कुमारपालयम, विधानसभा क्षेत्र संख्या 97, एक घनी आबादी वाला औद्योगिक नगर क्षेत्र है, जिसकी राजनीति और अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पावरलूम और टेक्सटाइल उद्योग पर आधारित है. यहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी पर काम करने वाले परिवार रहते हैं. इस सीट पर मतदान व्यवहार किसी विचारधारा से ज्यादा रोजगार की निरंतरता, बिजली आपूर्ति, पानी की गुणवत्ता और प्रशासन की सक्रिय मौजूदगी पर निर्भर करता है. यह पूरी तरह से “रोजी-रोटी पहले” वाला निर्वाचन क्षेत्र है, यहां अगर आर्थिक गतिविधि प्रभावित होती है, उद्योग बंद होते हैं या मजदूरों की आय रुकती है, तो उसका सीधा असर वोटों पर पड़ता है और चुनावी परिणाम बदल सकते हैं. यह सीट 2011 में गठन के बाद से पारंपरिक रूप से अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के पास रही है.
राजनीतिक और सामाजिक संरचना की बात करें तो यहां के मतदाताओं में मुख्य रूप से पावरलूम मालिक और छोटे टेक्सटाइल कारोबारी, कपड़ा उद्योग से जुड़े मजदूर और दिहाड़ी श्रमिक, जिले के भीतर और अन्य राज्यों से आए प्रवासी कामगार, ओबीसी व्यापारी समुदाय, और नगर के वार्डों में बड़ी संख्या में रहने वाले अनुसूचित जाति समुदाय शामिल हैं. इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) और सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थी भी एक महत्वपूर्ण वोट बैंक बनाते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह एक घनी बसी हुई शहरी सीट है, जो भवानी और कावेरी नदी तंत्र के करीब स्थित है. यहां सड़क और रेल संपर्क अच्छा है, जिससे व्यापार और आवागमन को सुविधा मिलती है. हालांकि, कई इलाकों में प्रदूषित जल स्रोत एक बड़ी समस्या है और अंदरूनी सड़कों पर भीषण जाम और संकरी गलियां आम बात हैं. यहां की राजनीति को तीन मुख्य चीजें परिभाषित करती हैं, उद्योग, पानी और बिजली.
चुनावी दृष्टि से कुछ क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील माने जाते हैं, जैसे पावरलूम क्लस्टर वाले वार्ड, मजदूर-बहुल रिहायशी इलाके, अनुसूचित जाति बहुल बस्तियां, नदी किनारे के इलाके, और बाजार व व्यावसायिक क्षेत्र. इन सभी इलाकों की अपनी अलग आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां हैं, इसलिए हर क्षेत्र अलग तरह के दबाव और मुद्दों पर प्रतिक्रिया देता है.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में बिजली आपूर्ति और बिजली दरें, पानी की गुणवत्ता और औद्योगिक प्रदूषण, रोजगार की सुरक्षा और करघों (लूम) के बंद होने की समस्या, आवास और बढ़ता किराया, सरकारी अस्पतालों की पहुंच, कल्याण योजनाओं में देरी (पेंशन, राशन, बीमा), और सड़क जाम व स्वच्छता शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड साफ है. यहां के विधायक (MLA) को शहर में नियमित रूप से दिखाई देना चाहिए और समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. खासकर बिजली कटौती, उद्योग बंद होने या प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा रहती है. मजदूरों, बिजली बोर्ड (EB) और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में सक्रिय सहयोग जरूरी माना जाता है. साथ ही, नियमित रूप से कल्याण शिविर और शिकायत निवारण कैंप आयोजित करना भी आवश्यक है. यहां यदि आर्थिक गतिविधि ठप होती है या प्रशासन निष्क्रिय दिखाई देता है, तो मतदाता विचारधारा से ज्यादा तेजी से सरकार को दंडित करते हैं.
M.venkatachalam
DMK
S.varun
NTK
Ommsharravana.s
IND
K.kamaraj
MNM
Nota
NOTA
K.r.sivasubiramaniyan
DMDK
P.sengodagoundar
IND
R.kumaresan
mauk
M.dhanasekaran
IND
Saravanan
IND
Gowrisankaran
IND
S.pongiyannan
IND
B.balakrishnan
IND
Karthi
IND
K.sellappan
IND
V.amirthalingam
IND
Subramani.s
CPI(ML)(L)
P.venkatachalam
IND
K.venkatachalam
IND
M.kathavarayan
IND
Gopalakrishnan
IND
R.kumar
APoI
G.rajuganesan
IND
S.prabhakaran
IND
K.a.vijayan
IND
M.yuvaraj
IND
A.venkatachalam
IND
G.ragavendiran
IND
Manikandan
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.