नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घरों की रजिस्ट्री के लिए बरसों से भटक रहे करीब 2.12 लाख फ्लैट खरीदारों के लिए राहत की एक बड़ी उम्मीद जगी है, क्योंकि नोएडा अथॉरिटी बिल्डरों पर बकाया ₹26,000 करोड़ की वसूली और अटके प्रोजेक्ट्स को पटरी पर लाने के लिए 'वन टाइम सेटलमेंट' (OTS) स्कीम लाने की तैयारी कर रही है.
सोशल मीडिया पर एक डॉक्टर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने आज के कॉर्पोरेट युवाओं की मानसिक स्थिति का एक कड़वा सच बयां किया है. वीडियो में गुरुग्राम के एक ऐसे युवक का जिक्र है जिसके पास 40 लाख की सैलरी और BMW कार तो है, लेकिन मन की शांति और जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों को बढ़ाए जाने के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी समीक्षा बैठक में घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का नीतिगत निर्णय लिया है.
दिल्ली फायर सर्विस और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, हाईराइज सोसायटियों में 90% हादसे मानवीय लापरवाही या सुरक्षा उपकरणों के मेंटेनेंस न होने की वजह से गंभीर रूप ले लेते हैं.
आत्मनिर्भरता और कानूनी समझ ही असली ताकत है. आज के समय में महिलाओं के लिए केवल शिक्षित होना ही काफी नहीं है, बल्कि अपने कानूनी और वित्तीय अधिकारों के प्रति सचेत होना भी बेहद जरूरी है.
UP RERA ने घर खरीदारों और निवेशकों को जल्दबाजी में प्रॉपर्टी न खरीदने की सलाह दी है. प्रदेश में 1.15 लाख से अधिक आवासीय और कमर्शियल यूनिट्स उपलब्ध हैं. निवेश से पहले रेरा पोर्टल पर पूरी जानकारी जांचने की अपील की गई है. UP RERA ने निवेश से पहले अपने आधिकारिक पोर्टल पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन, प्रमोटर का रिकॉर्ड, निर्माण की प्रगति, स्वीकृत नक्शे और कब्जा देने की समय-सीमा जैसी जानकारियां जांचने की सलाह दी है, ताकि खरीदार सूचित और सुरक्षित निर्णय ले सकें
प्राधिकरण ने कहा है कि रियल एस्टेट में निवेश एक लंबे समय का फाइनेंशिय फैसला होता है. इसलिए निवेशक और घर खरीदारों को किसी भी तरह के दबाव, भ्रामक प्रचार या जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए. रेरा ने लोगों से कई प्रोजेक्ट्स की तुलना करने, सभी डॉक्यूमेंट्स का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने और अपनी जरूरतों के साथ वित्तीय ताकत के हिसाब से विकल्प चुनने की अपील की है.
दिल्ली के मालवीय नगर होटल में लगी भीषण आग ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है. अक्सर लोग होटल बुक करते समय केवल खूबसूरती और सुविधाओं को तरजीह देते हैं, लेकिन यह दिल दहला देने वाला हादसा हमें अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को दोबारा परखने की चेतावनी देता है.
जब भी हम दिल्ली-एनसीआर में अपने सपनों का घर खरीदते हैं, तो अक्सर कीमत, लोकेशन और मेट्रो कनेक्टिविटी ही देखते हैं. लेकिन यमुना के 'O-Zone' में हाल ही में चले प्रशासन के बुलडोजर ने यह साबित कर दिया है कि घर खरीदने से पहले सबसे जरूरी चीज़ है जोन की जानकारी.
अगर आप कोई ऐसी प्रॉपर्टी देख रहे हैं जो बहुत ज्यादा ओवरप्राइज्ड थी, तो वहां आपको 5-10% की राहत मिल सकती है. अगर आपको अपने बजट में सही डील मिल रही है, तो रहने के लिहाज से घर खरीदने का यह एक सुरक्षित और सही समय है.
बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी दिल्ली के आम नागरिकों के लिए खाली पड़े घरों से कमाई का एक बड़ा जरिया बनेगी और दिल्ली के होमस्टे इकोसिस्टम को एक नया जीवन देगी.
दास के मुताबिक, भारतीय महानगरों के माहौल ने युवाओं के दिमाग में यह बात डाल दी है कि करियर में सफल होने के लिए मुश्किल हालातों में रहना बेहद जरूरी है.
बढ़ी हुई मजदूरी और ईंधन की कीमतों के अलावा, बिजली दरों में बढ़ोतरी और अन्य परिचालन खर्चों से जुड़ी चिंताएं सोसायटियों के बजट को और प्रभावित कर सकती हैं.
भारी-भरकम बुकिंग राशि और बैंक लोन चुकाने के बाद भी लाखों परिवारों का घर का सपना एक अंतहीन इंतजार में बदल जाता है. अगर आप भी अपने पैसे को डूबने से बचाना चाहते हैं और बिल्डर के इस चक्रव्यूह से सुरक्षित निकलना चाहते हैं, तो प्रॉपर्टी बुक करने से पहले आपको खुद अपने स्तर पर जरूरी काम जरूर कर लेने चाहिए.
प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ अब लोन चुकाने की अवधि भी लंबी होती जा रही है. भविष्य में सैलरी बढ़ने की उम्मीदों के दम पर बड़े-बड़े लोन लिए जा रहे हैं. यही वजह है कि अब रिटायरमेंट की उम्र और होम लोन की किश्तें एक-दूसरे के आड़े आने लगी हैं.
अमेरिका और ईरान के तनाव ने भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी असर डालना शुरू कर दिया है. कंस्ट्रक्शन कास्ट बढ़ने से घरों के दाम तो बढ़ेंगे ही साथ ही कई प्रोजेक्ट के डिले होने का भी खतरा है.
भारत की कुछ सबसे कीमती और सरकारी ज़मीनों पर काबिज़, दिल्ली से लेकर मुंबई तक के एलीट क्लबों को अब मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद ने इस बात पर एक बहस छेड़ दी है कि क्या सरकारी ज़मीन का इस्तेमाल निजी विशेषाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए जारी रहना चाहिए.
अगर आप भी मेट्रो शहरों में अपने सपनों का आशियाना तलाश रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब पर सीधा असर डालने वाली है. देश के प्रमुख शहरों में घरों की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं.
क्या आप जानते हैं कि भारत की सबसे ऊंची और आलीशान इमारतें कहां हैं, सपनों की नगरी मुंबई में, जहां अब सिर्फ़ लोगों के अरमान ही नहीं, बल्कि इमारतें भी बादलों को चीरकर आसमान से बातें कर रही हैं. देश की तीन-चौथाई से ज़्यादा गगनचुंबी इमारतें अकेले इसी शहर की स्काईलाइन पर शान से खड़ी हैं.
इन बदलावों का उद्देश्य कुछ क्षेत्रों में रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाना है, तो वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता और रिपोर्टिंग की सटीकता को बढ़ाना है.
सतीश सनपाल नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो 'देसी ब्लिंग' और अपनी एक साल की बेटी को करोड़ों की कस्टमाइज्ड रॉल्स-रॉयस गिफ्ट करने को लेकर सुर्खियों में आए इस भारतीय अरबपति की कामयाबी की कहानी हर किसी को हैरान कर रही है.