चांद मिशन से लौटने पर NASA की अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच का उनके डॉग सैडी ने भावुक स्वागत किया. वीडियो वायरल हुआ और लोगों को पालतू जानवरों के प्यार की याद दिलाई.
जम्मू-कश्मीर में बड़ा पर्यावरण संकट आ गया है. CAG रिपोर्ट के अनुसार 697 प्राकृतिक झीलों में से 315 पूरी तरह गायब हो चुकी हैं. 1967 से अब तक 2851 हेक्टेयर झील क्षेत्र खत्म हो गया. 203 झीलें सिकुड़ गई हैं. प्रशासन की लापरवाही, प्रदूषण और अतिक्रमण की वजह से यह हुआ है. रिपोर्ट ने सरकार की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है.
पनामा का सुनहरा मेंढक विलुप्त होने की कगार पर है. 2009 के बाद जंगलों में यह प्रजाति लगभग खत्म हो चुकी है. अब 2026 में वैज्ञानिक लैब में पैदा हुए मेंढकों को जंगलों में वापस छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. यह प्रोजेक्ट मेंढक की प्रजाति बचाने की अंतिम उम्मीद है.
हिमालय और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच एक रिश्ता है. वो ये कि दोनों एक ही घटना से बने. पश्चिम में संकरा समुद्री रास्ता और पूर्व में हिमालय. लाखों साल पहले गायब हुए टीथिस सागर से दोनों का जन्म हुआ. टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से सागर गायब हुआ. उसी समय एक जगह तेल मार्ग और दूसरी जगह दुनिया की सबसे ऊंचे पहाड़ बनाए.
नासा का आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. चारों अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों की चंद्रमा यात्रा के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरे. यह आधा सदी बाद इंसानों की पहली चंद्रमा यात्रा थी. मिशन में उन्होंने पृथ्वी से सबसे दूर रिकॉर्ड दूरी तय की. अब 2028 में चंद्रमा पर लैंडिंग की तैयारी है.
Artemis 2 Splash Down Live Updates: नासा का आर्टेमिस II मिशन पूरा हो चुका है. 11 अप्रैल 2026 को सुबह 5.37 बजे प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास स्प्लैशडाउन हो गया है. चारों अंतरिक्षयात्री चंद्रमा घूमकर घर लौट आए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरिक्षयात्रियों को बधाई दी है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन अंतिम चरण में पहुंच गया है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने रिटर्न ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न पूरा कर लिया. 11 अप्रैल 2026 को सुबह 5 से 5.37 बजे के बीच यह प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास स्प्लैशडाउन करेगा. चार अंतरिक्षयात्री चंद्रमा घूमकर घर लौट रहे हैं. लाइव देखें NASA यूट्यूब पर सुबह 4 बजे से.
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों पर टोल वसूली बढ़ती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा. शिपिंग लागत बढ़ने से तेल, खाद्य और जरूरी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी. सप्लाई चेन बाधित होगी और जियो-पॉलिटिकल तनाव भी बढ़ सकते हैं. ऐसे हालात में आर्थिक अस्थिरता गहराएगी और वैश्विक बाजारों पर दबाव साफ नजर आएगा.
होर्मुज की तरह अगर दुनिया के 10 बड़े चोक पॉइंट- मलक्का, स्वेज, पनामा, जिब्राल्टर और बाकी सब टोल वसूलने लगें तो 80% ग्लोबल समुद्री व्यापार टोल का जाल बन जाएगा. जहाजों की लागत 2-5 गुना बढ़ेगी, महंगाई का तूफान आ जाएगा. भारत जैसे देशों में पेट्रोल ₹300/लीटर और दाल ₹200/किलो हो सकता है. देशों के बीच झगड़े, युद्ध का खतरा और पर्यावरणीय नुकसान बढ़ जाएगा.
युगांडा के नगोगो जंगल में 200 चिम्पैंजियों का विशाल समूह 20 साल तक शांतिपूर्वक रहता था. 2015 में यह दो गुटों में बंट गया. पुराने दोस्त अब दुश्मन बन गए. 2018 से शुरू हुए खूनी गृहयुद्ध में एक गुट ने दूसरे के 7 वयस्क नर और 17 बच्चों को मार डाला. कुल 24 मौतें हुईं. वैज्ञानिक कहते हैं- वे सभी अपनी सफलता के शिकार बने. भोजन की कोई कमी नहीं थी, फिर भी युद्ध छिड़ा. यह इंसानी गृहयुद्धों की जड़ बताता है.
Spring Season in India: भारत में बसंत का मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जेट स्ट्रीम में बदलाव एवं अल नीनो और ला नीना की ओर ट्रांजिशन के कारण मौसम अस्थिर हो गया है. बसंत का समय अब कम महसूस हो रहा है. यह बदलाव सिर्फ एक साल का नहीं बल्कि एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है, जो भविष्य में बसंत को और छोटा कर सकता है.
