नीलगिरी जिले के पश्चिमी पहाड़ी इलाके में स्थित गुडालुर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 139), तमिलनाडु के पारिस्थितिक रूप से सबसे ज्यादा संवेदनशील और सामाजिक रूप से जटिल निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है. तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के तिराहे पर स्थित, गुडालुर नीलगिरी पठार को वायनाड-मैसूर कॉरिडोर से जोड़ने वाले गेटवे के रूप में काम करता है. ऊटी और कुन्नूर जैसे पर्यटन-आधारित पहाड़ी शहरों के विपरीत, गुडालुर की पहचान बागान अर्थव्यवस्था, जंगल पर निर्भर आजीविका और लंबे समय से चले आ रहे भूमि अधिकारों के संघर्षों से बनी है.
ऐतिहासिक रूप से चाय, कॉफी और मसालों के बागानों से प्रभावित, गुडालुर आदिवासी समुदायों, छोटे किसानों, बागान मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों का घर है. घने जंगल, वन्यजीव गलियारे और आरक्षित भूमि इसके इलाके और विकास की बाधाओं दोनों को परिभाषित करते हैं, जिससे शासन पारिस्थितिकी, आजीविका और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होता है.
राजनीतिक रूप से, गुडालुर अपनी जनसांख्यिकीय संरचना और मुद्दों पर आधारित मतदान व्यवहार के कारण तमिलनाडु के कई निर्वाचन क्षेत्रों से अलग है. आदिवासी समूह, बागान मजदूर, छोटे जमींदार, व्यापारी और जंगल के किनारे बसे लोग मुख्य मतदाता हैं. चुनावों के दौरान भूमि स्वामित्व अधिकार, जंगल तक पहुंच, बागान मजदूरी, स्वास्थ्य सेवा और सड़क संपर्क वैचारिक बातों से ज्यादा मायने रखते हैं.
मैदानी इलाकों की तुलना में जातिगत समीकरणों की भूमिका सीमित है. इसके बजाय, आदिवासी प्रतिनिधित्व, कल्याणकारी योजनाओं का वितरण और प्रशासनिक जवाबदेही मतदाता की भावना को बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं. चुनावी नतीजे अक्सर पार्टी ब्रांडिंग के बजाय स्थानीय जुड़ाव के माध्यम से बनाए गए भरोसे पर निर्भर करते हैं.
इलाके में ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियां, घने जंगल, नदी प्रणालियां और वन्यजीव अभयारण्य हैं. भारी मानसूनी बारिश, बार-बार भूस्खलन और जंगल कटाई पर प्रतिबंध बुनियादी ढांचे के विकास को जटिल बनाते हैं. सार्वजनिक परिवहन असमान बना हुआ है, खासकर अंदरूनी बस्तियों और बागान क्षेत्रों में.
इस निर्वाचन क्षेत्र में गुडालुर शहर, पंडालुर, देवालय, श्रीमदुरई, चेरंगोडे, ओ'वैली, मासिनागुड़ी के किनारे और जंगल की पट्टियों में कई आदिवासी बस्तियां शामिल हैं. बात करें यहां के मुख्य स्थानों के बारे में तो गुडालूर शहर का बाजार क्षेत्र, पंडालूर चाय बागान क्षेत्र, देवालय-ओ'वैली बागान क्षेत्र, गुडालूर-नीलांबुर, सड़क गलियारा, चेरांगोड आदिवासी बस्तियां, मासिनागुड़ी के पास जंगल के किनारे के गांव, अंतर-राज्य चेक पोस्ट क्षेत्र शामिल है.
इस क्षेत्र के कुछ मुख्य मुद्दों की बात करें तो आदिवासी परिवारों के लिए भूमि पट्टों में देरी, अंदरूनी गांवों तक खराब सड़क कनेक्टिविटी, अपर्याप्त सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं, बागान श्रमिकों की मजदूरी में ठहराव, गर्मियों में पीने के पानी की कमी, सीमित उच्च शिक्षा संस्थान, ग्रामीण और आदिवासी युवाओं में बेरोजगारी की ओर ध्यान देने की बात है.
निर्वाचन क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण और वन-आधारित है. यहां की अर्थव्यवस्था में आदिवासी आबादी एक महत्वपूर्ण रोल निभाती है. यहां के आदिवासी समुदाय भूमि सुरक्षा और सम्मान चाहते हैं. बागान श्रमिक मजदूरी में संशोधन और आवास की मांग करते हैं. युवा शिक्षा तक पहुंच और स्थानीय रोजगार की तलाश में हैं. महिलाएं स्वास्थ्य सेवा, पीने के पानी और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, जबकि व्यापारी सड़कों की गुणवत्ता और अंतर-राज्य आवाजाही पर ध्यान केंद्रित करते हैं.
Kasilingam, S.
DMK
Ketheeswaran, R.
NTK
Yogeswaran, A.
DMDK
Nota
NOTA
Babu, J.
MNM
Saravanan, M.
IND
Jayaprakash, P.
TMTHK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.