करवा चौथ का पर्व इस बार कई ज्योतिषीय योगों के संयोग के बीच मनाया जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी नारायण योग, हंस राजयोग, बुधादित्य योग और शुक्रादित्य योग जैसे संयोग धन, करियर और वैवाहिक जीवन से जुड़े माने जाते हैं. वृषभ, तुला, मकर, मेष और कुंभ राशि के जातकों के लिए भी खास संकेत बताए जा रहे हैं. हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणियां नहीं.
करवा चौथ पर सुहागिनें पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. दिल्ली में चंद्रोदय रात 8 बजकर 17 मिनट पर होने की संभावना है. जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि और व्रत खोलने का सही तरीका.
करवा चौथ पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ बताते हुए पति-पत्नी के रिश्ते पर चुटकी ली।
करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। दिल्ली-NCR में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 बजे तक बताया जा रहा है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति 31 अक्टूबर 2026 को कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस गोचर को करियर, धन और पारिवारिक जीवन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वृषभ, तुला और मीन राशि के जातकों को इस दौरान कुछ मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. जानिए गुरु के इस राशि परिवर्तन से जुड़ी खास बातें.
करवा चौथ का व्रत इस साल 29 अक्टूबर को रखा जाएगा. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी. इस दिन चौथ माता और भगवान गणेश की पूजा के बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है. पंचांग के मुताबिक, चंद्रोदय रात 8 बजकर 17 मिनट पर होने का अनुमान है, हालांकि अलग-अलग शहरों में समय बदल सकता है.
करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। मान्यता के अनुसार, इस दिन सुहागिनें पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत में चंद्र दर्शन से पहले भोजन न करना, सात्विकता बनाए रखना, अपशब्दों से बचना और पूजा से जुड़े पारंपरिक नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
इस साल करवा चौथ का त्योहार 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन सुहागनें पति की लंबी उम्र सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला उपवास करती हैं. हालांकि इस बार करवा चौथ पर शुक्र अस्त होने वाला है और इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा.
29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस दिन सुबह शुक्र उदित होंगे. ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, सौंदर्य और दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है. इस दौरान ग्रहों की विशेष स्थिति के चलते वृषभ, मिथुन, धनु, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए अनुकूल संकेत बताए जा रहे हैं. हालांकि, रिश्तों में बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए बातचीत और आपसी समझ जरूरी होगी.
24 अक्टूबर 2026 को सूर्य स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 8 नवंबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के इस नक्षत्र परिवर्तन से मिथुन, तुला, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों को अगले करीब 15 दिनों में करियर और आर्थिक मामलों में नए अवसर मिल सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है, जबकि कारोबारियों को नई योजनाओं पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है.
शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पांच राशियों पर माता रानी की विशेष कृपा मानी जाती है. इनमें मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि शामिल हैं. इन राशियों का संबंध साहस, आत्मविश्वास, ज्ञान और आध्यात्मिकता जैसे गुणों से जोड़ा जाता है. नवरात्र के दौरान देवी की आराधना करके जातक सुख, शांति, सफलता और आत्मबल की कामना कर सकते हैं.
अक्टूबर 2026 में शारदीय नवरात्र के दौरान मां सरस्वती की पूजा 17 अक्टूबर को की जाएगी। 16 अक्टूबर को सरस्वती आवाहन, 18 अक्टूबर को सरस्वती बलिदान और 19 अक्टूबर को विसर्जन होगा।
17 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. इस दिन शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि भी रहेगी. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, तुला राशि में पहले से मौजूद बुध और शुक्र के साथ सूर्य की युति से त्रिग्रही योग बनेगा. साथ ही बुधादित्य और शुक्रादित्य योग भी बनेंगे. इस गोचर को सिंह, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में शुभ माना जा रहा है.
शारदीय नवरात्र के दौरान इस साल दो बार गजकेसरी योग बनने का ज्योतिषीय संयोग बताया जा रहा है. मान्यता है कि यह योग धन, सुख और समृद्धि से जुड़ा होता है. 11 से 13 अक्टूबर और फिर 18 से 21 अक्टूबर के बीच बनने वाले इस योग को चार राशियों के लिए खास माना जा रहा है. मेष, मिथुन, सिंह और तुला राशि के जातकों को करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में लाभ मिलने की संभावना जताई गई है.
नवरात्र का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हो रहा है. ऐसे में कलश स्थापना से पहले ये काम जरुर करें. सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें.इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें.
शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहे हैं। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक है।
अक्टूबर के नए सप्ताह में शारदीय नवरात्र का पावन पर्व भी रहेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दौरान ग्रहों की स्थिति सभी 12 राशियों के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकती है. कुछ राशियों को धन लाभ, करियर में तरक्की और रुके हुए काम पूरे होने के अवसर मिल सकते हैं, जबकि कुछ को स्वास्थ्य, खर्च और गुस्से पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी. जानिए मेष से मीन तक सभी राशियों का साप्ताहिक राशिफल, शुभ रंग और उपाय.
मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र इस साल 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त माता के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे. पहले दिन घटस्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होगी. सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक है. 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी.
साल 2026 के अंत में राहु और केतु का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. गणना के अनुसार, 5 दिसंबर की रात 10:32 बजे राहु मकर और केतु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. मान्यता है कि इस बदलाव से करियर, कारोबार, धन और रिश्तों पर असर पड़ सकता है. मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए नए अवसरों की संभावना जताई जा रही है.
शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होंगे. इस बार धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा, जिसे सुख, समृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि उन्नति का संकेत माना जाता है. पहले दिन कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा. नवरात्र में सप्तमी, अष्टमी, नवमी और विजयादशमी के दिन विशेष पूजा होगी.
सूर्य 17 अक्टूबर 2026 को कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे और 16 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे. वैदिक ज्योतिष में तुला राशि में सूर्य को नीच का माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मेष, मिथुन, कन्या, धनु और कुंभ राशि वालों को धन, करियर, रिश्तों और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सावधानी बरतनी पड़ सकती है. निवेश और महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है.