समझा जाता है. इस नाम की उत्पत्ति को लेकर दो प्रमुख धारणाएं हैं. कुछ लोगों का मानना है कि पुराना नाम 'हलधरपुर' समय के साथ अपभ्रंश होकर ‘हिलसा’ बन गया. वहीं दूसरी धारणा के अनुसार, इस क्षेत्र का नाम हरिनंदन प्रसाद उर्फ हिलास बाबू के नाम पर पड़ा, हालांकि उनके बारे में कोई ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं.
हिलसा विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1957 में हुई थी और यह नालंदा लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. इस क्षेत्र में हिलसा, करायपरसुराय, थरथरी और परवलपुर प्रखंड शामिल हैं.
2020 के विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र में 3,02,211 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनावों में बढ़कर 3,15,153 हो गए. 2020 में यहां अनुसूचित जाति के मतदाता 18.27% और मुस्लिम मतदाता लगभग 1.9% थे. यह इलाका मुख्यतः ग्रामीण है, जहां केवल 12.45% मतदाता शहरी श्रेणी में आते हैं. 2020 में यहां 54.85% मतदान हुआ था, जो बिहार के औसत के लिहाज से संतोषजनक माना जाता है.
1957 से लेकर अब तक यहां 16 बार चुनाव हो चुके हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का प्रभाव यहां पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, क्योंकि वह स्वयं नालंदा जिले से आते हैं. उनकी पार्टी समता पार्टी (जो बाद में जदयू में विलीन हो गई) ने इस सीट पर पांच बार जीत हासिल की है.
2000 से 2020 तक के छह चुनावों में समता पार्टी/जदयू ने पांच बार जीत दर्ज की, केवल 2015 में यह सीट राजद को दी गई थी जब जदयू ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया था. कांग्रेस, जो महागठबंधन का हिस्सा रही है, इस सीट से चार बार जीत चुकी है, जबकि बीजेपी (या इसके पूर्व स्वरूप भारतीय जनसंघ) ने तीन बार, और राजद, जनता पार्टी, इंडियन पीपल्स फ्रंट व जनता दल ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
हालांकि जदयू ने हिलसा में कई बार जीत दर्ज की है, पर हाल के चुनावों में मुकाबले बेहद करीबी रहे हैं. 2020 में जदयू के कृष्णमुरारी शरण ने महज 12 वोटों से राजद के विधायक शक्ति सिंह यादव को हराया था. वोटों की गिनती दोबारा हुई और 182 पोस्टल बैलेट खारिज किए जाने पर राजद ने धांधली का आरोप लगाया.
2024 के लोकसभा चुनावों में भी हिलसा विधानसभा क्षेत्र में जदयू के उम्मीदवार ने राजद प्रत्याशी को केवल 188 वोटों से हराया. ये दोनों करीबी मुकाबले दर्शाते हैं कि 2025 के चुनाव में फिर से कड़ा और अनिश्चित संघर्ष देखने को मिल सकता है, जिससे चुनाव विश्लेषकों के लिए भी परिणामों की भविष्यवाणी करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा.
(अजय झा)
Atri Muni Urph Shakti Singh Yadav
RJD
Kumar Suman Singh @ Ranjit Singh
LJP
Ramvilaf Paswan
BSP
Dular Chand Prasad
IND
Kapil Prasad
IND
Raju Kumar
JAP(L)
Abhay Shankar
RJJP
Suryamani Prakash
JVKP
Sudhir Kumar
IND
Munendra Kumar
IND
Nota
NOTA
Jainendra Kumar
NCP
Ashok Kumar
IND
Ravindar Das
SSD
Shyam Kanta Kumar
NJRP
Rajiv Nayan Prasad
PP
Mamta Rani Urf Pinki Devi
PBP
Niraj Sharma
JD(S)
Kumar Hari Charan Singh Yadav
BMF
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
इंडिया टुडे ने चुनाव आयोग के डेटा की गहराई से जांच की और पाया कि SIR और चुनाव नतीजों के बीच कोई सीधा या समझ में आने वाला पैटर्न दिखता ही नहीं. हर बार जब एक ट्रेंड बनता लगता है, तुरंत ही एक दूसरा आंकड़ा उसे तोड़ देता है. बिहार चुनाव में NDA ने 83% सीटें जीतीं, पर SIR से जुड़े नतीजे अलग कहानी कहते हैं.