थोंडामुथुर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 119) तमिलनाडु का एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जिसकी आबादी घनी नहीं है, लेकिन राजनीतिक प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है. यहां चुनावों का परिणाम अक्सर कोंगु जातीय समूहों की एकजुटता, सिंचाई व्यवस्था और जलाशयों (टैंकों) की सुरक्षा, शहर के किनारे रहने वाले संपन्न वर्ग की सोच, और गांव स्तर पर नेतृत्व की विश्वसनीयता जैसे कारकों से तय होता है. सरकारी कल्याण योजनाएं यहां कुछ हद तक असर डालती हैं, लेकिन असल में जमीन, पानी और शांत तरीके से बनाए गए व्यक्तिगत रिश्ते चुनावी राजनीति में ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इस सीट पर जीत-हार का अंतर आम तौर पर मध्यम स्तर का रहता है, लेकिन चुनावी ढांचा काफी स्थिर माना जाता है. हालांकि अगर पानी की कमी (वॉटर स्ट्रेस) या जमीन के उपयोग को लेकर विवाद जैसी स्थिति पैदा हो जाए तो राजनीतिक समीकरण बदल भी सकते हैं. इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व फिलहाल AIADMK के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि कर रहे हैं, जिन्हें यहां का मजबूत नेता माना जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से देखें तो इस क्षेत्र में कुछ खास मतदाता समूह निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इनमें सबसे प्रमुख हैं कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय, जिनका यहां बहुत बड़ा प्रभाव है और अक्सर चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है. इसके अलावा टैंक और नहरों पर निर्भर सिंचित किसान, शहर के पास रहने वाले जमीन मालिक और फार्महाउस निवासी, अनुसूचित जाति के कृषि मजदूरों की बस्तियां, मंदिरों से जुड़े पारंपरिक परिवार, और छोटे व्यापारी व सेवा क्षेत्र के कामगार भी महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग हैं.
भौगोलिक दृष्टि से थोंडामुथुर क्षेत्र की खासियत इसकी विविध प्रकृति है. यहां पश्चिमी घाट की तलहटी के गांव, टैंक आधारित सिंचाई वाले कृषि क्षेत्र, शहर के पास बने लक्जरी फार्महाउस और नई कॉलोनियां, जंगल के किनारे बसे गांव, और सीमित शहरीकरण देखने को मिलता है. कुल मिलाकर यह क्षेत्र अभी भी गांव-केंद्रित ही है और पूरी तरह शहरी नहीं हुआ है.
इस क्षेत्र में कुछ ऐसे चुनावी हॉटस्पॉट हैं जहां से राजनीतिक रुझान ज्यादा स्पष्ट होता है. इनमें टैंक कमांड एरिया के गांव, कोंगु समुदाय के प्रभुत्व वाले मुख्य गांव, SC कृषि मजदूरों की बस्तियां, शहर के पास बने फार्महाउस इलाके, और जंगल के किनारे बसे छोटे गांव शामिल हैं. इन इलाकों के मतदाता अक्सर इस बात पर प्रतिक्रिया देते हैं कि टैंकों की सफाई (डिसिल्टिंग) हुई या नहीं, पानी का सही वितरण हुआ या नहीं, सड़क और आवागमन की सुविधा कैसी है, और जमीन से जुड़े नियमों का पालन कैसे किया जा रहा है.
स्थानीय मुद्दों की बात करें तो यहां के लोगों के लिए कुछ विषय सबसे महत्वपूर्ण हैं. इनमें टैंकों की सफाई और पानी का भंडारण, गर्मियों में पीने के पानी की उपलब्धता, कृषि भूमि की सुरक्षा, गांवों की सड़क कनेक्टिविटी, जंगल और राजस्व विभाग के बीच समन्वय, और स्कूलों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की गुणवत्ता प्रमुख हैं.
मतदाताओं की सोच और अपेक्षाओं को देखें तो थोंडामुथुर में लोग ऐसे विधायक को पसंद करते हैं जो स्थानीय रूप से जुड़ा हुआ और आसानी से उपलब्ध हो. गांव के कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में उसकी नियमित मौजूदगी भी लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती है. इसके साथ ही लोग चाहते हैं कि विधायक लोक निर्माण विभाग (PWD) और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर समस्याओं का जल्दी समाधान करे. यहां जातीय पंचायतों और मंदिर समितियों का सम्मान भी सामाजिक और राजनीतिक संबंधों में अहम माना जाता है. इस क्षेत्र में मतदाता तेज और शोरगुल वाली राजनीति की बजाय शांत तरीके से समस्याओं का समाधान करने वाली राजनीति को ज्यादा महत्व देते हैं.
Karthikeya
DMK
S. Shajahan
MNM
S. Kalaiarasi
NTK
Nota
NOTA
R.sathishkumar
AMMKMNKZ
A. Mansoor Ali Khan
IND
J.john Edward Visuvasam
IND
Cc Selvamohan
IND
A. Abdul Gafoor
IND
M. Badran
GPI
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.