महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव और बीएमसी में मिली हार के बाद शिवसेना उद्धव गुट प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला है नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने हार के कारणों पर पहली बार खुलकर बात की और महायुति को निशाने पर लिया
बीएमसी चुनाव में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर 114 का मैजिक फिगर पार कर लिया. 28 साल बाद ठाकरे परिवार सत्ता से बाहर हो गया. उद्धव और राज ठाकरे साथ आए, फिर भी मराठी वोटों को एकजुट नहीं कर सके. नतीजों ने दिखाया कि मुंबई की राजनीति और मराठी वोट समीकरण में बड़ा बदलाव आ चुका है.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने छत्रपति संभाजीनगर में कहा कि तकनीक का उपयोग समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि लोगों को उसका गुलाम बनाने के लिए. उन्होंने युवा उद्यमियों से संवाद में स्पष्ट किया कि स्वदेशी अपनाने का मतलब तकनीक को नकारना नहीं है और तकनीक अपने आप में बुरी नहीं होती, बस उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता नहीं होनी चाहिए.
बीएमसी में सत्ता गठन को लेकर सियासी बातचीत तेज हो गई है चुनाव में दूसरे नंबर पर रही एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने मेयर पद को लेकर बीजेपी के सामने 50-50 पावर शेयरिंग फॉर्मूला रखा है.
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद मुंबई की पौलिटिक्स में खींचतान तेज हो गई है. इस बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सख्त कदम उठाते हुए शिंदे गुट की शिवसेना के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बांद्रा स्थित एक फाइव स्टार होटल में एकत्रित होने का निर्देश दिया है.
बीएमसी चुनाव में करारी हार के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर हमला बोला. नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने हार के कारणों पर खुलकर बात की और बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट पर निशाना साधा. ठाकरे ने कहा कि सत्ता, पैसा और दबाव से लोग तोड़े जा सकते हैं, लेकिन जमीनी शिवसेना और कार्यकर्ताओं की निष्ठा को कभी खरीदा नहीं जा सकता.
BMC चुनाव में दूसरे नंबर पर रही एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने मेयर पद को लेकर बड़ा सियासी दांव चला है. पार्टी ने BJP के सामने 50-50 पावर शेयरिंग का प्रस्ताव रखा है, जिस पर अब हाईकमान का फैसला बाकी है.
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद सत्ता की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ तेज हो गई है. किंगमेकर की भूमिका में आई एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के चलते अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में ठहराने का फैसला किया है.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुंबई मेयर चुनाव में BJP को समर्थन देने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि AIMIM किसी भी सूरत में BJP या NDA के साथ नहीं जा सकती. साथ ही, ओडिशा की हालिया घटना का जिक्र करते हुए ओवैसी ने BJP शासित राज्यों में गौ रक्षकों को खुली छूट देने का आरोप लगाया.
मुंबई BMC पर BJP का कब्जा. बहुमत से 4 सीटें ज्यादा जीतीं बीजेपी और शिंदे सेना. मुंबई नगर निगम चुनाव में सभी 227 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. करीब ढाई दशक से ठाकरे परिवार का गढ़ मानी जाने वाली BMC में इस बार भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
बीएमसी चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स को मिली शिकस्त के लिए संजय राउत में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को जिम्मेदार ठहराया था. इस पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने संजय राउत को नारद मुनि और मंथरा का मिला जुला रूप बताया है, जबकि संजय राउत ने एकनाथ शिंदे को जयचंद करार दिया था.
महाराष्ट्र के निकाय चुनाव नतीजों ने राज्य की राजनीति की तस्वीर बदल दी है. बीएमसी समेत 29 नगर निगमों में बीजेपी–शिंदे गठबंधन की बड़ी जीत हुई, जबकि ठाकरे ब्रदर्स और पवार परिवार बुरी तरह पिछड़ गए. यह परिणाम भावनात्मक और परिवारवादी राजनीति पर जनता की नाराजगी का संकेत देता है.
मुंबई नगर निगम चुनाव के नतीजे आ गए हैं और तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है. बीएमसी की सत्ता में 25 साल बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना दूसरे नंबर पर रही, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा और पार्टी सिर्फ 24 सीटों तक सिमट गई.
बीएमसी चुनाव ने महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है. 25 साल बाद शिवसेना का किला ढह गया और पहली बार बीएमसी में बीजेपी का मेयर बनना लगभग तय है. ठाकरे ब्रदर्स की एकजुटता भी मतदाताओं को नहीं रिझा सकी. नतीजों ने बाला साहेब की विरासत और ठाकरे राजनीति के भविष्य पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं.
मुंबई नगर निगम चुनाव में संताक्रूज वार्ड 90 के नतीजे चर्चा में हैं. यहां कांग्रेस ने बीजेपी उम्मीदवार को महज 7 वोटों से चुनाव हरा दिया. जबकि मलाड वेस्ट के वार्ड 46 में बीजेपी ने रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की.
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में महायुति गठबंधन ने बड़ी सफलता हासिल की है. भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के सहयोग से पच्चीस नगर निगमों में जीत मिली. मुंबई में बीएमसी में पहली बार बीजेपी का मेयर बनने जा रहा है.
महाराष्ट्र निकाय चुनावों में बीजेपी ने शहरी राजनीति का पूरा नक्शा बदल दिया है. बीएमसी, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसी अहम नगरपालिकाओं में बीजेपी की जीत ने ठाकरे और पवार परिवारों को बड़ा झटका दिया. रिजल्ट से साफ है कि महायुति का दबदबा बढ़ा, जबकि कांग्रेस का शहरी आधार और कमजोर पड़ा.
बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिंदे गुट की जीत के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. संजय राउत ने एकनाथ शिंदे पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए उन्हें जयचंद करार दिया. शिवसेना की दशकों पुरानी पकड़ टूटने को राउत ने शिंदे की बगावत से जोड़ा.
चुनावी जीत की खुशी अकोला में हिंसा में बदल गई. नतीजों के ऐलान के बाद बीजेपी के नवनिर्वाचित नगरसेवक शरद तुरकर पर चाकू से हमला हुआ, जिससे सियासी तनाव भड़क उठा. पार्टी के भीतर गुटबाजी से जुड़ा यह विवाद पथराव और पुलिस लाठीचार्ज तक जा पहुंचा.
देवेंद्र फडणवीस का राजनीतिक करियर महाराष्ट्र में भाजपा के उत्थान का पर्याय रहा है. 2014 में जब केंद्र में मोदी सरकार बनी तो महाराष्ट्र ने फडणवीस के रूप में अपना पहला बीजेपी मुख्यमंत्री पाया. यह पहला मौका था जब भाजपा ने राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई.
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन मिला जुला रहा है. यहां पार्टी को कुछ खास कामयाबी नहीं मिली है. देश की सबसे चर्चित नगर निगम बीेएमसी में कांग्रेस को 24 सीटें मिली हैं. जबकि यहां 227 वार्ड हैं. हालांकि महाराष्ट्र के कुछ शहरों में कांग्रेस की स्थिति नंबर वन की है. इनमें लातूर, भिवंडी, चंद्रपुर और कोल्हापुर शामिल हैं.