मोडक्कुरिची (विधानसभा क्षेत्र संख्या 100) कोंगु क्षेत्र की एक पारंपरिक और विशिष्ट सीट मानी जाती है, जहां चुनावी नतीजे भावनाओं या केवल कल्याणकारी योजनाओं से तय नहीं होते, बल्कि जातीय समीकरण, कृषि अर्थव्यवस्था और पानी की उपलब्धता सबसे बड़ा निर्णायक कारक बनते हैं. यह ऐसा क्षेत्र है जहां लोग जमीन, आय की सुरक्षा और सामाजिक सम्मान के आधार पर मतदान करते हैं. यहां जीत का अंतर आमतौर पर स्थिर रहता है, लेकिन सूखे या जल संकट वाले वर्षों में परिणाम अचानक बदल भी सकते हैं. यह इलाका एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कृषि केंद्र है और कई प्रमुख हिंदू मंदिरों का भी केंद्र है. यहां के प्रमुख मंदिरों में करिकाली अम्मन मंदिर और शक्ति विनायक मंदिर शामिल हैं, जो स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक चरित्र की बात करें तो यहां के प्रमुख मतदाता वर्गों में कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय, जो संख्या और आर्थिक रूप से प्रभावशाली हैं, प्रमुख भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा कृषि भूमि रखने वाले परिवार, अनुसूचित जाति के कृषि मजदूर बस्तियां, खेती से जुड़े व्यापारी और कमीशन एजेंट, दुग्ध उत्पादक और सहकारी समितियों के सदस्य, तथा खेती और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाएं भी महत्वपूर्ण मतदाता समूह हैं. यहां की राजनीति का सरल समीकरण है, जातीय सम्मान और सिंचाई की गारंटी मिल जाए तो वोट एकजुट हो जाता है.
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. कुछ गांव नहरों से सिंचित हैं, जबकि कुछ इलाके सूखे क्षेत्र में आते हैं. गांव अच्छी तरह जुड़े हुए हैं लेकिन क्षेत्र व्यापक रूप से फैला हुआ है और बसावट का पैटर्न पूरी तरह कृषि पर आधारित है. यहां की राजनीति में कल्याण योजनाओं से ज्यादा पानी का मुद्दा हावी रहता है यानी जल आपूर्ति ही असली राजनीतिक ताकत तय करती है.
चुनावी दृष्टि से कुछ विशेष क्षेत्र भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिनमें करिकाली अम्मन मंदिर और शक्ति विनायक मंदिर के आसपास के क्षेत्र, नहर से सिंचित स्थिर वोट बैंक वाले गांव, सूखे क्षेत्र के कृषि क्लस्टर, अनुसूचित जाति के मजदूरों की बस्तियां, डेयरी और दूध आपूर्ति मार्ग से जुड़े गांव, तथा इरोड शहर की ओर बढ़ते अर्ध-शहरी इलाके शामिल है. इन सभी क्षेत्रों में लोग नारे या भावनात्मक भाषणों से ज्यादा कृषि अर्थव्यवस्था और आय की स्थिरता को देखकर मतदान करते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने का समय और नहरों का रखरखाव, खेती के लिए नियमित बिजली आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और फसलों के दाम की स्थिरता, उर्वरक और मजदूरी जैसी लागत में बढ़ोतरी, ग्रामीण सड़कों और परिवहन की स्थिति, तथा पशु चिकित्सा और डेयरी सेवाएं शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी स्पष्ट है, विधायक ऐसा होना चाहिए जो किसानों की भाषा बोले, जल विवादों के समय क्षेत्र में मौजूद रहे, जातीय पंचायतों और सामुदायिक परिषदों के साथ सम्मानजनक संवाद रखे, सिंचाई प्रबंधन को मजबूत बनाए और बिजली व बुनियादी ढांचे की विश्वसनीयता सुनिश्चित करे. मोडक्कुरिची में चुनावी राजनीति नारों या भावनाओं पर नहीं, बल्कि खेती, पानी और सामाजिक सम्मान के ठोस मुद्दों पर आधारित है.
Subbulakshmi Jegadeesan
DMK
Prakash.g
NTK
Rajeshkumar.m
MNM
Nota
NOTA
Thangaraj.d
AMMKMNKZ
Boopathi.r
BSP
Sami Kandhasamy
IND
Vijayakumar.m
IND
Mayilsamy.p
IND
Manickam.r
GPI
Govanam Thangavel.k.s
IND
Maheswaran .a
MIDP
Bharathi.l
IND
Ramesh.m
NKMK
Mani.p
IDMMK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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