धारापुरम, विधानसभा क्षेत्र संख्या 106, एक अत्यंत संवेदनशील और सामाजिक रूप से संतुलित सीट है, जहां अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं की एकजुटता, कोंगु जातीय समीकरणों का संतुलन और जल सुरक्षा, इन तीनों का संयोजन चुनाव परिणाम तय करता है. यह किसी एक समुदाय के प्रभुत्व वाली सीट नहीं है; यदि किसी एक समूह को नजरअंदाज किया जाए तो परिणाम पलट सकता है. यहां जीत का अंतर आमतौर पर कम और अस्थिर रहता है.
धारापुरम एक प्राचीन और ऐतिहासिक नगर के रूप में जाना जाता है और कृषि विपणन का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है. यह अपने कई पुराने और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें अगस्तीश्वरर मंदिर और काडु हनुमंथ स्वामी मंदिर प्रमुख हैं.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां प्रमुख मतदाता समूहों में अनुसूचित जाति समुदाय संख्यात्मक रूप से मजबूत और निर्णायक है. कोंगु वेल्लालर गौंडर आर्थिक रूप से प्रभावशाली हैं. इसके अलावा छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर परिवार, अर्ध-शहरी व्यापारी और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग, महिला स्वयं सहायता समूह और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां जीत का फार्मूला अक्सर SC मतदान की मजबूत भागीदारी और कोंगु समुदाय के साथ संतुलित संबंध माना जाता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र ग्रामीण गांवों और धारापुरम नगर का मिश्रण है. यहां भी शुष्क इलाके हैं जहां सिंचाई पर निर्भरता अधिक है. मंदिर आधारित कस्बाई अर्थव्यवस्था और मिश्रित बस्तियां इसकी विशेषता हैं. ग्रामीण मतदान में पानी और सामाजिक सम्मान के मुद्दे सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं.
चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अगस्तीश्वरर मंदिर और काडु हनुमंथ स्वामी मंदिर के आसपास के इलाके, SC बहुल गांव, कोंगु कृषि प्रधान गांव, शुष्क पट्टी के गांव, धरापुरम नगर वार्ड, तथा नहर और बोरवेल पर निर्भर इलाके शामिल हैं. यहां हर क्षेत्र अलग-अलग चिंताओं के आधार पर मतदान करता है; एक ही नारा पूरे क्षेत्र में काम नहीं करता.
मुख्य मुद्दों में पीने के पानी की कमी, सिंचाई और बोरवेल रिचार्ज, मजदूरी सुरक्षा (मनरेगा और कृषि मजदूरों के लिए), सामाजिक सम्मान और सुविधाओं तक पहुंच, ग्रामीण सड़क संपर्क, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और एंबुलेंस सुविधा शामिल हैं. यहां मतदाताओं की अपेक्षा है कि विधायक शारीरिक रूप से क्षेत्र में मौजूद रहे, पानी और मजदूरी संकट के समय तुरंत प्रतिक्रिया दे, SC नेतृत्व के साथ सम्मानजनक संवाद रखे, भाषणों के बजाय जमीन पर समस्या समाधान दिखाए, और पुलिस या राजस्व मामलों में जरूरत पड़ने पर सहयोग दे. यहां केवल प्रतीकात्मक राजनीति बिना काम के उलटा असर डालती है.
Murugan L
BJP
Ranjitha K
NTK
Charli A
MNM
Nota
NOTA
Kalarani C
AMMKMNKZ
Kayalvizhi K
IND
Murugan A
IND
Rangasamy S
BSP
Selvaraj V
IND
Muniyappan A
APTADMK
Kayalvizhi P
IND
Karthikeyan A
IND
Ananthi S
IND
Chidambharam V
IDMMK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.