मेट्टुप्पलयम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 111) तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में नीलगिरि पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यह इलाका मैदानी पश्चिमी तमिलनाडु को कुन्नूर और उधगमंडलम जैसे पहाड़ी क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक प्रवेश द्वार माना जाता है. ऐतिहासिक रूप से यह एक रेलवे और व्यापारिक शहर रहा है, लेकिन आज के समय में यह क्षेत्र अर्ध-शहरी विकास, पारंपरिक रोजगार और ट्रांजिट अर्थव्यवस्था का मिश्रण बन चुका है. यह नीलगिरि पर्वतीय रेल की शुरुआत का मुख्य बिंदु है और कोयंबटूर-ऊटी मार्ग का एक अहम जंक्शन भी है, इसलिए इसका महत्व इसके आकार से कहीं ज्यादा है.
शहरीकरण धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन फिर भी यहां का माहौल छोटे शहर जैसा ही है, जहां खेती, नदी पर निर्भर काम और सर्विस सेक्टर के रोजगार प्रमुख हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र काफी प्रतिस्पर्धी और विविधता वाला है. यहां के मतदाताओं में व्यापारी, छोटे उद्यमी, किसान मजदूर, टेक्सटाइल से जुड़े कामगार, ट्रांसपोर्ट वर्कर और बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग शामिल है. अल्पसंख्यक समुदाय मौजूद हैं, लेकिन नीलगिरि के पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में उनका प्रभाव कम है. यहां वोटिंग पैटर्न अक्सर स्थानीय नेताओं के काम और विकास कार्यों पर निर्भर करता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र भवानी नदी के बेसिन में स्थित है, जहां नहरों और भूजल के माध्यम से सिंचाई होती है और अच्छी खेती होती है. यह कोयंबटूर शहर को नीलगिरि से जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट हब है, खासकर मेट्टूपालयम-कुन्नूर घाट रोड के जरिए. लेकिन इसी कारण यहां ट्रैफिक की समस्या भी बढ़ती जा रही है. रेलवे फाटक, सड़क जाम और पर्यटन के कारण वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. मानसून के समय नदी के किनारे वाले इलाकों में बाढ़ और खराब जल निकासी की समस्या बार-बार देखने को मिलती है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में मेट्टुप्पलयम टाउन मार्केट एरिया, रेलवे स्टेशन और एनएमआर यार्ड, करामडई जंक्शन, सिरुमुगई का जंगल क्षेत्र, भवानी नदी के किनारे बसे गांव, मेट्टुप्पलयम-कुन्नूर घाट रोड, बस स्टैंड और मुख्य व्यापारिक इलाका शामिल हैं.
यहां की मुख्य समस्याओं में ट्रैफिक जाम और रेलवे गेट पर देरी, बरसात में पानी भरना और खराब ड्रेनेज, भारी पर्यटक ट्रैफिक से सड़कों का खराब होना, गर्मियों में पीने के पानी की कमी, सरकारी अस्पतालों की सीमित क्षमता, कचरा प्रबंधन की दिक्कतें, युवाओं के लिए रोजगार के कम अवसर और सड़कों व नदी किनारों पर अतिक्रमण शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी अलग-अलग जरूरतों के अनुसार बदलता है. व्यापारी बेहतर ट्रांसपोर्ट और बाजार तक आसान पहुंच चाहते हैं, किसान सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की मांग करते हैं, युवा रोजगार और स्किल डेवलपमेंट की तलाश में हैं, महिलाएं पानी, साफ-सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, जबकि शहर के लोग ट्रैफिक और ड्रेनेज की समस्या का समाधान चाहते हैं. यहां के मतदाता काम के आधार पर निर्णय लेते हैं और अगर उन्हें सही विकास नहीं मिलता, तो वे नए विकल्पों के लिए भी तैयार रहते हैं.
Shanmugasundaram T R
DMK
Yasmin K
NTK
Nota
NOTA
Saravanan P
AMMKMNKZ
Srinivasan S
IND
Maheshwaran K
VTVTK
Shanmugasundaram P
IND
Liakathali O
IND
Shanmugasundaram K
IND
Mariappan T
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.