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Tamil Nadu Election Result 2026 Live: कुन्नूर विधानसभा सीट पर DMK ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Coonoor Vidhan Sabha Chunav Result Live: तमिलनाडु के WEST TAMIL NADU क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Coonoor Chunav Results Live: कुन्नूर सीट पर DMK का दबदबा, 7044 मतों के विशाल अंतर से TVK को पछाड़ा
Coonoor Election Results Live 2026: तमिलनाडु के WEST TAMIL NADU क्षेत्र में किस पार्टी या गठबंधन का दबदबा? देखें तमिलनाडु रिजल्ट से जुड़े ताजा अपडेट
Tamil Nadu Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
कुन्नूर निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 110), नीलगिरि जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित है. यह तमिलनाडु के सबसे अलग और खास पहाड़ी क्षेत्रों में से एक माना जाता है. यह इलाका अंग्रेजों के समय की बसावट, चाय बागान आधारित अर्थव्यवस्था और एक मजबूत नागरिक संस्कृति के लिए जाना जाता है. ऊटी और मेत्तूपलयम के बीच स्थित कुन्नूर, जिले का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक, शैक्षणिक और आवासीय केंद्र है, साथ ही यह पहाड़ों से मैदानों तक जाने का मुख्य रास्ता भी है.
यह क्षेत्र अपने चाय बागानों, रक्षा प्रतिष्ठानों और सुहावने मौसम के लिए प्रसिद्ध है. यहां पर्यटन के लिए लोग भी आते हैं, लेकिन सिर्फ पर्यटकों पर निर्भर नहीं है, यहां स्थायी रूप से रहने वाली आबादी भी बड़ी है. इसलिए यहां रोजमर्रा की समस्याएं जैसे मकान, सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितना कि सीजन में आने वाले पर्यटकों का दबाव.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से, कुन्नूर के मतदाता समझदार और मुद्दों पर ध्यान देने वाले माने जाते हैं. यहां सरकारी कर्मचारी, बागान मजदूर, व्यापारी, छोटे व्यवसायी, रक्षा परिवार और लंबे समय से बसे पहाड़ी समुदाय मिलकर समाज का आधार बनाते हैं. यहां वोटिंग ज्यादातर स्थानीय समस्याओं पर आधारित होती है.
भौगोलिक रूप से यह इलाका ढलानों, जंगलों और घनी बसी पहाड़ी बस्तियों से बना है. ऊटी को जोड़ने वाला मेट्टुपालयम-कुन्नूर-ऊटी घाट रोड यहां की मुख्य सड़क है, जिससे रोज लोग, पर्यटक और सामान का आवागमन होता है.नीलगिरि पर्वतीय रेल भी यहां एक महत्वपूर्ण धरोहर और परिवहन का साधन है. लेकिन यहां अक्सर भूस्खलन, मिट्टी का कटाव और बारिश में सड़कों को नुकसान जैसी समस्याएं आती रहती हैं. पहाड़ी इलाका होने और जंगल के नियमों के कारण विकास के लिए जगह भी सीमित है.
इस क्षेत्र के मुख्य इलाके में कुन्नूर टाउन मार्केट, वेलिंगटन कैंटोनमेंट, अरुवनकाडु के रक्षा क्षेत्र, केट्टी वैली की बस्तियां, लवडेल का शैक्षणिक क्षेत्र, घाट रोड और नीलगिरी माउंटेन रेलवे के स्टेशन शामिल है.
मुख्य समस्याओं में भूस्खलन और ढलानों की अस्थिरता, बारिश में खराब ड्रेनेज और सड़कें, शहर में ट्रैफिक जाम, सस्ते घरों की कमी, कचरा और प्लास्टिक प्रदूषण, पर्यटन के समय पानी की कमी, युवाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर और अस्पतालों में क्षमता की कमी शामिल हैं.
मतदाताओं का रुझान भी साफ दिखता है. लोग अच्छी सड़कें और ड्रेनेज चाहते हैं, बागान मजदूर बेहतर आवास और नौकरी की सुरक्षा चाहते हैं, युवा पढ़ाई से जुड़े रोजगार के मौके ढूंढते हैं, महिलाएं पानी, सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, जबकि बुजुर्ग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग करते हैं. जमीनी स्तर पर यह भी देखा गया है कि अल्पसंख्यक वोटरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं है और वे अब भी DMK के साथ जुड़े हुए हैं, हालांकि सरकार से उनकी अपेक्षाएं पूरी तरह पूरी नहीं हो पा रही हैं.
राजनीतिक रूप से यह सीट बदलती रहती है. DMK ने 2011 और 2021 में जीत हासिल की, जबकि AIADMK ने 2016 और उससे पहले के चुनाव जीते. DMK ने यहां ज्यादा बार जीत दर्ज की है, लेकिन जब AIADMK का उम्मीदवार लोगों से अच्छा जुड़ता है, तो उसे भी समर्थन मिल जाता है.
Vinoth, D.
ADMK
Lavanya, M.
NTK
Rajakumar, H.b.
MNM
Kalaiselvan, S.
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Jayaprakash, D
IND
Arumugam, R.
AMPK
Prabhu Inbadass, S.
AITC
Basha, A.
IND
Chandran, K.
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
तमिलनाडु में AIADMK के भीतर अब खुली बगावत दिखाई देने लगी है. पार्टी के दो गुट अलग-अलग दावों के साथ प्रोटेम स्पीकर से मिलने पहुंचे हैं. एक गुट एडप्पादी K पलानीस्वामी को विधायक दल का नेता बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है.
तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु में सरकार गठन के बीच CPI और CPI(M) ने विजय की टीवीके को बाहरी समर्थन देने का फैसला किया है. वाम दलों ने खुलासा किया कि डीएमके चाहती थी कि वे एआईएडीएमके को समर्थन दें, लेकिन इसे अस्वीकार्य मानते हुए उन्होंने टीवीके का साथ चुना. एमए बेबी ने कहा कि वाम दल डीएमके के साथ वैचारिक रिश्ते जारी रखेंगे, लेकिन टीवीके सरकार में कोई मंत्री पद नहीं मांगेंगे.
थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे तमिलनाडु में सत्ता गठन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. इसी बीच अभिनेता-राजनेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.
कांग्रेस द्वारा TVK को समर्थन देने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है. DMK ने इसे गठबंधन के साथ विश्वासघात बताते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के वरिष्ठ नेता डीआर बालू ने कांग्रेस पर अवसरवादिता का आरोप लगाया है.
तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री सिर्फ एक सुपरस्टार की सफलता नहीं, बल्कि पिता-पुत्र के संघर्ष, सपनों और रिश्तों की कहानी भी बन गई है. कभी बेटे को फिल्मों में लॉन्च करने वाले एसए चंद्रशेखर आज उसी विजय की राजनीतिक जीत पर गर्व कर रहे हैं. कानूनी विवाद, रिश्तों में दूरियां और फिर भावनात्मक मेल-मिलाप के बाद अब विजय सत्ता के सबसे बड़े दरवाजे तक पहुंच चुके हैं.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.