पूजा-उपासना तो जैसे भारतवासियों की सांसों में बसा हुआ है. शायद की ऐसा कोई दिन गुजरता होगा, जब कोई खास पूजा का संयोग न बनता हो. सप्ताह के हर दिन के अनुसार भी विशेष पूजा का विधान है. शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का व्रत रखा जाता है. इसे 'वैभव लक्ष्मी व्रत' भी कहा जाता है.इस व्रत को स्त्री या पुरुष, कोई भी कर सकता है. इस व्रत को करने से उपासक को धन और सुख-समृ्द्धि की प्राप्ति होती है. घर-परिवार में लक्ष्मी का वास बनाए रखने के लिए भी यह व्रत उपयोगी है.
देव गुरु बृहस्पति को बुद्धि और शिक्षा का कारक माना जाता है. गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा करने से धन, विद्या, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा के साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गुरुवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है. गुरुवार के दिन व्रत और कथा सुनने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
मन को शांति और जीवन के दुखों से छुटकारा पाने के लिए मां संतोषी का व्रत रखा जाता है. शास्त्रों के अनुसार संतोषी माता की पूजा और व्रत लगातार 16 शुक्रवार तक किया जाता है. रिद्धि-सिद्धि धन, धान्य, सोना, चांदी, मूंगा, रत्नों से भरा परिवार होने के कारण इन्हें प्रसन्नता, सुख-शान्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति करने की देवी भी माना गया है.
मां मंगला गौरी की उपासना से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि मंगला गौरी का व्रत करने से विवाह और वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर की जा सकती है. खासकर अगर मंगल दोष हो तो इस दिन की पूजा अत्यधिक लाभदायी होती है. पति की लंबी आयु के लिए भी इसे रखा जाता है. मंगला गौरी का व्रत करने से विवाह और वैवाहिक जीवन की हर समस्या दूर की जा सकती है.
सोलह सोमवार व्रत कोई भी कर सकता है, लेकिन कुंवारी कन्याएं विशेष रूप से इस व्रत को विधि-विधान से करें तो मनचाहा वर पाने का आशीर्वाद पाती हैं. सोमवार का व्रत श्रावण, चैत्र, वैसाख, कार्तिक और माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू किया जाता है. कहते हैं इस व्रत को 16 सोमवार तक श्रद्धापूर्वक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
शिरडी के साईं बाबा से जुड़ी उनकी चमत्कारी लीलाओं की अनेक कथाएं प्रचलित हैं. साईं बाबा की उपासना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन के कष्टों से मुक्ति के लिए किया जाता है. यह व्रत किसी भी गुरुवार को साईं बाबा का स्मरण कर आरंभ किया जा सकता है. शिरडी के साईं बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन कराना चाहिए और दान करना चाहिए. इस तरह इस व्रत का समापन किया जाता.
यदि किसी जातक की राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, तो शनिवार का व्रत अवश्य रखना चाहिए. मान्यता है कि इससे साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव कम होते हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं. शनिवार के व्रत के साथ शनिदेव की कथा का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है. ऐसा करने से शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है.
जया एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा करने और व्रत रखने से जातकों को सुख-शांति मिलती है. कहा जाता है कि इस दिन कथा पढ़ने से हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है. श्रद्धा पूर्वक भगवान विष्णु की आरती करने से भगवान भूल–चूक माफ करते हैं और घर में सुख-समृद्धि बना रहता है.
विजया एकादशी का व्रत हिंदू पंचांग की महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है और इसे अत्यंत पुण्यदायी तथा कल्याणकारी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो श्रद्धालु पूरी विधि-विधान और श्रद्धा के साथ विजया एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और विजय प्राप्त होती है. साथ ही, यह व्रत परलोक में भी शुभ फल देने वाला माना गया है, जिससे साधक का जीवन पुण्यमय और अक्षय बनता है.