कोयंबटूर साउथ (विधानसभा क्षेत्र संख्या 120) एक ऐसा शहरी क्षेत्र है जहां राजनीति काफी हाई-वोल्टेज रहती है और चुनाव कई अहम फैक्टर्स पर तय होते हैं. यहां जीत-हार मुख्य रूप से अल्पसंख्यक वोटों का एकजुट होना, व्यापारियों का मूड, शहरी प्रशासन का प्रदर्शन, और वैचारिक ध्रुवीकरण को कैसे संभाला गया, इन पर निर्भर करती है. सरकारी योजनाओं (वेलफेयर) का असर तो है, लेकिन मतदाताओं के फैसले में कानून-व्यवस्था, नागरिक सुविधाएं (जैसे पानी, सफाई), और समुदाय का भरोसा ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां चुनावी मुकाबले अक्सर बहुत करीबी होते हैं, इसलिए बूथ स्तर पर मजबूत मैनेजमेंट और वोटरों को निकालना निर्णायक साबित होता है.
इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक संरचना विविध है. प्रमुख वोटर समूहों में मुस्लिम समुदाय शामिल हैं, जो संख्या में मजबूत हैं और चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा शहरी व्यापारी और कारोबारी वर्ग (होलसेल, रिटेल, बाजार से जुड़े लोग), निम्न और मध्यम वर्ग के शहरी परिवार, अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के लोग (खासकर शहरी इलाकों में), छात्र, युवा और असंगठित क्षेत्र के कामगार, तथा मंदिरों से जुड़े पारंपरिक निवासी भी महत्वपूर्ण वोटर माने जाते हैं.
भौगोलिक रूप से यह इलाका घनी आबादी वाले शहर के केंद्र, बड़े बाजार और कमर्शियल जोन, पुराने रिहायशी इलाके जिनमें संकरी गलियां हैं, अल्पसंख्यक बहुल मोहल्ले, झुग्गी बस्तियां और पुनर्विकसित आवास जैसे हिस्सों में फैला हुआ है. यहां सड़क स्तर पर प्रशासन यानी रोजमर्रा की सुविधाओं का सही संचालन, चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करता है.
इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट्स) में आदियोगी शिव की प्रतिमा (112 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा), पेरूर पाटेश्वर मंदिर, कोवई कुट्रालम झरने, वीओसी पार्क, और गेडी कार संग्रहालय शामिल हैं. इसके अलावा अल्पसंख्यक बहुल वार्ड, बाजार और व्यापारी इलाके, मिश्रित मध्यम वर्गीय कॉलोनियां, SC बस्तियां, और ऐसे वार्ड जहां वोट स्विंग करता है, भी अहम माने जाते हैं. इन सभी क्षेत्रों में लोग कानून-व्यवस्था, नागरिक सेवाओं में बाधा, और राजनीतिक संदेश के लहजे पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों में कानून-व्यवस्था और समुदाय की सुरक्षा, पीने का पानी और सीवरेज सिस्टम, ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या, व्यापार से जुड़े नियम और प्रशासनिक दबाव, सरकारी अस्पताल और स्कूलों की गुणवत्ता, तथा महंगाई और जीवन-यापन की लागत शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी काफी स्पष्ट है, वे चाहते हैं कि उनका विधायक (MLA) समुदाय के बीच भरोसेमंद और हमेशा मौजूद रहने वाला हो. लोगों को पुलिस व्यवस्था निष्पक्ष और संतुलित लगे, उनकी शिकायतों का जल्दी समाधान हो, और व्यापारियों व अल्पसंख्यकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए. इसके अलावा किसी भी साम्प्रदायिक तनाव या नागरिक संकट के समय नेता की तुरंत प्रतिक्रिया और स्थिति संभालने की क्षमता भी मतदाताओं के फैसले में बड़ी भूमिका निभाती है.
Kamalhaasan
MNM
Mayura S Jayakumar
INC
Abdul Wahab
NTK
Nota
NOTA
Duraisamy @ Challenger Durai
AMMKMNKZ
Roshan
BSP
Sundaravadivelu
IND
Dhandabani
IND
Selvakumar
IND
Palanikumar.v
IND
Nagavalli
IND
Gopalakrishnan
NGPP
Jayaprakash.n
IND
Sanmugavel
GPI
Vivek Subramaniam
mauk
Raghul Gandhi .k
HJP
Jayachandran
IND
Vellimalai
MSKK
Kumareasan. K
IND
Alphonseraj
IND
Chelladurai. S
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.