गंगावल्ली विधानसभा क्षेत्र (संख्या 81) कलवरायन पहाड़ियों और वन क्षेत्र की सीमा के आसपास स्थित है, जो एक शांत लेकिन भौगोलिक रूप से जटिल ग्रामीण सीट है. यहां की राजनीति किसी विचारधारा पर नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरतों पर टिकी है, जैसे सड़क और संपर्क की सुविधा, वन नियमों से जुड़े मुद्दे, पानी की कमी और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलना. यहां के मतदाता नेताओं में निरंतर उपस्थिति, सम्मानजनक व्यवहार और जमीनी स्तर पर समस्याओं को तुरंत हल करने की क्षमता को महत्व देते हैं, खासकर दूर-दराज के आंतरिक गांवों और पहाड़ी बस्तियों में. यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भौगोलिक स्थिति ही मतदान के रुझान को प्रभावित करती है.
सामाजिक और राजनीतिक स्वरूप की बात करें तो यहां का मतदाता वर्ग विविध है. मैदानों और पहाड़ियों के निचले हिस्सों में वन्नियार (एमबीसी) समुदाय की मजबूत उपस्थिति है. पहाड़ी और वन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों (ST) की बड़ी आबादी रहती है. मैदान क्षेत्रों के गांवों में अनुसूचित जाति (SC) समुदाय की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है. इसके अलावा यहां छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) की सदस्याएं और विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थी बड़ी संख्या में हैं.
भौगोलिक और संपर्क व्यवस्था के लिहाज से यह क्षेत्र चुनौतीपूर्ण है. कलवरायन पहाड़ियों के पास का इलाका पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा हुआ है. कई आदिवासी बस्तियां बिखरी हुई हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सड़कें ठीक नहीं हैं या बहुत सीमित हैं. पानी की कमी पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों में एक बड़ी समस्या है. सार्वजनिक परिवहन की सुविधा भी सीमित है, जिससे लोगों को अस्पताल, स्कूल या बाजार तक पहुंचने में कठिनाई होती है. वन क्षेत्र से सटे गांवों में जंगली जानवरों की आवाजाही भी एक गंभीर मुद्दा है, जिससे फसलों और लोगों की सुरक्षा प्रभावित होती है.
मतदान के लिहाज से कुछ इलाके विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, पहाड़ी और वन क्षेत्रों की आदिवासी बस्तियां, मैदानी कृषि प्रधान गांव, अनुसूचित जाति बहुल बस्तियां, तालाब से सिंचित क्षेत्र, और दूरस्थ आंतरिक गांव. इन सभी क्षेत्रों में वोट मुख्य रूप से सड़क, पानी और सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे मुद्दों पर पड़ते हैं.
मुख्य समस्याओं में पीने के पानी की कमी, आंतरिक सड़कों और परिवहन की कमी, वन अधिकार और पट्टा (जमीन के कागज) से जुड़े मुद्दे, मानव-वन्यजीव संघर्ष, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक पहुंच और एम्बुलेंस की समय पर उपलब्धता, तथा पेंशन, आवास और मनरेगा जैसी योजनाओं में देरी शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड साफ है. वे चाहते हैं कि विधायक को खुद पहाड़ी और दूरस्थ बस्तियों तक पहुंचें और उनकी स्थिति ता जायजा लें. इस इलाके में वन अधिकार और जमीन से जुड़े मामलों में सक्रिय समर्थन देना जरूरी है. स्वास्थ्य आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया अपेक्षित है. आदिवासी बुजुर्गों के साथ सम्मानजनक संवाद बहुत मायने रखता है. यदि पहाड़ी गांवों की अनदेखी की जाती है, तो वहां के मतदाता चुनाव में कड़ा जवाब देते हैं.
Rekha Priyadharshini,j.
DMK
Vinothini,r.
NTK
Pandian,a.
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Navan,p.
PT
Periyasamy,k.
IJK
Sellammal,v.m.
BSP
Saravanan,r.
IND
Senthilkumar,k.
IND
Chandrasekaran,k.
IND
Ayyadurai,j.
IND
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