सावन शिवरात्रि पर कांवड़िए पवित्र जल से शिवलिंग का जलाभिषेक कर यात्रा पूरी करते हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले विष को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल चढ़ाया था। इस दिन व्रत, चार प्रहर पूजा, बेलपत्र और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।
सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा व जलाभिषेक का विशेष महत्व है। श्रद्धालु व्रत रखकर मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। पूजा के लिए ब्रह्म, निशिता, अभिजीत और गोधूलि मुहूर्त को शुभ माना गया है।
रक्षाबंधन 2026 इस बार 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा. श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी. खास बात यह है कि इस बार राखी के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा. बहनें सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं. वहीं राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा.
सावन का पहला प्रदोष व्रत इस बार सोमवार को पड़ रहा है, जिससे सोम प्रदोष का विशेष संयोग बन रहा है. 10 अगस्त 2026 को सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष व्रत रखा जाएगा. मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से विशेष पुण्य मिलता है. प्रदोष काल में पूजा का शुभ समय शाम 7:09 बजे से रात 9:23 बजे तक रहेगा.
रक्षाबंधन 2026 इस बार एक खास खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है. 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा, जो कई देशों में ब्लड मून का नजारा दिखाएगा. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन के त्योहार पर भी कोई रोक या विशेष धार्मिक पाबंदी नहीं रहेगी.
3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, बेलपत्र, दूध समेत कई पूजन सामग्री अर्पित करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.
Raksha Bandhan 2026 Kab hai: रक्षाबंधन हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है. भारत के अलावा भी विश्व भर में जहां पर हिंदू धर्मं के लोग रहते हैं, वहां इस पर्व को भाई बहनों के बीच मनाया जाता है.
जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान के रथ की रस्सी खींचना विशेष धार्मिक महत्व रखता है. मान्यताओं के अनुसार यह भगवान के प्रति समर्पण, सेवा और आस्था का प्रतीक माना जाता है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं. रथ यात्रा सामाजिक समानता, सामूहिक भक्ति और भगवान से जुड़ाव का संदेश भी देती है.
जगन्नाथ रथ यात्रा की सबसे खास परंपराओं में से एक अधर पना अनुष्ठान है. इस रस्म में विशेष पेय भगवान को अर्पित करने के बाद मिट्टी के घड़ों को रथ पर ही तोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अर्पण अदृश्य शक्तियों और पितरों के लिए माना जाता है. यह परंपरा रथ यात्रा की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.
भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र माना जाने वाला सावन महीना 2026 में 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगा. इस दौरान श्रद्धालुओं को चार सावन सोमवार मिलेंगे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने शिव पूजा, जलाभिषेक, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है. जानिए सावन की तारीखें, सोमवार की पूरी सूची और इस महीने से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं.
Sawan 2026 Date: हर साल शिव भक्तों को सावन के महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है. शास्त्रों के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय महीना होता है. सावन के महीने में हर दिन और विशेष रूप से सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा-उपासना करने से जीवन में हर तरह की सुख-समृद्धि और ऐशोआराम की प्राप्ति होती है.