भारत का पहला निजी रॉकेट विक्रम-1 श्रीहरिकोटा से 18 जुलाई को लॉन्च होगा. पहली बार कोई निजी कंपनी ये काम कर रही है. देश के स्पेस सेक्टर में नया अध्याय जोड़ सकती है.
इसरो के गगनयान जैसे बड़े मिशनों के वैज्ञानिकों के इस्तीफे और रिटायरमेंट रोक दिए गए हैं. सरकार का आदेश दिखाता है कि अच्छे वैज्ञानिक इसरो छोड़ रहे हैं. ये समस्या काफी गहरी है.
नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक हिमालय में अनुमान से कहीं ज्यादा बर्फबारी हो रही है. स्टडी में दावा किया गया है कि मौजूदा मौसम मॉडल कई क्षेत्रों में बर्फबारी का सही आकलन नहीं कर पा रहे, जिससे मौसम पूर्वानुमान और जल संसाधन प्रबंधन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में ज़्यादा सटीक बर्फबारी के आंकड़े मौसम पूर्वानुमान, हिमस्खलन चेतावनी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
हिमालय में गिरने वाली बर्फ का असली आंकड़ा अब तक दुनिया से छिपा रहा. नई स्टडी बताती है कि ग्लोबल मौसम मॉडल कई इलाके में बर्फबारी का अनुमान काफी कम लगा रहे हैं, जिससे मौसम और पानी के आकलन पर असर पड़ सकता है.
19-20 जुलाई से मॉनसून की वापसी हो रही है. उत्तर और पूर्वी भारत में पंजाब से बंगाल तक भारी बारिश की संभावना. उत्तराखंड-हिमाचल में बहुत भारी बारिश का अलर्ट, जबकि अन्य राज्यों में बिखरी बारिश होगी.
फ्रांस में तीन न्यूक्लियर रिएक्टर बंद करने पड़े. वजह थी बढ़ती गर्मी और नदियों का बढ़ता तापमान. अब सवाल है कि क्या भारत के परमाणु बिजलीघरों के सामने भी कभी ऐसी स्थिति आ सकती है?
भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन माइक्रोग्रैविटी में हाई-क्वालिटी सेमीकंडक्टर बनाने के मकसद से किए जाने वाले एक्सपेरिमेंट में भी हिस्सा लेंगे. साइंटिस्ट्स का मानना है कि स्पेस का भारहीन वातावरण ज़्यादा यूनिफॉर्म और बिना किसी खराबी वाले सेमीकंडक्टर मटीरियल बनाने में मदद कर सकता है.
IITM पुणे की स्टडी में खुलासा हुआ कि भारत में मॉनसून की औसतन 25% बारिश जमीन तक पहुंचने से पहले ही वाष्प बन जाती है. जानिए इसका मौसम, कृषि और जल संसाधनों पर क्या असर पड़ सकता है. भविष्य में पूरे देश में इसी तरह के अध्ययन किए जाएंगे, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रक्रिया के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.
IITM पुणे की नई स्टडी में खुलासा हुआ कि भारत के मॉनसून की 25% बारिश हवा में ही उड़ जाती है. पश्चिमी घाट क्षेत्र में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है.
अगले तीन महीनों (अगस्त-सितंबर-अक्टूबर) में अल-नीनो का असर भारत के मॉनसून पर भारी पड़ सकता है. ECMWF की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के बड़े इलाकों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है.
गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही, मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा रही है. यूरोप में जून के आखिरी सप्ताह में 10 हजार से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज होने के बाद वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है.
एक पहाड़ पर कहीं हल्की बारिश होती है, तो कुछ किलोमीटर दूर बादल फट कर तबाही मचा देता है. नया हाई-रिजोल्यूशन क्लाइमेट मॉडल इसी फर्क को पहले से समझने और खतरे का अंदाजा लगाने का दावा करता है.
मौसम विज्ञान विभाग ने देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. IMD के अनुसार, आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी.
चीन जिस मेगा डैम को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रहा है, उसी को लेकर नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि डैम ऐसे इलाके में बन रहा है, जहां सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद है.
यूरोप में आई हीटवेव को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा किया है. क्लाइमेट चेंज ने गर्मी इतनी बढ़ा दी कि करीब 1500 लोगों की मौत इससे जुड़ी पाई गई.
इन महाशय का नाम है 'नील', वजन करीब 1 टन और चर्चा है कि इनका वजन अभी तीन गुना और बढ़ेगा. फेमस इतने कि पूरा शहर इन्हें देखने निकल पड़ा. ये भी शहर में आराम से घूमते हैं.
बंगाल की खाड़ी से मध्य प्रशांत महासागर तक 7000-10000 किलोमीटर लंबा बादलों का कारवां बना हुआ है. जिसके अंदर कई ट्रॉपिकल सिस्टम एक्टिव हैं. अगर ये नजदीक आए तो 20-30 जुलाई के दौरान भारत में बारिश लौट सकती है.
श्रीनगर में मौसम बदला और शहर के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई है. पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में राहत मिली है. उत्तर-पूर्वी राज्यों, पश्चिम बंगाल और बिहार में अगले दो-तीन में भारी बारिश होने की संभावना है.
भारत के अधिकांश हिस्सों में सूखा पड़ रहा है, लेकिन प्रशांत महासागर में मौसमी सिस्टम बन रहे हैं. अगर ये बंगाल की खाड़ी पहुंचे तो 18-25 जुलाई में मॉनसून की वापसी हो सकती है.
कुछ दिन पहले तक देशभर में हो रही थी झमाझम बारिश, लेकिन अब सैटेलाइट तस्वीरों में भारत का बड़ा हिस्सा बिना बारिश वाले बादलों के दिख रहा है. आखिर मौसम ने इतनी जल्दी करवट क्यों बदली?
भारत का एक स्टार्टअप ऐसे रॉकेट इंजन पर काम कर रहा है, जिसे दुनिया की सबसे मुश्किल स्पेस तकनीकों में गिना जाता है. अगर यह सफल रहा तो देश की लॉन्च क्षमता और रीयूजेबल रॉकेट बनाने की तैयारी को बड़ी ताकत मिल सकती है.