बरगुर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 52) कृष्णागिरी जिले की एक अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) और तेजी से बदलती हुई विधानसभा सीट है, जो बेंगलुरु-होसुर-कृष्णागिरी कॉरिडोर के साथ स्थित है. इस सीट की राजनीति पर उद्योगों में नौकरी पर निर्भरता, शहर के किनारे की खेती (पेरि-अर्बन एग्रीकल्चर) और महत्वाकांक्षी युवा वर्ग का गहरा असर है. इसी वजह से यह उत्तर तमिलनाडु की सबसे ज्यादा स्विंग (मत बदलने वाली) सीटों में मानी जाती है. यहां चुनावी नतीजे आम तौर पर केवल “वेलफेयर” योजनाओं पर नहीं, बल्कि नौकरियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा तक पहुंच, और तेजी से शहरी होती आबादी की नागरिक सुविधाओं की अपेक्षाओं पर ज्यादा निर्भर करते हैं.
बरगुर का तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में भी खास महत्व रहा है. 1991 में जे. जयललिता इसी सीट से विधायक चुनी गई थीं. लेकिन 1996 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, वह यहां से हार गईं, जबकि उस समय वह वर्तमान मुख्यमंत्री थीं. उन्हें डीएमके के ई.जी. सुगवनम ने 8,366 वोटों के अंतर से हराया था. इस नतीजे को अक्सर बरगुर की एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता विरोधी) क्षमता और इसके स्विंग नेचर के एक बड़े उदाहरण के रूप में बताया जाता है कि यहां जनता का मूड ऐसा है कि मुख्यमंत्री भी इससे बच नहीं सकते.
राजनीतिक और सामाजिक चरित्र की बात करें तो, यहां मतदाता वर्ग में बीसी और एमबीसी समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावी हैं, साथ ही एससी (अनुसूचित जाति) की भी कई महत्वपूर्ण आबादी वाले इलाके हैं. इस सीट में औद्योगिक क्षेत्रों में रोज आने-जाने वाले कर्मचारी, व्यापारी, सेवा क्षेत्र के कामगार, और बड़ी छात्र आबादी भी शामिल है. यहां चुनाव में प्रभाव डालने वाले प्रमुख समूहों में जाति संघ/संगठन, शिक्षा से जुड़े नेटवर्क, ट्रेड यूनियन, ट्रांसपोर्ट से जुड़े संगठन, और स्थानीय पंचायत तथा वार्ड स्तर के नेता शामिल हैं. कुल मिलाकर, बारगुर का वोटिंग व्यवहार युवा-प्रेरित, महत्वाकांक्षी, और कामकाज/परफॉर्मेंस आधारित माना जाता है.
भूगोल और कनेक्टिविटी के लिहाज से बारगुर एनएच-44 के मुख्य मार्ग पर स्थित है, जिससे इसका होसुर, कृष्णागिरी और बेंगलुरु से मजबूत सड़क संपर्क है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग काम के लिए आवागमन (डेली कम्यूट) करते हैं. हालांकि, चुनौतियों में टाउन के अंदर ट्रैफिक जाम, सड़क सुरक्षा के ब्लैकस्पॉट, और तेजी से शहरीकरण के साथ नागरिक सुविधाओं का उतना तेज अपग्रेड न हो पाना शामिल है.
इस सीट के मुख्य इलाको में बरगुर टाउन, उद्योगों से जुड़े रिहायशी क्लस्टर, कृषि गांव और पेरि-अर्बन बस्तियां, शिक्षण संस्थानों का बेल्ट, और हाईवे के आसपास के कमर्शियल/व्यावसायिक जोन शामिल है.
वोटर मूड यानी जनता की प्राथमिकताओं में सबसे बड़े मुद्दों में नौकरी की स्थिरता, ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा, पीने के पानी की कमी, ड्रेनेज की समस्याएं, हाउसिंग रेग्युलराइजेशन (मकानों/कॉलोनियों को वैध/नियमित करना), और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता शामिल हैं. औद्योगिक कर्मचारी चाहते हैं कि यात्रा आसान हो और नौकरी बनी रहे, युवा वर्ग स्किल डेवलपमेंट और प्लेसमेंट को प्राथमिकता देता ह, महिलाएं पानी और स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देती हैं, किसान ग्राउंडवॉटर की चिंता करते हैं और व्यापारी चाहते हैं कि सड़कों पर आवागमन सुचारू रहे ताकि व्यापार में बाधा न आए.
Krishnan A
ADMK
Karunakaran K
NTK
Nota
NOTA
Ganesa Kumar S
AMMKMNKZ
Nirmala A
NPEP
Manjunathan M
IND
Murali M
BSP
Arun Gowtham R
IJK
Mani K
IND
Santhamoorthi K
IND
Vasantharaj P
APTADMK
Aandi A
VTVTK
Kalpana D
IND
Krishnan A
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
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तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.