धर्मपुरी उत्तर-पश्चिम तमिलनाडु का एक जिला मुख्यालय वाला विधानसभा क्षेत्र (संख्या 59) है, जहां प्रशासनिक महत्व, खेती से जुड़ी आजीविका और अर्ध-शहरी नागरिक जरूरतें, ये तीनों एक साथ मिलती हैं. राजनीतिक रूप से यह सीट “कल्याणकारी योजनाओं” और “गवर्नेंस” यानी प्रशासनिक कामकाज पर बहुत संवेदनशील मानी जाती है.
यहां चुनाव का नतीजा अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि सरकारी योजनाएं जमीन पर कितनी सही तरीके से पहुंच रही हैं, पानी की सुरक्षा (वॉटर सिक्योरिटी) कैसी है, और स्थानीय नेतृत्व कितना दिखाई देने वाला व सक्रिय है. पूरी तरह ग्रामीण पेनागरम या नहर-आधारित पालाकोड की तुलना में धर्मपुरी की खासियत यह है कि इसमें शहर की नगर-व्यवस्था और उसके आसपास के कृषि-प्रधान गांव, दोनों का मिश्रण है.
इस क्षेत्र में प्राचीन मंदिर जैसे थीर्थमलाई (Theerthamalai) और ऐतिहासिक अधियमानकोट्टई किला (Adhiyamankottai Fort) मौजूद हैं, और यह इलाका मुख्य रूप से बेहद खूबसूरत होगेनक्कल जलप्रपात (Hogenakkal Falls) के लिए प्रसिद्ध है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां मतदाता वर्ग में BC और MBC कृषक समुदाय, SC आबादी, छोटे किसान, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी तथा प्रोफेशनल लोग शामिल हैं. यहां राय बनाने वाले प्रमुख समूहों में किसान संगठन, सरकारी कर्मचारियों की यूनियनें, सहकारी संस्थाएं (कोऑपरेटिव), व्यापारी संगठन और स्थानीय निकायों के नेता (लोकल बॉडी लीडर्स) आते हैं. भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र NH-44 (चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर) पर स्थित है, जिससे इसकी कनेक्टिविटी मजबूत है; कृष्णागिरी, सेलम और बेंगलुरु से सड़क मार्ग द्वारा अच्छे संपर्क हैं.
धर्मपुरी शहर एक क्षेत्रीय सेवा केंद्र और स्वास्थ्य/चिकित्सा हब की तरह काम करता है, लेकिन रेल सुविधा सीमित है और परिवहन में सड़कों का दबदबा है. यहां प्रमुख चुनौतियों में ट्रैफिक जाम, शहर और गांव के बीच बुनियादी सुविधाओं का अंतर, तथा जिला कार्यालयों और अस्पतालों पर बढ़ता दबाव शामिल है.
यहां कुछ ऐसे खास इलाके भी हैं जो चुनावी नाराजगी बढ़ाते हैं, जैसे पानी की भारी कमी वाले गांव, शहर के वे वार्ड जहां ड्रेनेज की समस्या है, SC बस्तियां जहां आवास की कमी है, और शहर के आसपास के नए लेआउट (पेरि-अर्बन) जहां अभी सेवाएं ठीक से नहीं पहुंची हैं.
इस क्षेत्र के मुख्य मुद्दों में पीने के पानी की कमी, सिंचाई और तालाब/टैंक की मरम्मत व देखरेख, शहरी ट्रैफिक और जल निकासी, सरकारी अस्पताल की क्षमता, ग्रामीण सड़कों की कनेक्टिविटी, आवास, और वेलफेयर योजनाओं का “सैचुरेशन” यानी जिन तक लाभ पहुंचना था वहां तक पूरा-पूरा पहुंचना शामिल हैं. कुल मिलाकर पानी और स्वास्थ्य सेवाएं चुनावी बहसों में सबसे ऊपर रहती हैं.
मतदाता मनोदशा की बात करें तो किसान पानी की सुरक्षा और खेती के इनपुट सपोर्ट पर ध्यान देते हैं, सरकारी कर्मचारी प्रशासनिक स्थिरता चाहते हैं, महिलाएं पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और पेंशन को प्राथमिकता देती हैं, युवा नौकरी और कौशल विकास (स्किल्स) पर केंद्रित रहते हैं, और बुजुर्ग पेंशन व इलाज तक आसान पहुंच को अहम मानते हैं. कुल मिलाकर धर्मपुरी के मतदाता ऐसे नेतृत्व को पसंद करते हैं जो स्थिर हो, जमीन पर दिखाई देता हो, और कल्याणकारी योजनाओं के मामले में भरोसेमंद व प्रभावी साबित हो.
Subramani.p
DMK
Rajendran.d.k.
AMMKMNKZ
Senthil Kumar (a) Senthil.a.
NTK
Jayavenkatesan.s.k.
MNM
Natarajan.m.
APTADMK
Nota
NOTA
Natarajan.v.
IND
Tamilarasan.s.
IND
Perumal.p
BSP
Subramani.k.
IND
Manigandan.e.v.
IND
Subramani.t.
IND
Shanmugam.p.
IND
Sakthivel.p.
DMSK
Ramasamy.t.
MIDP
Mani.l.
DAMK
Palani.s.k.
IND
Sundaramoorthy.m.
IND
Venkateswaran.b.
IND
Subramani.p.
IND
Rajendran.k.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.