देशभर के 6,000 से ज्यादा कृषि छात्रों के लिए स्कॉलरशिप और फेलोशिप भुगतान की प्रक्रिया आसान होने जा रही है. NSP-DBT व्यवस्था के तहत ₹21.35 करोड़ की राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-IARI, पूसा में इसकी शुरुआत की.
किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की लोन लिमिट ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई. इससे किसान खेती के अलावा पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों के लिए भी ज्यादा वित्तीय सहायता ले सकेंगे. समय पर लोन चुकाने पर ब्याज में अतिरिक्त राहत का प्रावधान भी है. जानिए केसीसी पर कितना ब्याज लगेगा, कौन आवेदन कर सकता है और इसके लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी.
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले की आसिया अकबर ने सीमित जगह में खेती को कमाई के मॉडल में बदलने की मिसाल पेश की है. बड़े खेत की कमी के बावजूद उन्होंने घर के अंदर मशरूम उत्पादन से शुरुआत की और बाद में छत पर सब्जियां, मसाले और पौध तैयार करने का काम शुरू किया. आसिया इन उत्पादों की बिक्री से हर महीने करीब ₹35,000 से ₹40,000 तक कमाई कर रही हैं.
देश में लगातार बढ़ती चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. आगामी अक्टूबर से शुरू हो रहे नए सीजन में एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित किया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है. एफपीओ के जरिए 15 गांवों से रोजाना 500 लीटर गोमूत्र एकत्र कर दवाएं बनाई जा रही हैं. इस योजना में 300 महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाकर रोजगार से जोड़ा गया है.
हालिया रिपोर्ट से साफ होता है कि भले ही पिछले साल की तुलना में इस बार खाने-पीने की चीजें नियंत्रण में हैं, लेकिन जुलाई में टमाटर की आवक घटने और कीमतों में अचानक आए उछाल ने थाली का स्वाद बिगाड़ दिया है.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कोल्ड स्टोरेज, फ्रीज-ड्राई यूनिट, रेफ्रिजरेटेड वैन, फिशिंग बोट और कास्ट नेट-गिल नेट की खरीद पर 70 फीसदी से 90 फीसदी तक सब्सिडी वाली कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका लाभ एफपीओ, सहकारी समितियां, बेरोजगार युवा, मछुआरे, विक्रेता और मछली पालक ले सकेंगे. सरकार का कहना है कि डीबीटी, सत्यापन, सात साल तक परिसंपत्तियां चालू रखने और लाइसेंस जैसी शर्तों के साथ यह कदम भंडारण, परिवहन, सुरक्षा, टिकाऊ मछली पकड़ने, रोजगार, उद्यमिता और राज्य की ब्लू इकॉनमी को मजबूत करने के मकसद से लाया गया है.
केंद्रीय कैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ की गोबरधन स्कीम को मंजूरी दी है. योजना के तहत पराली, गोबर, कृषि अवशेष और नगर निकायों के जैविक कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी. सरकार का लक्ष्य 2036 तक घरेलू CBG उत्पादन को करीब 10 गुना बढ़ाना है. योजना में CBG की अनिवार्य ब्लेंडिंग, उत्पादकों के लिए तय कीमत और प्रोजेक्ट्स को पूंजी सहायता का प्रावधान है.
सहजन की खेती से एक किसान आज के समय में 80 लाख रुपये सालाना की कमाई कर रहा है. यह एक तरह की ऐसी खेती है, जो 5 महीने में ही तैयार हो जाती है और लागत भी कम लगती है.
उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन देने और युवाओं को अपने गांव में ही सम्मानजनक आजीविका प्रदान करने का मजबूत आधार बन चुका है.
उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के लिए एक खास योजना चलाती है, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई ना रुके. यह योजना हर महीने इन बच्चों को 5000 रुपये दे सकती है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर कम ब्याज के साथ जारी रिकवरी सर्टिफिकेट को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने 15% की जगह 12% ब्याज वसूलने पर सवाल उठाते हुए 2 दिसंबर 2021 के बाद पद पर रहे पूर्व गन्ना आयुक्तों का ब्योरा तलब किया है.
ग्रामसेवकों ने प्रभावित खेतों का प्राथमिक सर्वे तो कर लिया गया है, लेकिन मुआवजा कब और कितना मिलेगा, इसे लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है. क्षेत्र के पीड़ित किसान जल्द से जल्द उचित राहत राशि जारी करने की गुहार लगा रहे हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने सहकारी समितियों से जुड़े करीब 5,000 किसानों को बड़ी राहत देते हुए 'कवच योजना' को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत जांच लंबित होने के कारण कर्ज और सरकारी योजनाओं से वंचित किसानों को फिर से संस्थागत ऋण और फसल कर्ज का लाभ मिल सकेगा.
How to grow bigger money plant leaves: मनी प्लांट पानी और मिट्टी दोनों में बहुत आसानी से उग जाता है. आप इसे कहां लगाना चाहते हैं? उस हिसाब से पानी या फिर मिट्टी का चयन करना होता है.
भारतीय कृषि नीति में इथेनॉल को एक गेम-चेंजर के रूप में पेश किया गया था. दावा था कि इससे फसलों की मांग बढ़ेगी और किसानों की आमदनी दोगुनी होगी. हालांकि, कृषि मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट और मंडियों के आंकड़े एक बिल्कुल अलग और चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं.
जिस चावल की खुशबू कभी रायगढ़ के एक छोटे से गांव तक सीमित थी, आज उसकी महक देश की राजधानी दिल्ली तक है. जबरदस्त मांग और ₹180 प्रति किलो तक की कीमत ने स्थानीय किसानों की तकदीर बदल दी है.
पहाड़ों में बदहाल सड़कों की कीमत हर बार बेबस किसान को चुकानी पड़ती है. हिमाचल प्रदेश के मंडी में तीन दिन से बंद सड़क जब वक्त पर नहीं खुली, तो किसान को अपनी 15 क्विंटल मूली नाले में बहानी पड़ गई.
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि योजना के सफर में 4 साल ऐसे रहे जब तय बजट से कम पैसे खर्च हुए, तो वहीं 3 सालों में सरकार को आवंटित सीमा से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ी.
सुबह की पहली चाय की चुस्की से लेकर रात के खाने की थाली तक हर निवाले के साथ हम सेहत का नहीं, बल्कि धीमे ज़हर का सौदा कर रहे हैं. हम और आप जिस भोजन को पोषण समझकर अपनों को परोस रहे हैं, उसके पीछे कृषि और रसायनों का एक ऐसा खतरनाक खेल जारी है.
जलवायु परिवर्तन के दौर में भारत अपनी प्राचीन कृषि धरोहर को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है. देश की सदियों पुरानी फसल किस्मों को विलुप्त होने से बचाने और किसानों को पारंपरिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक अभियान शुरू किया है.