TVK
AIADMK
CPI
NTK
नोटा
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BSP
IND
IND
IND
IND
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IND
IND
Bhavanisagar Vidhan Sabha Election Results Live: भवानीसागर विधानसभा का रिजल्ट घोषित, TVK ने AIADMK को हराया
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भवानीसागर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 107) इरोड जिला के उत्तर और उत्तर-पश्चिम हिस्से में फैला हुआ है. यह तमिलनाडु के सबसे बड़े और प्रशासनिक रूप से जटिल क्षेत्रों में से एक माना जाता है. यहां पर भवानी नदी पर डैम बना है, जिससे इस पूरे इलाके को खेती और पीने के लिए पानी मिलता है.
यह क्षेत्र किसी बड़े शहर या इंडस्ट्रियल इलाके जैसा नहीं है, बल्कि यहां की पहचान खेती, जंगल से जुड़े काम, आदिवासी बस्तियां और नहरों के पानी पर निर्भर गांवों से बनती है. बड़े जंगल, वन्यजीवों के रास्ते (कॉरिडोर) और डैम से नियंत्रित पानी की व्यवस्था यहां के विकास को एक तरफ अवसर देती है तो दूसरी तरफ कुछ सीमाएं भी पैदा करती है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह एक ऐसा ग्रामीण क्षेत्र है जहां लोग विचारधारा से ज्यादा काम और नतीजों को महत्व देते हैं. यहां किसान, आदिवासी समाज, पशुपालन करने वाले परिवार, जंगल के किनारे रहने वाले लोग और छोटे व्यापारी मिलकर वोटरों का मुख्य आधार बनाते हैं. जाति का असर तो है, लेकिन उससे ज्यादा अहम मुद्दे भी हैं, जिनमें पानी की उपलब्धता, जमीन के अधिकार, जंगल के नियम और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से मिलना शामिल हैं. खास बात यह है कि आदिवासी और छोटे किसान चुनाव में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए नेताओं के लिए जमीनी स्तर पर भरोसा बनाना और लोगों से सीधा जुड़ाव बहुत जरूरी होता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र बहुत विविध है. कहीं उपजाऊ नदी किनारे के गांव हैं, तो कहीं सूखे इलाके और कहीं घने जंगल, जो सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व से जुड़े हुए हैं. भवानी नदी और भवानीसागर डैम यहां की खेती, रोजगार और पानी की उपलब्धता को सीधे प्रभावित करते हैं. सड़क सुविधा हर जगह समान नहीं है. गांवों और जंगल के पास रहने वाले लोगों को खासकर बारिश के समय आने-जाने में दिक्कत होती है. साथ ही, वन्यजीवों की आवाजाही, कठिन भौगोलिक स्थिति और पर्यावरण के नियमों के कारण तेजी से विकास कार्य करना भी आसान नहीं है.
इस क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से हैं जिनमें भवानीसागर डैम और उसका जलाशय क्षेत्र, भवानी नदी के किनारे बसे गांव, थलावडी फॉरेस्ट रोड कॉरिडोर, हसनूर–गर्मालम आदिवासी बेल्ट, जंगल किनारे के खेती वाले इलाके और नहर से सिंचाई वाले गांव शामिल हैं.
यहां के लोगों की मुख्य समस्याओं की बात करें तो सिंचाई के लिए पानी की सही समय पर उपलब्धता, नहरों की सफाई और रखरखाव में देरी, इंसान और जंगली जानवरों के बीच टकराव, अंदरूनी गाँवों तक सड़क की कमी, सरकारी अस्पतालों की कमी, गर्मियों में पीने के पानी की दिक्कत, आदिवासी योजनाओं के लागू होने में देरी और रोजगार के अभाव में युवाओं का बाहर पलायन मुख्य हैं.
वोटरों का रुख साफ है, किसान चाहते हैं कि पानी का प्रबंधन पारदर्शी और भरोसेमंद हो, आदिवासी समुदाय जमीन की सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच चाहते हैं, युवा अच्छी शिक्षा और अपने इलाके में रोजगार चाहते हैं. तो वहीं महिलाएं पीने के पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, और जंगल किनारे रहने वाले लोग जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाव की मांग करते हैं.
यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें और जमीन से जुड़े मुद्दे ही राजनीति की दिशा तय करते हैं.
P.l Sundaram
CPI
V.sangeetha
NTK
Karthikkumar.k
MNM
Ramesh.g
DMDK
Nota
NOTA
G.sakthivel
BSP
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