थल्ली निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 56) कृष्णागिरि जिले का एक ज्यादातर ग्रामीण और कर्नाटक सीमा से सटा विधानसभा क्षेत्र है. इसकी पहचान सूखे इलाकों की खेती, जंगल के किनारे बसे गांव, और सिंचाई पर निर्भरता से होती है. यहां की राजनीति का केंद्र मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता, किसानों की खेती को टिकाऊ बनाना, सरकारी योजनाओं/वेलफेयर का सही लाभ, और सीमा पार (तमिलनाडु-कर्नाटक) से जुड़े रोजगार व व्यापार हैं. इसी वजह से यह सीट ग्रामीण होते हुए भी बहुत संवेदनशील मानी जाती है. चुनाव में जीत-हार अक्सर इस बात पर निर्भर करती है कि गांव के लोगों का भरोसा किस पर है.
इस क्षेत्र के मतदाताओं में मुख्य रूप से BC और MBC वर्ग की कृषि आधारित जातियां हैं, साथ ही SC समुदाय की भी अच्छी संख्या है. यहां बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान, कृषि मजदूर, और जंगल-किनारे के छोटे बसेरे शामिल हैं. प्रभावशाली भूमिका पंचायत नेताओं, जाति के बुजुर्गों, सहकारी समितियों, शिक्षकों, और महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) की समन्वयकों की रहती है. मतदान का व्यवहार बहुत स्थानीय, रिश्तों पर आधारित, और टर्नआउट (मतदान प्रतिशत) के प्रति संवेदनशील होता है, यानी कई जगह थोड़े से वोट भी परिणाम बदल देते हैं.
भौगोलिक रूप से थल्ली तमिलनाडु-कर्नाटक बॉर्डर पर स्थित है और यह क्षेत्र मुख्य रूप से राज्य राजमार्गों (State Highways) और ग्रामीण सड़कों पर निर्भर करता है, जबकि रेल कनेक्टिविटी सीमित है. यहां पहाड़ी इलाका, जंगल की सीमाएं, अंदरूनी हिस्सों की खराब सड़कें, सीमा पर परिवहन से जुड़ी दिक्कतें, और मानसून के समय कुछ गांवों का अस्थायी रूप से कट जाना जैसी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं.
थल्ली के भीतर कुछ प्रमुख “हॉटस्पॉट” या संवेदनशील क्लस्टर हैं जिनमें थल्ली टाउन पंचायत, सूखे इलाके के खेती वाले गांव, टैंक (तालाब/झील) और बोरवेल पर निर्भर छोटे गांव/हमलेट, जंगल-किनारे के बसे गांव, और सीमा से जुड़े वे गांव जहां क्रॉस-स्टेट व्यापार और आवाजाही होती है. इन सभी समूहों की समस्याएं अलग-अलग हैं, इसलिए यहां प्रभावी चुनावी रणनीति के लिए हर क्लस्टर के अनुसार अलग तरह का संपर्क और समाधान जरूरी होता है.
मुख्य मुद्दों में सबसे बड़ा मुद्दा पीने के पानी की कमी, टैंकों/तालाबों का पुनर्जीवन (rejuvenation), फसल खराब होने का खतरा, ग्रामीण सड़कों की खराब हालत, स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता, और आवास व स्वच्छता में कमी हैं. कुल मिलाकर, पानी और खेती ही यहां की चुनावी चर्चा का सबसे बड़ा आधार बनते हैं.
मतदाता मूड की बात करें तो थल्ली एक ग्रामीण और सीमा-संवेदनशील सीट है, जहां गांव और जाति आधारित जुड़ाव मजबूत है, जीत-हार के अंतर अक्सर बहुत कम रहते हैं, और बूथ स्तर पर उतार-चढ़ाव काफी होता है. यहां मतदाता पार्टी के नाम से ज्यादा उम्मीदवार की पहुंच, उपलब्धता और व्यवहार को महत्व देते हैं. किसान पानी की सुरक्षा चाहते हैं, मजदूरों को स्थिर काम चाहिए, महिलाएं पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं, युवा स्किल ट्रेनिंग और स्थानीय रोजगार की मांग करते हैं, और बुजुर्गों के लिए पेंशन तथा पास में इलाज की सुविधा सबसे अहम मुद्दे होते हैं.
Dr.nagesh Kumar.c
BJP
Mary Selvarani.r
NTK
Nota
NOTA
Ashok Kumar.v
IJK
Vasanthamma.n
IND
Kumar.m
IND
Ravi Muniswamy
IND
Sekar.m.v
AMMKMNKZ
Devappa@devagowda.y
IND
Usha.m
NGPP
Ravi.g
SP
Janaki.g
VTVTK
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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