उत्तर प्रदेश में SIR के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की. वोटर लिस्ट पर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है. इसे लेकर बीजेपी और विपक्ष में सियासी तनातनी भी बढ़ गई है. यूपी में SIR को लेकर जारी तकरार पर देखें सो सॉरी का ये एपिसोड.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब एक ही बीएलओ विधानसभा और पंचायत एसआईआर ड्राफ्ट तैयार कर रहा है तो फिर पूरे प्रदेश में और ग्रामीण क्षेत्र में भी इतने ही वोटर कैसे हो सकते हैं?
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 2.89 करोड़ नाम कटने से सियासी हड़कंप मच गया है. इस कटौती ने प्रदेश की उन 53 सीटों पर समीकरण बदल दिए हैं, जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर 5000 वोटों से भी कम था.
यूपी में SIR प्रक्रिया के तहत करीब 2.89 करोड़ नाम डिलीट हुए हैं, जो कुल वोटर्स (15.44 करोड़) का करीब 18.70% है. जबकि पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में केवल 8 प्रतिशत नाम ही कटे हैं.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश के लिए ड्राफ्ट रिवाइज्ड लिस्ट जारी करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य में 2.89 करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. जिनमें 46 लाख ऐसे वोटर शामिल हैं जिनकी मौत हो चुकी है. जिन जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं, उनमें लखनऊ टॉप पर है.
UP SIR voter list online check: उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है, जिसमें 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. इनमें मृतक, स्थानांतरित और डुप्लिकेट नाम शामिल हैं. वोटर 6 फरवरी तक फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के जरिए सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है. इस बार की सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां प्रदेश के करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी ने नए साल 2026 की शुरुआत PDA पंचांग के साथ की है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पंचांग का विमोचन किया, जिसमें PDA समाज से जुड़े महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथि, सामाजिक आंदोलनों के महत्वपूर्ण दिन और राष्ट्रीय पर्व शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से तैयारी तेज कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘नया उत्तर प्रदेश’ के नारे के साथ रणनीति बनाने में जुटे हैं. सीएम योगी की लगातार दिल्ली में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी नेतृत्व से मुलाकातें इसी दिशा का संकेत हैं.
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के खासमखास सतुआ बाबा का नाम इन दिनों चर्चा में है. प्रयागराज के जिलाधिकारी को केशव प्रसाद मौर्य की नसीहत से शीतलहीर में प्रदेश का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है.
कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मणों की तूती बोलती थी. पर मंडल राजनीति के आने से ही ओबीसी राजनीति सभी दलों में हावी हो गई. आज बीजेपी ही नहीं, कांग्रेस में भी ओबीसी नेतृत्व को आगे रखना मजबूरी है.