सिंगनल्लूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 121) तमिलनाडु का एक बेहद सक्रिय और तेजी से बदलने वाला शहरी क्षेत्र माना जाता है. यहां चुनाव आमतौर पर मध्यम वर्ग की सेवाओं से जुड़ी अपेक्षाओं, झील और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, आईटी और औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के भरोसे, तथा आसपास के पेरि-अर्बन कोंगु समाज की राजनीतिक भावनाओं के आधार पर तय होते हैं. यहां सरकारी कल्याण योजनाओं का असर जरूर रहता है, लेकिन चुनावी जीत का असली आधार शासन की गुणवत्ता और शहर की बेहतर योजना (अर्बन प्लानिंग) पर भरोसा होता है. इस सीट पर जीत का अंतर अक्सर बहुत कम रहता है और मतदाता आसानी से अपना रुख बदल सकते हैं, खासकर तब जब पानी की समस्या, बाढ़, ट्रैफिक जाम और रियल एस्टेट से जुड़ा दबाव जैसे मुद्दे सामने आते हैं. यह क्षेत्र उलगालंधा पेरुमाल मंदिर, जिसे श्री त्रिविक्रम नारायण स्वामी मंदिर भी कहा जाता है, के लिए भी प्रसिद्ध है.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यहां कई महत्वपूर्ण मतदाता समूह प्रभाव डालते हैं. इनमें मुख्य रूप से शहरी मध्यम वर्ग और वेतनभोगी पेशेवर, आईटी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी, कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय (खासकर आसपास के गांवों में), औद्योगिक मजदूर और छोटे-मध्यम उद्योगों (SME) के मालिक, अनुसूचित जाति (SC) समुदाय जो शहर और उसके आसपास के इलाकों में रहते हैं, तथा छात्र और युवा परिवार शामिल हैं. इस क्षेत्र में आमतौर पर वही उम्मीदवार जीतता है जो नागरिक सुविधाओं के प्रदर्शन और पर्यावरण के प्रति भरोसेमंद छवि बना पाता है.
भौगोलिक और कनेक्टिविटी के लिहाज से सिंगनल्लूर क्षेत्र का केंद्र सिंगनल्लूर झील के आसपास के आवासीय इलाके हैं. इसके आसपास आईटी पार्क और औद्योगिक एस्टेट भी मौजूद हैं, जिससे यहां काम करने वाले लोगों की बड़ी आबादी रहती है. इसके साथ ही आसपास के पेरि-अर्बन गांव, जहां कोंगु समुदाय का प्रभाव अधिक है, भी इस क्षेत्र का हिस्सा हैं. पिछले कुछ वर्षों में यहां अपार्टमेंट और नई हाउसिंग कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हुआ है. इस इलाके में कई मुख्य सड़कें और ट्रैफिक जंक्शन भी हैं, जिससे यातायात एक बड़ा मुद्दा बन जाता है. यहां की झील की पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) और शहर की अर्बन प्लानिंग का स्तर मतदाताओं के मूड को काफी हद तक प्रभावित करता है.
इस विधानसभा क्षेत्र के कुछ प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हॉटस्पॉट भी हैं. इनमें उलगालंधा पेरुमाल मंदिर, सिंगनल्लूर झील, अपार्टमेंट और गेटेड कम्युनिटी वाले वार्ड, आईटी और औद्योगिक कर्मचारियों के आवासीय इलाके, कोंगु समुदाय के प्रभाव वाले आसपास के गांव, एससी समुदाय के आवासीय क्लस्टर, और ट्रैफिक जाम वाले संवेदनशील वार्ड शामिल हैं. इन सभी इलाकों के मतदाता खास तौर पर बाढ़ की स्थिति, पानी की गुणवत्ता, सड़क जाम और अवैध निर्माण या प्लानिंग उल्लंघन जैसे मुद्दों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं और उनका असर सीधे चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है.
स्थानीय मुद्दों की बात करें तो यहां सबसे प्रमुख मुद्दों में सिंगनल्लूर झील का पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण, पीने के पानी की गुणवत्ता और भूजल का लगातार घटता स्तर, ट्रैफिक जाम और सड़कों के संकरे हिस्से (बॉटलनेक), ड्रेनेज व्यवस्था और मानसून की तैयारी, पास के औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाला प्रदूषण, तथा स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच शामिल हैं.
मतदाताओं की सोच और अपेक्षाओं के अनुसार इस क्षेत्र में विधायक (MLA) ऐसा होना चाहिए जो तकनीकी समझ रखने वाला, समस्याओं को हल करने में सक्षम और लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हो. मतदाता चाहते हैं कि झील, ड्रेनेज सिस्टम और सड़कों में स्पष्ट और दिखाई देने वाले सुधार हों. साथ ही विधायक को नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना चाहिए. इसके अलावा शहर की योजना से जुड़े नियमों का पारदर्शी और सख्त पालन भी जरूरी माना जाता है. यहां बाढ़ या पानी की कमी जैसी किसी भी आपदा के समय तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देना भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं की अनदेखी यहां सीधे मतदाताओं के गुस्से और वोटों के नुकसान में बदल जाती है.
Karthik, N
DMK
Mahendran, R
MNM
Narmadha, R
NTK
Selva, S.r
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Nabas Sherif, M
IND
Sasikumar, M
ADK
Chanthirika, R
IND
Praveen Venkatachalam
IND
Nagarajan, J
IND
Karthik, N
IND
Mohandass, N
IND
Palanisamy, N
MIDP
Senthilkumar, S
USIP
Maniraj, K
IND
Kumar Babu, K
IND
Viju Alban Prakash, V
IND
Akbar Ali, A
IND
Karthick, N
IND
Gowtham, P
IND
Krishnan, V
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.