मुंबई, गुरुग्राम और नोएडा के बाद अब नवाबों के शहर हैदराबाद में 'ट्रंप टावर्स' आ रहा है. इस प्रोजेक्ट में न सिर्फ 450 से ज्यादा अल्ट्रा-लग्जरी फ्लैट्स होंगे, बल्कि लॉन्च से पहले ही इसके सारे पेंटहाउस बिक चुके हैं.
अगर आप दिल्ली में अपनी DDA प्रॉपर्टी को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपको थोड़ा इंतजार करना होगा. आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फ्रीहोल्ड दरों को व्यावहारिक बनाने और कागजी कार्रवाई को आसान बनाने के उद्देश्य से नीति में बदलाव किया जा रहा है.
गोवा में रियल एस्टेट निवेश और Airbnb से होने वाली कमाई को लेकर चल रही बहस के बीच बिजनेसमैन अक्षत श्रीवास्तव ने अपनी प्रॉपर्टी का रेवेन्यू ब्रेकडाउन सार्वजनिक किया है.
गुरुग्राम वो शहर है जहां 20, 40 या 50 करोड़ नहीं बल्कि 100 करोड़, 200 करोड़ के घर बिकते हैं. अल्ट्रा रिच लोगों की पहली पसंद बनता ये शहर बारिश में बदहाली के लिए भी चर्चा में रहता है. सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा इस बात का गवाह है कि लोग किस हद तक परेशान हैं.
मानव सरदाना द्वारा 271 करोड़ रुपये में खरीदे गए इस पेंटहाउस ने साबित कर दिया है कि गोल्फ कोर्स रोड पर अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टीज की मांग और कीमतें अब एक नए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी हैं.
गुरुग्राम में 271 करोड़ रुपये का पेंटहाउस क्या बिका, सोशल मीडिया पर अपार्टमेंट बनाम बंगले की नई जंग छिड़ गई! एक तरफ लोग करोड़ों के 'सुपर लग्जरी फ्लैट्स की सिक्योरिटी और सहूलियतों के मुरीद हैं, तो दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं कि जब इतने पैसों में हेलिपैड वाला आलीशान बंगला आ सकता है.
जो शहर कभी दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर खींचता था, आज वही अपने ही नागरिकों को दूर धकेल रहा है. लंदन से 30 से 40 वर्ष के कामकाजी लोग और परिवार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं.
29 मंजिलों और 8 टावरों में फैले 420 अपार्टमेंट्स वाले 'द डहलियास' को डीएलएफ ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट के रूप में पेश किया है, जिसकी कुल प्रोजेक्ट वैल्यू ₹40,000 करोड़ से अधिक है.
बेंगलुरु जैसे शहर में जहां मकान मालिक अमूमन 6 से 10 महीने का एडवांस डिपॉजिट मांगते हैं, वहां एक नए शहर में आशियाना बसाना किसी बड़ी वित्तीय चुनौती से कम नहीं है.
हर साल बारिश के मौसम में मुंबई और नवी मुंबई में इमारतों के ढहने की खबरें आती हैं. इस जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए नगर निगम जर्जर इमारतों के बिजली-पानी के कनेक्शन काटने तक की कार्रवाई करता है.
अगर आप घर खरीदने जा रहे हैं तो आपको कुछ डॉक्यूमेंट्स जरूर चेक कर लेना चाहिए. नहीं तो आपकी कमाई या घर खरीदने वाली रकम साफ हो सकती है और आपको घर भी नहीं मिलेगा.
देश के प्रमुख शहरों को पछाड़ते हुए नोएडा का रियल एस्टेट बाज़ार इस समय अपने सबसे सुनहरे दौर से गुजर रहा है. रिहायशी संपत्तियों की कीमतें ₹4,795 प्रति वर्ग फुट से बढ़कर ₹10,780 प्रति वर्ग फुट पहुंच गई हैं.
चांद पर इतिहास रचने से बहुत पहले, नील आर्मस्ट्रांग अपने घर के कमरों और बेसमेंट में बैठकर स्पेस और उड़ानों के प्लान बनाया करते थे. आज वही ऐतिहासिक मकान बिकने की राह पर है.
बेंगलुरु में एक किराए का मकान ढूंढ रहे नए शख्स को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब मकान मालिक ने केवल किराया और डिपॉजिट ही नहीं पूछा, बल्कि सवालों की ऐसी लंबी लिस्ट थमा दी कि लगा मानो कोई जॉब इंटरव्यू चल रहा हो. रेडिट पर शेयर की गई यह कहानी अब इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है.
कई HNI परिवारों के लिए, लग्जरी घर सिर्फ एक लाइफस्टाइल चॉइस ही नहीं, बल्कि संपत्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक साधन बन गया है.
गुरुग्राम में लोग अब तो बारिश के नाम से ही डरने लगे हैं, कुछ घंटों की बारिश क्या होती है पूरा शहर ही थम सा जाता है. पिछले दो दिनों से गुरुग्राम के लोग इस शहर में घर लेकर पछता रहे हैं. हालात इतने खराब हो चुके हैं लोगों को वर्फ फ्रॉम होम की सलाह दी जा रही है.
जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों के आशियाने और जेब पर सीधा हमला बनने जा रहा है. ताजा स्टडी में खुलासा हुआ है कि अगले 30 सालों में यानी वर्ष 2055 तक मौसम की मार के कारण अमेरिकी रियल एस्टेट बाजार को करीब $1.47 ट्रिलियन (लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर) का भारी नुकसान झेलना पड़ेगा.
बेंगलुरु का रियल एस्टेट मार्केट इस वक्त अपने सबसे बड़े उफान पर है, जहां मुख्य शहर से 1 करोड़ रुपये से कम के फ्लैट्स लगभग गायब हो चुके हैं, पिछले 5-6 सालों में जहां ज़मीन के दाम 300% तक उछले हैं, वहीं आमदनी की रफ्तार इसकी तुलना में बेहद धीमी रही है.
हालांकि मकान मालिकों को वास्तविक नुकसान की भरपाई का पूरा अधिकार है, लेकिन वे संपत्ति के स्वाभाविक पुराने होने या दिन-प्रतिदिन के रखरखाव के खर्च को वसूलने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट का इस्तेमाल नहीं कर सकते.
अब कंपनियां केवल निवेशकों के टैक्स-फ्री फायदे को बचाने के लिए पुरानी प्रणाली में रहने को मजबूर नहीं होंगी, बल्कि स्वतंत्रता से सही टैक्स व्यवस्था चुन सकेंगी.
इन शहरों में आईटी सेक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के विस्तार और लगातार आ रहे कामकाजी लोगों की वजह से किराए के मकानों की जबरदस्त मांग बनी हुई है.