क्या आप जानते हैं कि समान क्षेत्रफल होने के बावजूद भारतीय घर अमेरिकी घरों के मुकाबले छोटे क्यों महसूस होते हैं? इसके पीछे जमीन की कमी नहीं बल्कि आपके घर के अंदर छिपे वो विजुअल विलेन हैं जो आपकी आंखों को धोखा देते हैं.
भारत में इतिहास सिर्फ किलों और महलों तक सीमित नहीं है, कुछ होटल ऐसे भी हैं जिनकी दीवारों ने आजादी से पहले का दौर देखा है. जानिए, कौन से हैं वो होटल, जिनमें आज भी इतिहास जिंदा है.
क्या बदलती विश्व व्यवस्था छोटे द्वीप राष्ट्रों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है? 'विश्व सरकार शिखर सम्मेलन' में कैरेबियन नेताओं ने इसी सवाल का जवाब देते हुए एक ऐसी चेतावनी दी है, जो दुनिया के बड़े देशों को सोचने पर मजबूर कर देगी.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि दरों में बढ़ोतरी न होना देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का परिचायक है. इस फैसले से न केवल होम लोन की ईएमआई (EMI) स्थिर रहेगी, बल्कि घर खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के बीच सकारात्मक माहौल बनेगा.
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी जीत है जो ईएमआई (EMI) और किराया दोनों भरते-भरते थक चुके थे. हालांकि घर मिलने में अभी 2 साल का समय और लगेगा, लेकिन NBCC के आने से अब खरीदारों को यह भरोसा है कि उनका घर कागजों से निकलकर हकीकत में जमीन पर उतरेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 में आई कीमतों की सुनामी के बाद अब बाजार एक स्थिर दौर में पहुंच रहा है, जहां बिल्डर कीमतों को स्थिर रखकर पुराने स्टॉक को निकालने की कोशिश करेंगे.
पैनल ने इस बात पर सहमति जताई कि तकनीकी बदलाव की तेज़ रफ्तार आने वाले वर्षों को चुनौतीपूर्ण बना देगी. लेकिन उन्होंने इसे देशों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में भी देखा.
आज के समय में मुंबई, दिल्ली या गुरुग्राम के पॉश इलाकों में एक अच्छे फ्लैट की कीमत भी 3 से 5 करोड़ रुपये के पार जा चुकी है. ऐसे में भारतीय निवेशकों को लगता है कि उतने ही पैसे में दुबई जैसे ग्लोबल शहर में प्रॉपर्टी खरीदना ज्यादा फायदेमंद और सस्ता सौदा है.
मास्टर प्लान 2041 के अनुसार निर्माण होता है, तो आने वाले 15-20 सालों में आगरा दुनिया के सबसे आधुनिक और रहने योग्य शहरों की सूची में शामिल हो सकता है. यह न केवल पर्यटकों को लुभाएगा बल्कि स्थानीय निवासियों को जाम और प्रदूषण से मुक्त एक नई जिंदगी देगा.
प्रॉपर्टी के सौदे में एक छोटी सी लापरवाही आपकी पूरी जमापूंजी डुबो सकती है. जालसाजों के इस खेल में असली दिखने वाले कागजों के पीछे का सच कैसे पहचानें? यहां जानें उन जरूरी स्टेप्स के बारे में, जो आपको हर कदम पर सावधान रखेंगे.
किराए का घर ढूंढना जितना मुश्किल है, उतना ही जोखिम भरा भी, खासकर जब मामला प्रॉपर्टी एजेंट का हो. जल्दबाजी में हम कई जरूरी बातें नजरअंदाज कर देते हैं, जिनका खामियाजा बाद में भारी पड़ता है. घर फाइनल करने से पहले किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है? यहां जानिए...
गुरुग्राम में पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी के रेट इतने तेजी से बढ़े हैं कि यहां एक करोड़ सालाना कमाने वाले लोग भी अच्छा घर खरीदने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद बहस छिड़ गई हैं.
अगर आप दिल्ली-एनसीआर में अपने घर या दुकान का सपना देख रहे हैं, तो गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) आपके लिए एक शानदार अवसर लेकर आया है. बची हुई और खाली संपत्तियों को अब खुली नीलामी के जरिए खरीदने का मौका मिल रहा है.
नोएडा का फिल्म सिटी आने वाले वक्त में मुंबई को टक्कर देने की तैयारी में जेवर एयरपोर्ट के पास बन रहे फिल्म सिटी ने इस इलाके की जमीनों के दांम बढ़ा दिए हैं और आने वाले वक्त में और तेजी आने की उम्मीद है.
मुंबई में घर खरीदने की इच्छा रखने वालों के लिए म्हाडा ने 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर 120 फ्लैट्स की योजना शुरू की है, जिसमें ₹38 लाख से लेकर ₹8 करोड़ तक के विकल्प मौजूद हैं.
भारत की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ शहरों में रहने की लागत कितनी तेजी से बढ़ रही है. 1 लाख की सैलरी जो कभी एक 'स्टेटस सिंबल' मानी जाती थी, वह आज इन महानगरों में सिर्फ सरवाइवल के लिए रह गई है.
मेट्रो शहरों की भीड़भाड़ से दूर अब इंदौर, लखनऊ और सूरत जैसे छोटे शहर रियल एस्टेट के नए 'पावरहाउस' बनकर उभर रहे हैं. बजट 2026-27 में रिस्क फंड और बेहतर कनेक्टिविटी पर दिए गए जोर ने इन टियर-2 और टियर-3 शहरों को विकास की दौड़ में दिल्ली-मुंबई के बराबर खड़ा कर दिया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मंदी से जूझ रहे सस्ते घरों के बाजार को इस बजट में संजीवनी मिलने की उम्मीद थी, जो फिलहाल अधूरी रह गई है. यह सेक्टर काफी समय से मंदी की मार झेल रहा है, लेकिन बजट में इसे लेकर कोई बड़ी राहत नहीं दी गई.
REITs मॉडल का उपयोग किया जाएगा. सरकार अपनी पुरानी या खाली पड़ी संपत्तियों को इस मॉडल के जरिए 'रीसाइकिल' करेगी, जिससे जो नकदी पैदा होगी, उसे फिर से नए विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत खर्च में ऐतिहासिक बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹12.2 लाख करोड़ करने का ऐलान किया है. यह कदम बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देने की सरकार की निरंतर कोशिशों का हिस्सा है,
आज के दौर में एक अच्छी प्रॉपर्टी की पहचान केवल उसकी कीमत से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले सुकून से होती है. बेडरूम को वेलनेस जोन बनाकर आप अपनी लाइफस्टाइल और घर की वैल्यू दोनों बढ़ा सकते हैं.