TVK
PMK
DMDK
AJPK
NTK
नोटा
NOTA
TVVK
IND
VTK
BSP
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IND
Salem (West) Vidhan Sabha Chunav Result: सलेम (पश्चिम) सीट पर Lakshmanan S. ने लहराया जीत का परचम
Salem (West) Vidhan Sabha Result Live: सलेम (पश्चिम) सीट पर हो गया बड़ा उलटफेर! जानें ताजा आंकड़े
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सेलम पश्चिम विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 88) एक घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है, जहां चुनाव मुख्य रूप से नगर सेवाओं के प्रदर्शन, मध्यम वर्ग की संतुष्टि, अल्पसंख्यक समुदायों की एकजुटता, और शहरी कल्याण योजनाओं की सही डिलीवरी पर निर्भर करते हैं. यह कृषि प्रधान सीटों की तरह नहीं है, बल्कि यहां का चुनाव पूरी तरह से नगरपालिका चुनाव जैसा व्यवहार करता है. इसलिए यह क्षेत्र काफी संवेदनशील और अस्थिर (वोलेटाइल) माना जाता है, जहां नारेबाजी नहीं बल्कि जमीन पर काम और क्रियान्वयन ही जीत तय करते हैं. यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह यरकौड की खूबसूरत पहाड़ियों और मेट्टूर बांध के नजदीक स्थित है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें शहरी मध्यम वर्ग के परिवार, कुछ इलाकों में मजबूत रूप से संगठित मुस्लिम समुदाय, शहर के अंदर बसे अनुसूचित जाति (SC) बस्तियां, व्यापारी, छोटे कारोबारी और पेशेवर लोग, दैनिक मजदूर और सेवा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी, तथा महिला कल्याण योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं शामिल हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र सेलम शहर के पश्चिमी मुख्य शहरी हिस्से में आता है. यहां सड़कों का जाल तो घना है, लेकिन ट्रैफिक जाम का दबाव भी अधिक रहता है. आबादी बहुत अधिक होने के कारण जनसंख्या घनत्व काफी ऊंचा है और शहर के फैलाव के लिए भौतिक विस्तार की सीमित गुंजाइश है.
इस क्षेत्र के प्रमुख हॉटस्पॉट में स्थापित रिहायशी वार्ड, व्यावसायिक बाजार वाली सड़कें, मिश्रित उपयोग (रिहायशी-व्यावसायिक) वाले मोहल्ले, SC कॉलोनियां, और अल्पसंख्यक बहुल इलाके शामिल हैं. यहां हर वार्ड की अपनी अलग छोटी-छोटी समस्याएं होती हैं, जो बड़े राजनीतिक मुद्दों से भी ज्यादा प्रभाव डालती हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में शहरी जल निकासी और बाढ़ रोकथाम, पीने के पानी की नियमित आपूर्ति, ट्रैफिक और पार्किंग प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता, सरकारी अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक पहुंच, तथा स्ट्रीट लाइटिंग और सुरक्षा शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी वर्ग के अनुसार अलग-अलग नजर आता है. मध्यम वर्ग साफ-सफाई, अच्छी सड़कें, नियमित पानी और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है. व्यापारी वर्ग ट्रैफिक व्यवस्था और नियमों में स्थिरता चाहता है ताकि कारोबार प्रभावित न हो. मुस्लिम मतदाता सम्मान, कल्याण योजनाओं तक पहुंच और शहरी व्यवस्था को महत्व देते हैं. SC समुदाय सरकारी योजनाओं का लाभ और आवास सेवाओं की उपलब्धता पर ध्यान देता है. महिलाएं विशेष रूप से पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं.
सेलम पश्चिम के मतदाता दिखने वाला और महसूस होने वाला शहरी विकास चाहते हैं. यहां लोग नारों या बड़े वादों से ज्यादा जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने वाले काम और प्रभावी शहरी प्रशासन को महत्व देते हैं, और उसी के आधार पर अपना फैसला सुनाते हैं.
Rajendran. A
DMK
Nagammal. S
NTK
Thiyagarajan. A
MNM
Alagaapuram R. Mohanraj
DMDK
Nota
NOTA
Vijayakumar. R
DAMK
Karthikeyan. J
TNLK
Kathirvel. A
MIDP
Thiyagarajan. M
IND
Tamil Selvan. S
BSP
Sarathkumar. S
IND
Kathavarayan. S
IND
Sivaraman. S
IND
Gopi. M
IND
Chandrasekaran. G
IND
Muthusamy. R
TMTHK
Rajendiran. B
IND
Jeevanantham. M
IND
Ramkumar. R
IND
Marimuthu. M
IND
Inbaraj. A
IND
Natarajan. C
IND
Senthilkumar. A
AMPK
Sabbapathi. M
IND
Murugan. A
IND
Gopinath. R
IND
Mayakannan. M
IND
Balaji. D
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.