LJPRV
RJD
JSP
नोटा
NOTA
BSP
IND
AAP
IND
JSJD
IND
Bakhtiarpur Vidhan Sabha Election Results Live: बख्तियारपुर विधानसभा सीट के नतीजे सामने आए, LJPRV ने RJD को दी शिकस्त
Bakhtiarpur Chunav Results Live: बख्तियारपुर निर्वाचन क्षेत्र का रिजल्ट घोषित, Arun Kumar ने 1939 वोटों के अंतर से दर्ज की जीत
Bihar Assembly Election Results 2025 Live: दिग्गज कैंडिडेट्स के क्या हैं हाल?
Bakhtiarpur Vidhan Sabha Chunav Result Live: बिहार के पाटलिपुत्र क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Bakhtiarpur Vidhan Sabha Result Live: Aniruddh Kumar पीछे, Arun Kumar ने 1111 वोटों के अंतर से बनाई बढ़त
Bakhtiarpur Election Results Live: बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर जबर्दस्त मुकाबला, वोटों का अंतर महज 1059 ! जानें लेटेस्ट अपडेट
बख्तियारपुर, जिसे बख्तियारपुर भी लिखा जाता है, बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल का एक ब्लॉक स्तरीय नगर है. यह नगर राज्य की राजधानी पटना से 46 किलोमीटर पूर्व में स्थित है, जबकि बाढ़, जो अनुमंडल मुख्यालय है, मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर है. इसके अलावा, बिहारशरीफ (30 किमी दक्षिण) और मोकामा (40 किमी पूर्व) इसके प्रमुख निकटवर्ती नगर हैं. गंगा नदी इसके पास से बहती है, और यहां की जमीन गंगा के मैदानों की तरह समतल और उपजाऊ है. बख्तियारपुर दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल लाइन पर एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन भी है.
इस नगर की स्थापना 1203 ईस्वी में बंगाल विजय के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक के सेनापति मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने की थी, जिसने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को नष्ट किया था. पिछले 800 वर्षों से यह नगर इसी विवादित इतिहास के साथ जुड़ा रहा है. इसे नए नाम से पुकारने की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन मांगों को हमेशा खारिज किया है. उन्होंने इस पर मात्र इतना कहा, "क्या बकवास है? नाम क्यों बदला जाएगा? यह मेरी जन्मभूमि है."
यह सच है कि बख्तियारपुर नीतीश कुमार का जन्मस्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि उनकी पार्टियां—पहले समता पार्टी और अब जनता दल (यूनाइटेड)- यहां से कभी चुनाव नहीं जीत पाईं. यह आशंका कि नाम बदलने से मुस्लिम समुदाय नाराज हो सकता है, भी तथ्यात्मक नहीं लगती, क्योंकि 2020 के आंकड़ों के अनुसार यहां केवल 9,094 मुस्लिम मतदाता पंजीकृत थे, जो कुल 2,84,192 मतदाताओं में मात्र 3.2 प्रतिशत हैं. यहां मुस्लिम समुदाय की चुनावी प्रभावशीलता नगण्य है.
बख्तियारपुर को 1951 में विधानसभा क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया था, उसी वर्ष जब नीतीश कुमार का जन्म हुआ. तब से यहां 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यह पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और इसमें बख्तियारपुर के अलावा दनियावां और खुसरूपुर (दोनों पटना सिटी अनुमंडल के अंतर्गत) सामुदायिक विकास खंड आते हैं.
1952 से 1990 के बीच हुए 11 में से 10 चुनाव कांग्रेस ने जीते, लेकिन उसके बाद से उसका प्रभाव समाप्त हो गया. 2000 के बाद से यहां भाजपा और राजद के बीच मुकाबला होता रहा है. दोनों पार्टियों ने अब तक तीन-तीन बार यह सीट जीती है. इसके अलावा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने 1972 में और जनता दल ने 1995 में एक-एक बार विजय प्राप्त की.
अगर वर्तमान रुझान जारी रहे, तो इस बार जीत की बारी भाजपा की हो सकती है. लेकिन यह इतना आसान नहीं है. 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने इस सीट पर 20,672 वोटों से जीत दर्ज की थी. वहीं, 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस (जो राजद की सहयोगी है) ने बख्तियारपुर विधानसभा खंड में 9,941 वोटों की बढ़त ली.
भाजपा के लिए यहां समीकरण बदलने के लिए अनुसूचित जाति के मतदाताओं, जो कुल मतदाताओं का 21.01 प्रतिशत हैं, में पैठ बनानी होगी. इसके साथ ही, ग्रामीण मतदाताओं को साधना भी जरूरी है, क्योंकि क्षेत्र में शहरी मतदाता केवल 15.45 प्रतिशत हैं. साथ ही, भाजपा को उन लगभग 40 प्रतिशत मतदाताओं को भी सक्रिय करना होगा, जिन्होंने 2020 में मतदान नहीं किया था.
बख्तियारपुर की राजनीति इतिहास, जातीय समीकरण और सामयिक रणनीतियों का एक दिलचस्प संगम है, जो आगामी चुनावों में और भी रोमांचक रूप ले सकता है.
(अजय झा)
Ranvijay Singh
BJP
Nota
NOTA
Vinod Yadav
RLSP
Sita Devi
IND
Raju Kumar Singh
RJLP(S)
Shambhu Singh
IND
Kundan Kumar
PP
Ram Jatan Choudhary
IND
Purusotam Kumar
JAP(L)
Umesh Pandit
JKM
Krishna Prasad
IND
Avantika Singh
BJKD(D)
Naresh Kumar
ADP
Randhir Kumar
SP(L)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग के बीच सबकी नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य पर टिकी हैं, जो आज बख्तियारपुर में मतदान करने पहुंचे. इस बार मैदान में कई कलाकार भी हैं. देखिए पवन सिंह क्या बोले.