सेलम उत्तर विधानसभा क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 89) एक घनी आबादी वाला शहरी-औद्योगिक क्षेत्र है, जहां चुनाव मुख्य रूप से मजदूरों की भावना, अल्पसंख्यक मतदाताओं के एकजुट समर्थन, नगर सेवाओं की गुणवत्ता और सरकारी कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर आधारित होते हैं. यह क्षेत्र सेलम वेस्ट की तरह मध्यम वर्ग केंद्रित राजनीति नहीं करता, बल्कि यहां चुनाव अधिकतर एक “मजदूर-केंद्रित नगर चुनाव” जैसा स्वरूप ले लेते हैं. इसी वजह से यह सीट काफी अस्थिर मानी जाती है और यहां परिणाम मतदान प्रतिशत पर बहुत निर्भर करता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें वस्त्र उद्योग, स्टील से जुड़ी इकाइयों और वर्कशॉप में काम करने वाले औद्योगिक व ठेका मजदूर शामिल हैं. कई इलाकों में मुस्लिम समुदाय का अच्छा प्रभाव है, जहां उनका वोट एकजुट होकर पड़ता है. घनी बस्तियों में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी भी बड़ी संख्या में रहती है. इसके अलावा शहरी गरीब, असंगठित क्षेत्र के मजदूर, छोटे व्यापारी, परिवहन से जुड़े कामगार, स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं और सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोग भी चुनावी तस्वीर को प्रभावित करते हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र सेलम शहर के उत्तरी शहरी हिस्से में आता है. यहां आबादी बहुत घनी है और खुली जगह कम है. सड़क संपर्क मजबूत है, लेकिन ट्रैफिक जाम की समस्या आम है. यह इलाका औद्योगिक इकाइयों और परिवहन केंद्रों के नजदीक है, जिससे यहां मजदूरों और कामकाजी वर्ग की संख्या अधिक है.
चुनावी दृष्टि से कुछ प्रमुख इलाके हैं, जैसे SAIL स्टील प्लांट के आसपास का क्षेत्र, उद्योगों से सटे आवासीय वार्ड, झुग्गी और मजदूर कॉलोनियां, अल्पसंख्यक बहुल मोहल्ले, बाजार और परिवहन क्षेत्र, तथा अनुसूचित जाति की बस्तियां. इन इलाकों में मतदाता बड़े राजनीतिक मुद्दों से ज्यादा अपने रोजमर्रा के जीवन और बुनियादी सेवाओं से जुड़े सवालों पर वोट करते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में नौकरी की सुरक्षा और मजदूरी की स्थिरता सबसे अहम हैं. इसके साथ ही पीने के पानी की नियमित आपूर्ति, जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन, कचरा निस्तारण और सफाई व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों तक आसान पहुंच, आवास और झुग्गी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं, तथा कल्याणकारी योजनाओं में होने वाली देरी भी बड़े चुनावी मुद्दे हैं.
मतदाताओं का मूड भी वर्ग के अनुसार अलग-अलग नजर आता है. मजदूर वर्ग रोजगार, वेतन और महंगाई पर ध्यान देता है. अल्पसंख्यक मतदाता सम्मान, कल्याण योजनाओं तक पहुंच और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हैं. अनुसूचित जाति के मतदाता सरकारी योजनाओं के लाभ और आवास सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानते हैं. महिलाएं खासकर पानी, राशन और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सजग रहती हैं. युवा वर्ग रोजगार, कौशल विकास और बेहतर आवाजाही के अवसर चाहता है. सेलम नॉर्थ के मतदाता उन नेताओं को पसंद करते हैं जो रोजमर्रा की समस्याओं का जल्दी और सीधे समाधान देते हैं.
G.venkatachalam
ADMK
R S Guru Chakravarthy
MNM
Imayaeswaran N
NTK
Nota
NOTA
C Natarajan
AMMKMNKZ
M.p.panneer Selvam
NPEP
S Velan
BSP
A Rameshkumar
IND
R Palanisamy
IND
S Rajasekar
IND
N Devaraj
IND
M Ahamedshahjahan
MGRMKKT
M.shanmuga Sundaram
IND
R Senthilkumar
IND
Vaathiar C Murugan
APoI
M.r.nawazudieen
IND
T.vijaya Raj
IND
S. Babu
MIDP
P.ramachandran
IND
D.murali
DAMK
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.