अक्षय तृतीया का पर्व केवल सोना-चांदी खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक उन्नति का भी विशेष अवसर है. प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार इस दिन किया गया नामजप, मौन साधना और सादगीपूर्ण जीवन शैली व्यक्ति को भीतर से शुद्ध करती है. यदि भक्ति भाव से छोटे-छोटे उपाय अपनाए जाएं, तो यह दिन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और अक्षय पुण्य प्रदान कर सकता है.
Parshuram Jayanti 2026: हर वर्ष बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार प्रभु परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था जिसके कारण अक्षय तृतीया का महत्व काफी बढ़ जाता है.
Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का पर्व बहुत महत्व रखता है. इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, भगवान काल भैरव की विधि विधान से पूजा की जाती है. पंचांग के अनुसार यह पर्व हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन लोग व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव की पूजा करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है.
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे. बाबा केदार की पंचमुखी डोली 19 अप्रैल को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ से रवाना होगी और 21 अप्रैल को केदारनाथ पहुंचेगी.
वैसे तो लोग हनुमान जी की कृपा के लिए हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और हनुमानष्टक का पाठ करते हैं, लेकिन एक बहुत सरल उपाय भी उनकी कृपा दिला सकता है. यह है हनुमान गयात्री मंत्र.हनुमानजी की शक्ति, बुद्धि और साहस पाने का ये एक प्रभावशाली मंत्र है.
हनुमान जयंती के मौके पर या मंगलवार या शनिवार के दिन हनुमान जी को पान के पत्ते पर दो लौंग और थोड़ा गुड़ रखकर भोग लगाएं. यह उपाय आर्थिक समस्याओं को दूर करने और धन वृद्धि में सहायक माना जाता है.
हनुमान गायत्री मंत्र हनुमान जी की तरह निडरता, शक्ति, धीरज और अटूट भक्ति के गुण प्रदान करता है. इसके जाप से जीवन के सभी कष्ट, रोग, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं.एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए यह मंत्र बहुत कारगर है.
हनुमान जी को श्रीराम का प्रिय भाई माना जाता है, जिसका जन्म माता अंजना के शाप और राजा दशरथ के यज्ञ से जुड़ा है. आनंद रामायण के अनुसार, अप्सरा पुंजिकस्थला को वानर बनने का शाप मिला और अगले जन्म में वह अंजना बनीं.
हनुमानजी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों का स्वामी माना जाता है. रामचरित मानस में जब वह सीता जी का समाचार लेकर लौट रहे होते हैं तब माता सीता उन्हें कई आशीर्वाद देती हैं.
भारत में जैन और हिंदू परंपराओं के पर्वतीय तीर्थ स्थल अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं. कैलास पर्वत, गिरनार पर्वत, शत्रुंजय पर्वत, सम्मेद शिखरजी और पावागढ़ पहाड़ी जैसे तीर्थ स्थल दोनों धर्मों के लिए पवित्र माने जाते हैं.
हनुमान जयंती पर घर लाएं ये पवित्र चीजें, तरक्की और सुख-समृद्धि के खुलेंगे रास्ते. हनुमान जयंती इस साल 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीना नई शुरुआत, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इसी दौरान नवरात्रि, राम नवमी और हनुमान जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं. ये दिन लार्ड हनुमान को समर्पित होता है
हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो वानर राज केसरी और अंजना माता के पुत्र हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में प्रसिद्ध है. रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और बुद्धिमत्ता का विस्तृत वर्णन है, जो रामकथा को गति और दिशा देता है.
1 या 2 अप्रैल कब है हनुमान जयंती? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त. चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली हनुमान जयंती इस साल 2 अप्रैल को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, जिन्हें शिवजी का रुद्रावतार माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा 1 अप्रैल सुबह 7:06 से शुरू होकर 2 अप्रैल सुबह 7:41 तक रहेगी. उदया तिथि के कारण 2 अप्रैल को हनुमान जयंती मनाई जाएगी
Kamda Ekadashi 2026: ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानि कामदा एकादशी पर रवि योग का संयोग है. इस योग में जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को आरोग्य जीवन का वरदान मिलेगा. साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं शांति आएगी. भगवान विष्णु की पूजा करने से धन की देवी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.
भगवान श्रीराम के पास केवल धनुष और तीर ही नहीं थे, बल्कि उन्हें महर्षि विश्वामित्र, अगस्त्य और परशुराम जैसे गुरुजनों से कई दिव्य अस्त्र और शस्त्र प्राप्त हुए थे. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, श्रीराम को बला, अतिबला, ब्रह्मास्त्र, त्रिशूल, वज्र, नारायण अस्त्र, मदन अस्त्र, और कई अन्य दिव्य हथियार मिले थे.
नवरात्रि के अंतिम दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन की परंपरा होती है, जिसमें लांगुर नामक बालक को भी शामिल किया जाता है. यह लांगुर हनुमान जी या हनु भैरव का रूप माना जाता है, जो देवी की रक्षा करते हैं.
पंचमुखी हनुमान भगवान हनुमान का दुर्लभ और शक्तिशाली स्वरूप है, जिसमें उनके पांच मुख होते हैं. यह रूप महिरावण और अहिरावण का वध करने के लिए प्रकट हुआ था. पंचमुखी हनुमान के पांच मुख भक्ति, शक्ति, भय नाश, धन-समृद्धि और विद्या के प्रतीक हैं.
भगवान श्रीराम का जन्म केवल एक कारण से नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई शाप और वरदान थे जो रामचरित मानस में तुलसीदास द्वारा संक्षेप में बताए गए हैं। जय-विजय के शाप से लेकर ऋषि कश्यप और अदिति के वरदान तक, सभी ने श्रीराम के अवतार को संभव बनाया.
Ram Navami 2026: इस बार लोगों में रामनवमी की सही तारीख को लेकर कंफ्यूजन है. जानें 26 या 27 मार्च में कब मनाई जाएगी राम नवमी, क्या है शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत के नियम और भगवान राम के मंत्र.
छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, मुख्य रूप से कार्तिक और चैत्र महीने में. यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जो पालन-पोषण और सुरक्षा की देवी मानी जाती हैं.
कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में साल में दो बार सूर्य की किरणें देवी का तिलक करती हैं. जानें इस अद्भुत घटना, मंदिर की मान्यता और धार्मिक परंपराओं के बारे में. नवरात्र के चलते क्यों हो रही इस शक्तिपीठ को लेकर इृतनी चर्चा?