सेलम पश्चिम विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 88) एक घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है, जहां चुनाव मुख्य रूप से नगर सेवाओं के प्रदर्शन, मध्यम वर्ग की संतुष्टि, अल्पसंख्यक समुदायों की एकजुटता, और शहरी कल्याण योजनाओं की सही डिलीवरी पर निर्भर करते हैं. यह कृषि प्रधान सीटों की तरह नहीं है, बल्कि यहां का चुनाव पूरी तरह से नगरपालिका चुनाव जैसा व्यवहार करता है. इसलिए यह क्षेत्र काफी संवेदनशील और अस्थिर (वोलेटाइल) माना जाता है, जहां नारेबाजी नहीं बल्कि जमीन पर काम और क्रियान्वयन ही जीत तय करते हैं. यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यरकौड की खूबसूरत पहाड़ियों और मेट्टूर बांध के नजदीक स्थित है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें शहरी मध्यम वर्ग के परिवार, कुछ इलाकों में मजबूत रूप से संगठित मुस्लिम समुदाय, शहर के अंदर बसे अनुसूचित जाति (SC) बस्तियां, व्यापारी, छोटे कारोबारी और पेशेवर लोग, दैनिक मजदूर और सेवा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी, तथा महिला कल्याण योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं शामिल हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र सेलम शहर के पश्चिमी मुख्य शहरी हिस्से में आता है. यहां सड़कों का जाल तो घना है, लेकिन ट्रैफिक जाम का दबाव भी अधिक रहता है. आबादी बहुत अधिक होने के कारण जनसंख्या घनत्व काफी ऊंचा है और शहर के फैलाव के लिए भौतिक विस्तार की सीमित गुंजाइश है.
इस क्षेत्र के प्रमुख हॉटस्पॉट में स्थापित रिहायशी वार्ड, व्यावसायिक बाजार वाली सड़कें, मिश्रित उपयोग (रिहायशी-व्यावसायिक) वाले मोहल्ले, SC कॉलोनियां, और अल्पसंख्यक बहुल इलाके शामिल हैं. यहां हर वार्ड की अपनी अलग छोटी-छोटी समस्याएं होती हैं, जो बड़े राजनीतिक मुद्दों से भी ज्यादा प्रभाव डालती हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में शहरी जल निकासी और बाढ़ रोकथाम, पीने के पानी की नियमित आपूर्ति, ट्रैफिक और पार्किंग प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता, सरकारी अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक पहुंच, तथा स्ट्रीट लाइटिंग और सुरक्षा शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी वर्ग के अनुसार अलग-अलग नजर आता है. मध्यम वर्ग साफ-सफाई, अच्छी सड़कें, नियमित पानी और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है. व्यापारी वर्ग ट्रैफिक व्यवस्था और नियमों में स्थिरता चाहता है ताकि कारोबार प्रभावित न हो. मुस्लिम मतदाता सम्मान, कल्याण योजनाओं तक पहुंच और शहरी व्यवस्था को महत्व देते हैं. SC समुदाय सरकारी योजनाओं का लाभ और आवास सेवाओं की उपलब्धता पर ध्यान देता है. महिलाएं विशेष रूप से पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं.
सेलम पश्चिम के मतदाता दिखने वाला और महसूस होने वाला शहरी विकास चाहते हैं. यहां लोग नारों या बड़े वादों से ज्यादा जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने वाले काम और प्रभावी शहरी प्रशासन को महत्व देते हैं, और उसी के आधार पर अपना फैसला सुनाते हैं.
Rajendran. A
DMK
Nagammal. S
NTK
Thiyagarajan. A
MNM
Alagaapuram R. Mohanraj
DMDK
Nota
NOTA
Vijayakumar. R
DAMK
Karthikeyan. J
TNLK
Kathirvel. A
MIDP
Thiyagarajan. M
IND
Tamil Selvan. S
BSP
Sarathkumar. S
IND
Kathavarayan. S
IND
Sivaraman. S
IND
Gopi. M
IND
Chandrasekaran. G
IND
Muthusamy. R
TMTHK
Rajendiran. B
IND
Jeevanantham. M
IND
Ramkumar. R
IND
Marimuthu. M
IND
Inbaraj. A
IND
Natarajan. C
IND
Senthilkumar. A
AMPK
Sabbapathi. M
IND
Murugan. A
IND
Gopinath. R
IND
Mayakannan. M
IND
Balaji. D
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.