गणेश जी की आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत विशेष माना जाता है. भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे जीवन में आने वाली रुकावटों और बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं. यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा करना और गणेश आरती करना शुभ माना जाता है. आरती के माध्यम से भक्त भगवान के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करता है. गणेश जी की आरती नियमित रूप से करने से मन शांत होता है, सकारात्मक सोच बढ़ती है और व्यक्ति में आत्मविश्वास आता है.
भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता और संरक्षक माना जाता है. विष्णु आरती का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में धन, सुख और समृद्धि का आगमन होता है तथा उसकी आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे स्थिरता और मजबूती आने लगती है. अगर नित-नियम से विष्णुजी की आरती की जाए तो भगवान विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का वास होता है.
हिंदू धर्म में आदिशक्ति मां दुर्गा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि वे इस सृष्टि में समस्त सुखों की प्रदाता हैं. उनकी उपासना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और साधकों को साधना की शक्ति प्राप्त होती है. इसी कारण मां दुर्गा की आरती का पाठ विशेष महत्व रखता है.
धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना करना सबसे शुभ माना जाता है. कहते हैं कि मां लक्ष्मी की उपासना के बाद उनकी आरती करने से भक्तों के जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती है. माता लक्ष्मी के पूजन से मनुष्य को जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त होती है. खासकर दिवाली और धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद मां की आरती जरूर करें.
मान्यता है कि जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होता है, उन्हें हनुमान जी की आराधना और उनकी आरती करने की सलाह दी जाती है. विशेष रूप से मंगलवार के दिन हनुमान जी की आरती करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं. घर में नियमित रूप से हनुमान जी की आरती करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और वातावरण सकारात्मक बनता है. इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.
जय सरस्वती माता आरती मां सरस्वती की एक प्राचीन और अत्यंत लोकप्रिय आरती है. श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका नियमित पाठ करने से देवी सरस्वती की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है. बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रातः और सायंकाल इस आरती का गायन करने से बुद्धि, ज्ञान और विद्या में वृद्धि होती है.
मां गायत्री की आरती को गायत्री मंत्र के समान ही अत्यंत फलदायी माना गया है. माता गायत्री को सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी कहा जाता है. उनका स्मरण और मंत्र-जप करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं. मां गायत्री की पूजा के उपरांत आरती करना विशेष पुण्यदायी होता है.
भगवान काल भैरव की आरती भय और शत्रुओं से रक्षा करने वाली मानी जाती है. भैरव बाबा की सच्चे मन से आराधना करने पर जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं. मान्यता है कि अगर भक्त को मनोवांछित फल पाने की इच्छा हो तो उन्हें सच्चे मन से श्री काल भैरव की पूजा करने के बाद आरती करनी चाहिए.
श्री अन्नपूर्णा माता की आरती का नियमित पाठ करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है. यह आरती दरिद्रता को दूर कर उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है तथा जीवन से अन्न और साधनों की कमी को समाप्त करती है. इसके प्रभाव से माता अन्नपूर्णा की कृपा सदैव बनी रहती है, जिससे परिवार में संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
कुबेर जी आरती की शुरुआत उपास्य देव भगवान कुबेर की महिमा तथा धन-समृद्धि के अधिपति के रूप में उनके दिव्य गुणों की स्तुति से होती है. इसमें श्रद्धा और विनम्रता के भाव से उन्हें नमन किया जाता है, क्योंकि वे धन के संरक्षक और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले देवता माने जाते हैं. इसी कारण जो भक्त श्रद्धा से कुबेर भगवान की आराधना करते हैं, उनके जीवन में धन की कमी नहीं होती. बुधवार के दिन कुबेर यंत्र की स्थापना कर प्रतिदिन कुबेर चालीसा पाठ के बाद आरती करने से आर्थिक स्थिति अच्छी है.
श्री कृष्ण की आरती करने से मन को गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. श्री कृष्ण की आरती नकारात्मक विचारों को कम करती है और जीवन में आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति देती है. माना जाता है कि इसके नियमित पाठ से व्यक्ति को आध्यात्मिक बल मिलता है और पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. आरती करने से घर का वातावरण पवित्र और शांत बना रहता है, सुख-समृद्धि बढ़ती है, वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति और भी प्रगाढ़ होती जाती है.
मां गंगा की आरती करने से मन को गहरी शांति और सुकून मिलता है. यह आरती भक्तों के हृदय को शीतलता देती है और जीवन की परेशानियों से राहत दिलाती है. जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से मां गंगा की आरती करता है, तो उसकी भक्ति और विश्वास और भी मजबूत हो जाता है. आरती के माध्यम से भक्त मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जो उनके दुःख-कष्ट दूर करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व समाधान का मार्ग दिखाता है.
हिंदू धर्म में तुलसी माता को पवित्रता, आस्था और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. जिस घर में प्रतिदिन विधि-विधान से तुलसी की पूजा और आरती की जाती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर रहती है. सुबह या संध्या समय तुलसी के पास दीपक जलाकर आरती करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है.
मां बगलामुखी को शत्रु नाशिनी, स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री तथा तांत्रिक परंपरा की परम देवी के रूप में पूजित किया जाता है. उनकी आरती के माध्यम से साधक न केवल उनका स्मरण करता है, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ उन्हें हृदय से आमंत्रित करता है. यह साधना जीवन में व्याप्त भय, बाधा और नकारात्मकता को दूर करने की प्रार्थना का भी माध्यम बनती है.