यरकौड, निर्वाचन क्षेत्र संख्या 83, भौगोलिक रूप से अलग और सामाजिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी विधानसभा सीट है. यहां का मतदान व्यवहार किसी विचारधारा से ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि लोगों को बुनियादी सुविधाएं, जंगल और जमीन के अधिकार, आजीविका की सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार मिल रहा है या नहीं. यहां के मतदाता अपने विधायक (MLA) से यह उम्मीद रखते हैं कि वह पहाड़ी समुदायों और मैदानी प्रशासन के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करे. यह एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां विश्वास और पहुंच (ट्रस्ट एंड एक्सेस) सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, यहां भाषणों से ज्यादा जरूरी है कि नेता लोगों के बीच दिखाई दे और सम्मान के साथ संवाद करे.
यरकौड को “ज्वेल ऑफ द साउथ” और “गरीबों का ऊटी” (Poor Man’s Ooty) कहा जाता है. यह एक खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो अपने सुहावने मौसम, फैले हुए कॉफी बागानों और प्राकृतिक यरकौड झील के लिए प्रसिद्ध है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. यहां बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोग रहते हैं, जो कई पहाड़ी गांवों में प्रभावी हैं. खासकर मलयाली आदिवासी समुदाय सामाजिक रूप से संगठित हैं और अक्सर एकजुट होकर मतदान करते हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के लोग निचले पहाड़ी और आसपास के गांवों में मौजूद हैं. क्षेत्र में कॉफी, काली मिर्च और संतरे के बागानों में काम करने वाले मजदूर, पर्यटन से जुड़े कामगार जैसे होटल कर्मचारी, गाइड, ड्राइवर और दुकानदार, तथा छोटे व्यापारी और दिहाड़ी मजदूर भी बड़ी संख्या में हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका पूरी तरह पहाड़ी है, जहां ऊंचाई में तेज बदलाव देखने को मिलता है. चारों ओर घने जंगल हैं और कई अंदरूनी आदिवासी बस्तियों तक सड़क की पहुंच सीमित है. यहां अक्सर कोहरा, भूस्खलन और मौसम संबंधी बाधाएं यात्रा को प्रभावित करती हैं. सेलम शहर और बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में लंबा समय लगता है. इसलिए यरकौड में “पहुंच ही शासन है” यानी अगर सड़क, संपर्क और सेवाएं उपलब्ध हैं, तभी प्रशासन प्रभावी माना जाता है.
यरकौड एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है, जहां की झील को “गरीबों का ऊटी” कहा जाता है. यहां के प्रमुख आकर्षणों में किलियूर फॉल्स, लेडीज सीट व्यू प्वाइंट, और 32 किलोमीटर लंबी लूप रोड शामिल हैं. इसके अलावा यहां अंदरूनी आदिवासी पहाड़ी बस्तियां, प्लांटेशन मजदूर कॉलोनियां, पर्यटन क्षेत्र के गांव, निचले पहाड़ी कृषि क्षेत्र, और सड़क किनारे व्यापारिक समूह मौजूद हैं. इन सभी क्षेत्रों के मतदाता मुख्य रूप से संपर्क, रोजगार और सम्मान जैसे मुद्दों के आधार पर मतदान करते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में आदिवासी बस्तियों तक सड़क संपर्क, गर्मी के मौसम में पेयजल की कमी, वन अधिकार और जमीन के पट्टे (पट्टा) से जुड़े विवाद, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और एंबुलेंस की उपलब्धता, शिक्षा और छात्रावास सुविधाएं, प्लांटेशन मजदूरों की मजदूरी की स्थिरता, तथा जंगली जानवरों (जैसे हाथी और जंगली सूअर) से होने वाले नुकसान शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड स्पष्ट है, यहां के लोग चाहते हैं कि विधायक खुद पहाड़ी बस्तियों में जाकर लोगों से मिलें, आदिवासी बुजुर्गों के साथ सम्मानपूर्वक बातचीत करें, वन अधिकार और सरकारी योजनाओं तक पहुंच दिलाने में मदद करें, और स्वास्थ्य या वन्यजीव संकट जैसी आपात स्थितियों में तुरंत सहायता प्रदान करें. यरकौड एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां सम्मान, सीधा संपर्क और भरोसेमंद नेतृत्व ही चुनाव जीतने की असली कुंजी है.
C. Tamilselvan
DMK
Jothi
NTK
C. Kumar
DMDK
Nota
NOTA
T. Duraisamy
IJK
D. Madesh
IND
P. Ramasamy
BSP
K. Manikandan
IND
T. Priya
IND
Santhosam
IND
S.t. Rajendhiran
IND
P. Sathishkumar
IND
K. Unnamalai
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.