एसआईआर के बाद यूपी की फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो गई है. इस वोटर लिस्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वह बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ाने वाले हैं. पार्टी के मजबूत गढ़ में 18 से 23 फीसदी तक वोट कटे हैं, जबकि मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट कटौती कम रही है.
यूपी में चुनाव आयोग ने SIR की फाइनल लिस्ट जारी कर दी. यूपी में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई. फाइनल लिस्ट से 2.04 करोड़ नाम कटे. इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा. देखें वीडियो.
यूपी में चुनाव आयोग ने SIR की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है. यूपी में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई है. फाइनल लिस्ट से 2.04 करोड़ नाम कटे हैं. 84 लाख नए नामों को जोड़ा गया है. SIR से पहले अक्टूबर 2025 में यूपी में कुल 15.44 करोड़ वोटर्स थे. SIR की फाइनल लिस्ट पर क्या बोले यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी? देखें वीडियो.
उत्तर प्रदेश में 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है, जिसमें मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13.39 करोड़ हो गई है. ड्राफ्ट सूची के मुकाबले 84 लाख से अधिक मतदाता बढ़े हैं. प्रयागराज और गाजियाबाद जैसे जिलों में सर्वाधिक वृद्धि हुई है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव की बिछाई जा रही सियासी बिसात पर निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद घिर गए हैं. एक तरफ ओम प्रकाश राजभर तो दूसरी तरफ मुकेश सहनी. एक से सीट का खतरा तो दूसरे से सियासी आधार को बचाए रखने की टेंशन है.
उत्तर प्रदेश में आज अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी जिसमें लगभग 7 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं. ड्राफ्ट सूची में 12.55 करोड़ मतदाता थे, जबकि फाइनल सूची में 13.35 करोड़ मतदाताओं की उम्मीद है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव की दादरी रैली के बाद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी की जनसभा पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में होने जा रही है. इस तरह 2027 के चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी नई राजनीतिक प्रयोगशाला बनता जा रहा है.
योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत सीट जहूराबाद छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. राजभर की नजर निषाद पार्टी के प्रभाव वाली सीटों पर है, लेकिन सवाल यही है कि वो अपनी सीट क्यों छोड़ रहे हैं. क्या उन्हें अंसारी परिवार के वर्चस्व से डर है या फिर सवर्ण वोटों की नाराजगी का खतरा?
उत्तर प्रदेश में 22 फीसदी दलित वोटर सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है, जिसे साधने के लिए सपा से लेकर बीजेपी तक हर दांव आजमा रही है. अखिलेश यादव पीडीए समीकरण के जरिए सत्ता में आने के लिए बेताब हैं तो बीजेपी ने दलित प्रेरणा स्थल और दलित मसीहा आंबेडकर के जरिए काउंटर करने की रणनीति बनाई है.
उत्तर प्रदेश के दिग्गज बाहुबली नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण की बेटी शालिनी सिंह राजनीति में एंट्री करने की तैयारी में है, जिसके संकेत भी दे दिए हैं. उनकी नजर नोएडा सीट पर है, लेकिन सवाल यही है कि बीजेपी क्या एक परिवार से चार लोगों को चुनाव लड़ाएगी?
आम आदमी पार्टी की पदयात्रा के दौरान संजय सिंह ने यूपी सरकार पर बेरोजगारी और पेपर लीक को लेकर हमला बोला. उन्होंने रोजगार देने या 10 हजार रुपये भत्ता देने की मांग की.
पश्चिम यूपी इन दिनों राजनीतिक केंद्र में बना हुआ है. पश्चिम यूपी में बीजेपी के दो दिग्गज नेताओं की सियासी अदावत चर्चा का विषय बनी हुई है. संजीय बालियना हिसाब बराबर करने की बात कर रहे हैं तो अतुल प्रधान ने अलग ही मोर्चा खोल रखा है. ऐसे में संगीत सोम की सियासी टेंशन बढ़ गई है.
उत्तर प्रदेश में 20 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जो किसी भी दल के खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले मुस्लिमों के दिल जीतने के लिए बीजेपी ने ईद मिलन किया तो सपा ने भी होली-ईद मिलन करके मुस्लिमों को जोड़े रखने की स्ट्रैटेजी अपनाई है.
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने यूपी की सत्ता से बीजेपी को बेदखल करने का उपाय खोज लिया है. उनकी नजर में एक ही उपाय है, अखिलेश यादव के साथ उनकी पार्टी का चुनावी गठबंधन - लेकिन गठबंधन की शर्त ऐसी है कि सब कुछ असंभव लगता है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दादरी से मिशन 2027 का आगाज क्या किया, बसपा अध्यक्ष मायावती भी उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव के लिए एक्टिव हो गई हैं. मायावती 14 अप्रैल को लखनऊ में एक बड़ी जनसभा करके बसपा के चुनावी अभियान का आगाज करेंगी.
मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले सकौती गांव में जाट समाज के पूर्वज वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसमें बीजेपी के दिग्गज नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने 2024 में मिली हार का हिसाब बराबर करने की बात कही है, उनके निशाने पर कहीं न कहीं बीजेपी नेता संगीत सोम रहे.
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सियासी रणभूमि पश्चिमी यूपी बन रहा है, जहां से दो दिन पहले अखिलेश यादव ने चुनावी हुंकार भरी है. अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में गुर्जर-मुस्लिम समीकरण के सहारे जयंत चौधरी और योगी आदित्यनाथ की केमिस्ट्री को क्या चुनौती दे पाएंगे?
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का समय बाकी है, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मिशन-2027 का आगाज कर दिया है. दादरी की रैली से अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी को साधना चाहते हैं, जिसके लिए अपने पिता की तरह ही गुर्जर नेताओं की तिकड़ी बनाई है.
ग्रेटर नोएडा के दादरी में आयोजित रैली में अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी रैली में लोगों को जबरन लाया गया और सरकारी कर्मचारियों का सहारा लिया गया. अखिलेश ने एयरपोर्ट परियोजनाओं, 10 साल के कामकाज और योजनाओं पर सवाल उठाते हुए जवाब मांगा.