रासीपुरम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 92) एक अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीट है. यहां चुनाव का परिणाम मुख्य रूप से SC वोटों के एकजुट होने, सरकारी योजनाओं के सही वितरण और उम्मीदवार की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है. यहां जातिगत गणित का असर जरूर होता है, लेकिन लोगों के लिए काम का प्रदर्शन और सम्मान भी उतना ही जरूरी है, जितना कि पार्टी का नाम. इस सीट पर जीत-हार का अंतर अक्सर कम रहता है और वोटिंग प्रतिशत से नतीजे बदल सकते हैं.
यह इलाका अपनी पारंपरिक हैंडलूम सिल्क साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है, जो हल्की होती हैं, जिनमें “गोपुरम” (मंदिर जैसी) बॉर्डर डिजाइन होती है और कम जरी का काम होता है. साथ ही, यहाँ का शुद्ध घर का बना घी भी काफी मशहूर है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहाँ के मुख्य वोटर समूहों में अनुसूचित जाति (SC) की बड़ी आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है, जबकि कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय एक प्रभावशाली अल्पसंख्यक है. इसके अलावा छोटे और सीमांत किसान, खेतों में काम करने वाले मजदूर, कस्बों के व्यापारी और सर्विस सेक्टर के लोग, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) और पेंशन पाने वाले लोग भी चुनाव को प्रभावित करते हैं.
भौगोलिक रूप से इसमें रासीपुरम शहर और उसके आसपास के गांव शामिल हैं, जहां आधा शहरी (semi-urban) और आधा ग्रामीण माहौल है. खेती पर निर्भर इलाकों में सिंचाई एक अहम मुद्दा है. यहां सड़क कनेक्टिविटी अच्छी है और शहर व गांव के बीच संतुलन बनाए रखना राजनीति में बहुत जरूरी होता है.
चुनावी दृष्टि से कुछ खास क्षेत्रों में SC बहुल गांव, रासीपुरम शहर के वार्ड, कोंगु किसानों के गांव, मजदूर बस्तियां, और बाजार व परिवहन से जुड़े इलाके शामिल हैं. हर क्षेत्र के लोग सम्मान, सुविधाओं की पहुंच और सरकारी लाभ को अलग-अलग तरीके से देखते और उसी हिसाब से प्रतिक्रिया देते हैं.
मुख्य मुद्दों में सरकारी योजनाओं का सही लाभ (जैसे आवास, पेंशन, नकद योजनाएं), रोजगार और मजदूरी की सुरक्षा, पीने का पानी और सफाई, शिक्षा की सुविधा (स्कूल व हॉस्टल), स्वास्थ्य सेवाएं (PHC और सरकारी अस्पताल), और समाज में सम्मान व प्रतिनिधित्व शामिल हैं.
वोटरों की सोच यह है कि उनका विधायक हमेशा उपलब्ध और सम्मानजनक व्यवहार वाला हो, SC बस्तियों में नियमित दौरा करे, लोगों की समस्याओं का जल्दी समाधान करे, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों में मौजूद रहे, और राजस्व, पुलिस व सरकारी दफ्तरों में लोगों की मदद करे. यहां सिर्फ दिखावा काम नहीं करता बल्कि ईमानदारी और असली काम करने वाला नेता ही जीतता है.
Saroja V. Dr
ADMK
Silambarasi K
NTK
Nota
NOTA
Ramkumar R
IJK
Anbalagan S
AMMKMNKZ
Muniyappan M
IND
Vijaya K
BSP
Arulmozhidevan P
TMTHK
Palanivel S
IND
Chinnusamy P
GPI
Jayanthi M
APoI
Madhiyazhagan D
IND
Poongodi S
IND
Manivannan A
IND
Seerangan P
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.