किनाथुकदावु विधानसभा क्षेत्र (No. 122) तमिलनाडु के कोंगु क्षेत्र का एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां चुनावी परिणामों पर सबसे ज्यादा असर पानी की उपलब्धता और कृषि अर्थव्यवस्था का पड़ता है. यह इलाका मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. यहां के मतदाता विशेष रूप से तालाबों (टैंक) की सिंचाई व्यवस्था की विश्वसनीयता, नारियल और मिश्रित फसलों से होने वाली आय में भरोसा करते हैं. कोंगु जातीय समूहों के एकजुट मतदान को ध्यान में रखकर फैसला करते हैं. सरकारी कल्याण योजनाएं कुछ हद तक असर डालती हैं, लेकिन यहां वोटरों के लिए सबसे अहम मुद्दे खेती की अर्थव्यवस्था और पानी के प्रबंधन होते हैं. इस सीट पर जीत-हार का अंतर आमतौर पर मध्यम और स्थिर रहता है, लेकिन जब पानी की कमी बढ़ जाती है, फसलों की कीमतों में अचानक गिरावट आती है, या तालाबों की देखभाल और मरम्मत की अनदेखी होती है, तब चुनावी रुझान बदल सकते हैं.
इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पोनमलाई वेलायुथस्वामी (मुरुगन) मंदिर है, जो एक प्रमुख तीर्थ स्थान माना जाता है. इस मंदिर का ऐतिहासिक संबंध 15वीं सदी के संत अरुणागिरिनाथर से भी बताया जाता है, जिससे इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता और बढ़ जाती है.
राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो इस क्षेत्र में कुछ खास मतदाता समूह चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं. इनमें सबसे प्रभावशाली और संख्या में अधिक कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय है, जो कई बार चुनावी नतीजे तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है. इसके अलावा नारियल और मिश्रित फसल उगाने वाले किसान, तालाब और कुओं की सिंचाई पर निर्भर किसान, अनुसूचित जाति के कृषि मजदूरों की बस्तियां, हाईवे से जुड़े व्यापारी और परिवहन क्षेत्र के कामगार, तथा डेयरी और पशुपालन से जुड़े परिवार भी महत्वपूर्ण मतदाता समूह हैं.
भौगोलिक स्थिति और संपर्क व्यवस्था के लिहाज से यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां तालाबों से सिंचित गांवों के समूह, नारियल की खेती वाले कृषि क्षेत्र, और भीतरी सूखे इलाके मिलते हैं जो ज्यादातर बोरवेल पर निर्भर रहते हैं. साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) से जुड़े बाजार वाले गांव और सेवा केंद्र भी हैं, जहाँ व्यापार और छोटी आर्थिक गतिविधियां चलती हैं. कुल मिलाकर इस विधानसभा क्षेत्र की बसावट लगभग पूरी तरह ग्रामीण स्वरूप की है.
इस क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण स्थान और स्थानीय केंद्र भी चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं. इनमें पोनमलाई वेलायुथस्वामी (मुरुगन) मंदिर, तालाबों से सिंचित कमांड एरिया वाले गांव, नारियल की खेती वाले मुख्य कृषि बेल्ट, अनुसूचित जाति के मजदूरों की बस्तियां, हाईवे किनारे बसे व्यापारिक गांव, और अंदरूनी सूखे क्षेत्र के छोटे गांव शामिल हैं. इन सभी जगहों के मतदाता खास तौर पर तालाबों की सफाई (डिसिल्टिंग), बोरवेल की गहराई, बिजली आपूर्ति, और नारियल की कीमतों में बदलाव जैसे मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हैं.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में सबसे प्रमुख हैं जिमनें तलाबों की सफाई और जल भंडारण क्षमता बढ़ाना, बोरवेल के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति, नारियल की कीमतों को स्थिर रखना और कीट नियंत्रण, ग्रामीण सड़कों की बेहतर कनेक्टिविटी, गर्मियों में पीने के पानी की उपलब्धता, और सरकारी स्कूलों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की गुणवत्ता में सुधार शामिल है.
मतदाताओं का मूड भी इन मुद्दों से गहराई से जुड़ा रहता है. यहां के मतदाता चाहते हैं कि उनका विधायक पानी से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करने वाला और आसानी से उपलब्ध रहने वाला हो. साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) और कृषि विभाग के साथ नियमित समन्वय भी जरूरी माना जाता है. मतदाता चाहते हैं कि क्षेत्र में तालाबों के पुनर्जीवन और मरम्मत के काम स्पष्ट रूप से दिखाई दें. इसके अलावा गांवों की पारंपरिक पंचायतों और जातीय परिषदों का सम्मान, और सूखे या संकट के समय तुरंत मदद भी विधायक से अपेक्षित है. यदि किसी नेता ने तालाबों पर निर्भर गांवों की समस्याओं को नजरअंदाज किया, तो अक्सर वहां चुपचाप वोटों का नुकसान हो जाता है, जो चुनाव परिणाम पर असर डाल सकता है.
Kuruchi Prabhakaran
DMK
Siva.a
MNM
Umajagadesh.m
NTK
Nota
NOTA
Rohini Ma.pa
AMMKMNKZ
Velusamy.v
IND
Anbazhagan.g
VTVTK
Nagendran.p
IND
Mariappan.r
GPI
Noor Muhamad . A
IND
Dharmalingam.k
IND
Nazir Babu.s
IND
James.s
AIJYMKG
Atheeswaran.s
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.