कृष्णागिरी विधानसभा क्षेत्र (संख्या 53) उत्तर तमिलनाडु का जिला मुख्यालय वाला विधानसभा क्षेत्र है, जिसकी पहचान मुख्य रूप से खेती, सरकारी सेवाओं की उपलब्धता जैसे सरकारी डिलीवरी सिस्टम और छोटे शहरों के धीरे-धीरे शहरीकरण से बनती है. यह सीट किसी बड़े औद्योगिक या रोजाना आने-जाने (कम्यूटर) वाले क्षेत्र जैसी नहीं है, बल्कि यहां की राजनीति किसान भावनाओं, नागरिक प्रशासन (सिविक गवर्नेंस) और संस्थानों की विश्वसनीयता पर ज्यादा निर्भर करती है. इसे एक “बैरोमीटर” सीट भी माना जाता है, क्योंकि यहां का चुनावी मूड अक्सर पूरे जिले के राजनीतिक माहौल को दर्शा देता है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से यहां के मतदाता ज्यादातर BC और MBC कृषि समुदायों से आते हैं, साथ ही SC आबादी भी अच्छी संख्या में मौजूद है. इस क्षेत्र में किसान, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और प्रोफेशनल वर्ग भी प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं. चुनावी माहौल पर किसान संगठनों, सहकारी समितियों (कोऑपरेटिव्स), कर्मचारी यूनियनों, व्यापार मंडलों, और स्थानीय पंचायत व नगर पालिका नेतृत्व का खास असर रहता है. यहां मतदान मुद्दों पर आधारित होता है, लोगों की छवि और भरोसे को बहुत महत्व दिया जाता है, और सीट का स्वभाव मध्यम स्तर तक स्विंग (कभी इधर-कभी उधर) वाला माना जाता है.
भौगोलिक रूप से कृष्णागिरी NH-44 पर स्थित है और होसुर, धर्मपुरी और बेंगलुरु से इसकी सड़क कनेक्टिविटी मजबूत है, जिससे यह एक क्षेत्रीय सेवा केंद्र (रीजनल सर्विस हब) की तरह काम करता है. हालांकि रेल कनेक्टिविटी सीमित है. क्षेत्र में ट्रैफिक जाम, नागरिक सुविधाओं पर दबाव, और शहर व गांव के विकास में असमानता जैसी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं.
पर्यटन और प्रमुख स्थानों की बात करें तो यहां ऐतिहासिक कृष्णागिरी किला और रायकोट्टई किला, प्राकृतिक रूप से सुंदर कृष्णागिरी रिजरवॉयर प्रोजेक्ट (KRP) डैम, और धार्मिक स्थल 8 धर्मिक “श्री पार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थ धाम” जैसे प्रमुख आकर्षण हैं.
चुनाव को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दों में सिंचाई और जल प्रबंधन, आम (मैंगो) के दामों की स्थिरता, शहरी ट्रैफिक, पीने के पानी की आपूर्ति, ड्रेनेज, सफाई-स्वच्छता, और सरकारी अस्पताल पर बढ़ता दबाव शामिल हैं. कुल मिलाकर यहां किसानों से जुड़े मुद्दे और शहर की नागरिक सुविधाएं (सिविक डिलीवरी) मतदाताओं की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहती हैं.
मतदाता मूड की बात करें तो कृष्णागिरी खेती और शहरी जरूरतों का मिला-जुला (एग्रीकल्चर–अर्बन हाइब्रिड) क्षेत्र है, जहां राजनीतिक जागरूकता काफी ज्यादा है और स्विंग की संभावना भी रहती है. यहां उम्मीदवार की विश्वसनीयता (क्रेडिबिलिटी) पार्टी की ताकत जितनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है. किसान पानी की सुरक्षा और सही दाम चाहते हैं, व्यापारी आसान और सुचारू परिवहन चाहते हैं, सरकारी कर्मचारी स्थिरता को महत्व देते हैं, महिलाएं पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं, और युवा रोजगार व कौशल विकास के अवसरों की तलाश में रहते हैं.
Senguttuvan.t
DMK
Nirandari.v
NTK
Ravishankar.r.k
MNM
Nota
NOTA
Chandramohan.k.m
NCP
Ameenulla
AIMIM
Tamilselvan.s
BSP
Sakthi.k
IND
Sivan.c
IND
Gopinath.m
IND
Vijayakumar.r
VTVTK
Sasikumar.k.s
APTADMK
Tvs Gandhi
IND
Ruthramani.t
DMSK
Kumaresan.m
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.