तिरुप्पुर साउथ विधानसभा क्षेत्र, भारत के तेजी से विकसित हो रहे शहर तिरुप्पुर का हिस्सा है, जो देश का एक प्रमुख निटवियर और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट हब माना जाता है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से शहरी और औद्योगिक है, जहां बड़ी संख्या में गारमेंट फैक्ट्रियां, एक्सपोर्ट यूनिट्स, मजदूरों के रहने के क्लस्टर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं. तिरुप्पुर भारत की टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर निटवियर एक्सपोर्ट के क्षेत्र में, जिसके कारण यहां तमिलनाडु और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर काम करने आते हैं. हाल के समय में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का यहां के उद्योग पर गहरा असर पड़ा है, जो अभी भी चिंता और अनिश्चितता का एक बड़ा कारण बना हुआ है. यहां के मतदाताओं में औद्योगिक मजदूर, फैक्ट्री मालिक, निर्यातक, व्यापारी, छोटे व्यवसायी और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं.
यह क्षेत्र स्वतंत्रता सेनानी तिरुप्पुर कुमारन से भी जुड़ा हुआ है, जो अपने देशभक्ति के लिए प्रसिद्ध रहे हैं. राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह क्षेत्र एक शहरी-औद्योगिक मतदाता वर्ग वाला है, जहां मजदूर वर्ग की मजबूत मौजूदगी है. सामाजिक संरचना में गौंडर (कोंगु वेल्लालर), प्रवासी मजदूर समुदाय, अनुसूचित जातियां (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) शामिल हैं. यहां की राजनीति में लेबर यूनियन, एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और औद्योगिक संगठनों की बड़ी भूमिका होती है, जो लोगों को संगठित करने में मदद करते हैं. चुनाव के दौरान मुख्य मुद्दे औद्योगिक विकास, मजदूरों का कल्याण और शहरी बुनियादी ढांचा होते हैं.
भौगोलिक और कनेक्टिविटी के लिहाज से तिरुप्पुर साउथ, तिरुप्पुर शहर के भीतर स्थित है और यहां से कोयंबटूर, इरोड और करूर जैसे शहरों तक बेहतरीन सड़क संपर्क है. यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यहां का शहरी परिदृश्य इंडस्ट्रियल एस्टेट, रिहायशी कॉलोनियां और व्यावसायिक इलाके से मिलकर बना है. इसके अलावा नोय्यल नदी इस क्षेत्र से होकर गुजरती है, जिसका ऐतिहासिक संबंध टेक्सटाइल प्रोसेसिंग उद्योग से रहा है.
यहां के प्रमुख हॉटस्पॉट्स में गारमेंट फैक्ट्री क्लस्टर और एक्सपोर्ट यूनिट्स, जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. मजदूरों की रिहायशी कॉलोनियां, जहां मतदाताओं की संख्या ज्यादा होती है. कमर्शियल हब और टेक्सटाइल मार्केट. ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, जो एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स को आसान बनाते हैं, और छोटे औद्योगिक क्षेत्र व सेवा क्षेत्र के केंद्र शामिल हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां टेक्सटाइल उद्योग के विकास और एक्सपोर्ट सपोर्ट, मजदूरों का कल्याण, वेतन और काम करने की स्थिति, शहरी बुनियादी ढांचा जैसे सड़क, ड्रेनेज और आवास, पानी की आपूर्ति और प्रदूषण नियंत्रण (खासतौर पर टेक्सटाइल प्रोसेसिंग से जुड़ा), और स्थानीय व प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार की स्थिरता जैसे मुद्दे सबसे अहम हैं.
मतदाताओं के रुझान को देखें तो औद्योगिक मजदूर नौकरी की सुरक्षा, वेतन और रहने की स्थिति को प्राथमिकता देते हैं. वहीं निर्यातक और व्यवसायी वर्ग टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान देता है. शहरी निवासी बेहतर बुनियादी सुविधाओं और नागरिक सेवाओं की मांग करते हैं, जबकि प्रवासी मजदूर आवास, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी जरूरतों को ज्यादा महत्व देते हैं. कुल मिलाकर यहां के चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं, जहां आर्थिक और श्रमिक मुद्दे सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं.
Gunasekaran. S.
ADMK
Shanmugasundaram. K.
NTK
Anusha Ravi.
MNM
Vishalakchi. A.
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Arunkumar. G.
TNLK
Chellapandy. P.
BSP
Prakash. R.
IND
Selvan. K.
IND
Aslam. J.
IND
Sarvaloga Dayabaran. M.a.
IND
Muthusamy. K.
IND
Deiveegan. K.
APTADMK
Malarvizhi. G.
IND
Gunasekaran. M.
IND
Kader Basha. A.
IND
Selvaraj. A.
IND
Ganesh. E.
IND
Gunasekaran. I.
IND
Vijayakumar. A.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.