उदुमलाईपेट्टई विधानसभा क्षेत्र (संख्या 125) तमिलनाडु का एक विशिष्ट कोंगु क्षेत्र का कृषि प्रधान विधानसभा क्षेत्र माना जाता है, जहां चुनावी नतीजे मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता, खेती से होने वाली आय की स्थिरता और कोंगु समुदाय की सामाजिक एकजुटता पर निर्भर करते हैं. यहां सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव जरूर दिखाई देता है, लेकिन मतदाताओं के फैसले पर सबसे ज्यादा असर सिंचाई की विश्वसनीयता और कृषि से जुड़ी आजीविकाओं का होता है.
इस क्षेत्र में चुनावी जीत का अंतर आम तौर पर मध्यम और स्थिर रहता है, लेकिन सूखे के साल, नहरों में पानी की कमी या बिजली आपूर्ति में बाधा आने पर राजनीतिक माहौल में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है. उदुमलाईपेट्टई को अक्सर “गरीबों की ऊटी” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां का मौसम सुहावना रहता है और यह क्षेत्र तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है. यह इलाका एक महत्वपूर्ण कृषि और वस्त्र (टेक्सटाइल) केंद्र भी है, और यहां तिरुमूर्थी हिल्स जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी मौजूद हैं.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से इस क्षेत्र में कुछ प्रमुख मतदाता समूह चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इनमें सबसे प्रभावशाली कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय है, जिसकी संख्या यहां काफी अधिक है और जो चुनावी समीकरणों को तय करने में महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके अलावा तालाब और नहरों से सिंचाई करने वाले किसान, नारियल, मक्का और सब्जियों की खेती करने वाले कृषक, अनुसूचित जाति (SC) के कृषि मजदूरों की बस्तियां, डेयरी और पशुपालन करने वाले परिवार, और छोटे व्यापारी, कृषि मंडी के कमीशन एजेंट और परिवहन से जुड़े लोग भी प्रमुख मतदाता समूह हैं. कुल मिलाकर यहां चुनाव जीतने का मूल समीकरण अक्सर पानी की सुरक्षा, किसानों की आय और कोंगु समुदाय की एकजुटता पर आधारित माना जाता है.
भौगोलिक स्थिति और संपर्क के लिहाज से यह क्षेत्र अमरावती नदी और तालाबों पर आधारित सिंचाई क्षेत्र में आता है. यहां सूखी भूमि और सिंचित कृषि क्षेत्र दोनों मौजूद हैं, जहां नारियल और मक्का की खेती विशेष रूप से की जाती है. उदुमलाईपेट्टई शहर इस क्षेत्र का मुख्य सेवा और बाजार केंद्र है, जहां आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग व्यापार और जरूरी सेवाओं के लिए आते हैं. यह निर्वाचन क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण से अर्ध-शहरी प्रकृति का है. यहां का राजनीतिक माहौल काफी हद तक इस बात से तय होता है कि तालाबों में पानी कब भरा जाता है और नहरों में पानी कब छोड़ा जाता है, क्योंकि यही खेती और ग्रामीण जीवन को प्रभावित करता है.
इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण इलाके ऐसे हैं जहां चुनावी माहौल और मतदाताओं का रुझान विशेष रूप से नजर आता है. इनमें तिरुमूर्थी हिल्स, अमरावती डैम, तालाबों पर निर्भर कृषि गांव, नारियल और मक्का की मुख्य खेती वाले क्षेत्र, अनुसूचित जाति के कृषि मजदूरों की बस्तियां, उदुमलाईपेट्टई शहर के स्विंग वार्ड, और भीतरी सूखे गांव शामिल हैं जो बोरवेल के पानी पर निर्भर रहते हैं. इन सभी इलाकों के लोग पानी के स्तर, पंपसेट के लिए बिजली की आपूर्ति, फसलों के बाजार भाव, पशुओं के चारे की लागत और ग्रामीण सड़कों की स्थिति जैसे मुद्दों पर बहुत संवेदनशील प्रतिक्रिया देते हैं.
स्थानीय मुद्दों और विकास से जुड़े मुख्य विषयों में अमरावती नदी और तालाबों की सफाई (डीसिल्टिंग) और रखरखाव, सिंचाई के लिए सुनिश्चित पानी की उपलब्धता, कृषि के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, नारियल और मक्का की कीमतों की स्थिरता, पशु चिकित्सा सेवाएं और चारे की लागत, ग्रामीण सड़क संपर्क, तथा सरकारी अस्पताल और उच्च माध्यमिक स्कूलों तक बेहतर पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं.
मतदाताओं के मूड को देखें तो यहां के लोग आम तौर पर ऐसे विधायक (MLA) को पसंद करते हैं जो किसानों के हितों को समझने वाला और पानी से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हो. साथ ही, विधायक का लोक निर्माण विभाग (PWD), कृषि विभाग और तमिलनाडु बिजली वितरण कंपनी (TANGEDCO) के साथ अच्छा समन्वय होना भी जरूरी माना जाता है. मतदाता चाहते हैं कि तालाबों की नियमित सफाई, नहरों की मरम्मत और सिंचाई व्यवस्था पर स्पष्ट काम दिखाई दे. इसके अलावा कोंगु समुदाय के सामाजिक संगठनों और किसान संघों का सम्मान करना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. सूखे की स्थिति या बिजली संकट आने पर तेजी से प्रतिक्रिया देने वाला नेतृत्व इस क्षेत्र में मतदाताओं के बीच विश्वास पैदा करता है.
Thennarasu,k.
INC
Babu Ranjendra Prasad,a.
NTK
Srinithi,v.
MNM
Nota
NOTA
Palanisamy,r.
AMMKMNKZ
Dhivya,d.
IND
Krishnan,t.
APTADMK
Kumar,k.
BSP
Rajini,k.
IND
Umar Ali,d.
IND
Arumugam,p.
IND
Karthikeyan,s.
IND
Nachammal,k.
AMAK
Elsy,c.
IND
Ashokkumar,s.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
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स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
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