एक 58 साल की महिला के छींकते ही उसकी नाक से 10 कीड़े निकले तो उसका क्या होगा, वो भी भेड़ में पाए जाने वाले कीड़े. असल में ये कहानी असली है. ग्रीस में इस महिला को दिक्कत हुई. डॉक्टरों ने सर्जरी कर कीड़ों को निकाला. बॉयोलॉजिकली ये चीज पॉसिबल नहीं है. इस घटना से डॉक्टर भी हैरान हो गए.
चंद्रमा से लौट रहे ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 192 करोड़ का टॉयलेट सिस्टम खराब हो गया. केमिकल रिएक्शन के चलते यूरिन डिस्पोजल सिस्टम बंद है और क्रू बैकअप का इस्तेमाल कर रहा है. NASA ने कहा, पृथ्वी पर लौटने के बाद समस्या की जांच की जाएगी.
ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की यात्रा पूरी कर पृथ्वी लौट रहा है. लेकिन 192 करोड़ रुपये का टॉयलेट जाम हो गया है. यूरिन निकालने वाला सिस्टम बंद हो गया है. एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच बैकअप कंटेनर इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने खुद को स्पेस प्लंबर बताया. टॉयलेट अभी काम कर रहा है लेकिन वेस्टवॉटर टैंक खाली नहीं हो पा रहा. इन चारों एस्ट्रोनॉट्स को धरती पर आने में अभी 24 घंटे का समय है.
उत्तर भारत में अप्रैल 2026 में फरवरी जैसा मौसम हो रहा है. IMD के अनुसार मार्च-अप्रैल में दो महीनों में 8 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव हुए. अरब सागर की नम हवाएं इन सिस्टम को बहुत मजबूत बना रही हैं. आर्कटिक गर्मी से जेट स्ट्रीम लहरदार हो गई है. इससे बारिश, ओले और ठंड बढ़ गई. तापमान 8-15 डिग्री नीचे गिरा है.
ईरान जंग में CIA ने पहली बार ‘घोस्ट मरमर’ नाम की सीक्रेट टेक्नीक का इस्तेमाल किया. यह क्वांटम मैग्नेटोमीट्री और AI से 64 किलोमीटर दूर से इंसान की दिल की धड़कन पकड़ लेती है. इससे ईरान में गिरे दूसरे अमेरिकी पायलट को 48 घंटे बाद पहाड़ की दरार से सुरक्षित बचाया गया.
2026 में भारत का मॉनसून सामान्य से करीब 6% कम बारिश के साथ कमजोर रहने की संभावना है. स्काईमेट के अनुसार, जून से सितंबर तक कुल बारिश 94% LPA रहेगी. मध्य और पश्चिम भारत में कम बारिश होगी जबकि पूर्वोत्तर में बेहतर बारिश की उम्मीद है. अल नीनो के प्रभाव से सूखे का खतरा बढ़ सकता है.
चांद के गड्ढे, करीब से पूर्ण सूर्य ग्रहण, पृथ्वी का अस्त और उदय, शुक्र-शनि-मंगल ग्रह... ओरियन स्पेसक्राफ्ट की खिड़की से आर्टेमिस II के एस्ट्रोनॉट्स ने ये 10 लुभावने दृश्य कैद किए. चंद्रमा के दूर वाले हिस्से पर 6543 किमी की दूरी से ली गई इन तस्वीरों में पृथ्वी, चांद और ग्रह एक साथ दिख रहे हैं.
40 दिन की ईरान जंग थम गई, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है. सीजफायर के बावजूद ईरान ने रास्ता पूरी तरह नहीं खोला. लाइव ट्रैकर पर देखें तो पिछले 24 घंटे में सिर्फ 20 जहाज गुजरे, जबकि रोजाना 60 गुजरते हैं. तेल-गैस सप्लाई अब भी प्रभावित है.
स्काईमेट ने मंगलवार को अपना पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा कि 2026 में भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहेगा. जून से सितंबर तक चार महीनों की कुल बारिश लंबी अवधि के औसत 868.6 मिलीमीटर की सिर्फ 94 प्रतिशत ही रहेगी, जो सामान्य से नीचे की कैटेगरी में आता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) अपना पहला आधिकारिक पूर्वानुमान अगले हफ्ते जारी करेगा.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाला ब्लैक कार्बन हिमालय के ग्लेशियरों को तेजी से पिघला रहा है. ब्लैक कार्बन यानी बेहद छोटे-छोटे कण जो बर्फ पर जमा होकर सूरज की गर्मी ज्यादा सोखते हैं. इससे बर्फ का तापमान बढ़ता है. फिर वो पिघलता है. पिछले 23 सालों में हिमालय की बर्फ की सतह का तापमान करीब 4 डिग्री बढ़ गया है. इससे ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं. भविष्य में पानी की कमी का खतरा बढ़ रहा है.