परमथी-वेलूर (विधानसभा क्षेत्र संख्या 95) एक ऐसा कोंगु क्षेत्र है जहां पानी की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित है, लेकिन सामाजिक रूप से यह जाति समीकरणों के प्रति संवेदनशील सीट मानी जाती है. यहां चुनावी नतीजे मुख्य रूप से कावेरी नदी की सिंचाई व्यवस्था की स्थिरता, कोंगु समुदाय का एकजुट मतदान, और अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं की भागीदारी पर निर्भर करते हैं. सरकारी कल्याण योजनाएं असर डालती हैं, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा किसानों की आय को लेकर भरोसा होता है. यहां जीत का अंतर आमतौर पर बहुत बड़ा नहीं होता और यह काफी हद तक पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से इस क्षेत्र में कुछ प्रमुख मतदाता वर्ग निर्णायक भूमिका निभाते हैं. कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय संख्या में प्रभावशाली और चुनावी रूप से निर्णायक है. इसके अलावा कावेरी सिंचाई क्षेत्र के किसान, खेतों में काम करने वाले SC कृषि मजदूर, वेलूर कस्बे के व्यापारी और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग, डेयरी और कृषि से जुड़े परिवार, तथा महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) भी महत्वपूर्ण मतदाता समूह हैं. यहां जीत का रास्ता तभी बनता है जब उम्मीदवार पानी की सुरक्षा का भरोसा दे और सभी जातियों को सम्मान दे.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखता है, एक तरफ कावेरी से सिंचित गांव हैं और दूसरी तरफ सूखे आंतरिक इलाके. परमथी और वेलूर सेवा केंद्र वाले कस्बे हैं जहां व्यापार और अन्य सुविधाएं केंद्रित हैं. सड़क नेटवर्क अच्छा है और बस्तियां मुख्य रूप से कृषि पर आधारित हैं. यहां की राजनीतिक स्थिति और मतदाताओं का मूड काफी हद तक सिंचाई की स्थिरता से तय होता है.
चुनावी दृष्टि से कुछ इलाके विशेष रूप से संवेदनशील माने जाते हैं, जिनमें कावेरी कमांड एरिया के गांव, सूखे बेल्ट के अंदरूनी बस्तियां, SC कृषि मजदूरों की कॉलोनियां, वेलूर नगर वार्ड, और डेयरी व दूध सप्लाई मार्ग से जुड़े गांव शामिल है. इन सभी क्षेत्रों की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता, आय की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच पर निर्भर करती है.
यहां के मुख्य मुद्दों में कावेरी से पानी छोड़े जाने और नहरों के रखरखाव, पंपसेट के लिए बिजली आपूर्ति, फसलों के दाम की स्थिरता और खेती की लागत, ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता, सूखे क्षेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता, तथा सरकारी अस्पताल और स्कूलों तक पहुंच शामिल हैं.
मतदाताओं की अपेक्षा रहती है कि उनका विधायक सिंचाई हितों की रक्षा करे, पानी से जुड़े विवादों के समय मौजूद रहे, जाति और ग्राम पंचायतों का सम्मान करे, लोक निर्माण विभाग (PWD) और बिजली बोर्ड (TNEB) के साथ मामलों को तेजी से आगे बढ़ाए और गांव स्तर पर दिखाई देने वाले विकास कार्य कराए. खासकर नहर क्षेत्र के गांवों की अनदेखी करना चुनावी दृष्टि से घातक माना जाता है. इसी तरह केवल शहरी विकास की बातें करना, सिर्फ कल्याण योजनाओं के सहारे प्रचार करना या अत्यधिक वैचारिक ध्रुवीकरण करना भी यहां के मतदाताओं को पसंद नहीं आता.
Moorthiy K S
DMK
Uvarani K
NTK
Natarajan K
MNM
Saminathan P P
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Raman V
BSP
Sekar R
IND
Sundaram N
IND
Sekar N
IND
Devandran G
IND
Papathi R
IND
Nallappan K
IND
Thangarasu M
IND
Seerangan P
IND
Sundaram S
USIP
Mani K
GPI
Jayakumar K
IND
Parthasarathy S
IND
Moorthy M
IND
Karthikeyan N
IND
Samynathan G
IND
Sathiskumar D
IND
Kuzhandaivel K
IND
Periasamy R
IND
Prabhaharan M
IND
Balaji R
IND
Balasubramanian A
IND
Assembly Election News 2026 Live Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ममता बनर्जी के गढ़ में सत्ता हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. अमित शाह ने बंगाल के लिए आज बीजेपी का मेनिफेस्टो जारी किया है. बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपने ताजा इंटरव्यू में चुनावी राज्यों बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और वहां के मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. नबीन ने कहा कि बीजेपी शुरू से एक पॉलिसी पर काम करती आई है कि हम ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करते हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि हम सांस्कृतिक विरासत को बढ़ाने वाले लोग हैं. देखें बातचीत.
Assembly Election News 2026 Live Updates: विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है. असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है.
तमिलनाडु के चुनावी रण में TVK प्रमुख विजय के हमशक्लों की एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह 'सिनेमैटिक' बना दिया है. भारी गर्मी और प्रचार की बंदिशों के बीच, क्या पार्टी के ये 'बॉडी डबल्स' दिग्गज राजनेताओं के अनुभव और जमीनी संघर्ष पर भारी पड़ पाएंगे.
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को जांच के दौरान एडप्पाडी विधानसभा क्षेत्र के लिए पार्टी के मुख्य और डमी दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए हैं.
तमिलनाडु को सामाजिक न्याय की प्रयोगशाला माना जाता है, जिसका नतीजा है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में डीएमके और AIADMK ही नहीं कांग्रेस और बीजेपी ने भी किसी ब्राह्मण को उम्मीदवार नहीं बनाया है. सवाल उठता है कि आखिर क्यों ब्राह्मण प्रत्याशी देने से सियासी दल बच रहे हैं?
16 अप्रैल को बुलाए गए संसद सत्र में महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है. सरकार कानूनी रूप से 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करना चाहती है - विपक्ष को वैसे तो कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन टाइमिंग को लेकर सवाल जरूर उठाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि को लेकर बड़ा बवाल मच गया है. विपक्षी नेता पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर हमला बोलते हुए दावा किया कि उन्होंने अपने ही पिता करुणानिधि को आखिरी दिनों में घर में कैद करके रखा था. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ वही दोहरा रहे हैं जो स्टालिन के सगे भाई अलागिरि और करीबी नेता ए. राजा पहले ही कह चुके हैं.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन ने केंद्र की एनडीए सरकार और पीएम मोदी पर तीन-भाषा नीति लागू करने की चुनौती दी. उन्होंने सरकार पर हिंदी थोपने की नीति का कड़ा विरोध किया. स्टालिन महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर भी पीएम मोदी पर निशाना साधा.
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.