पल्लदम विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 115) एक खास तरह की कोंगु क्षेत्र की सीट है, जहां चुनाव का परिणाम मुख्य रूप से कोंगु जाति के एकजुट वोट, टेक्सटाइल उद्योग से जुड़ी आय की स्थिरता, और सिंचाई की स्थिति पर निर्भर करता है. यहां सरकारी योजनाएं (वेलफेयर) भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वोटरों के व्यवहार में सबसे ज्यादा असर आर्थिक स्थिरता और जातीय संतुलन का होता है. इस सीट पर जीत का अंतर आमतौर पर बहुत ज्यादा नहीं होता, यानी परिणाम बदल सकता है, खासकर तब जब टेक्सटाइल यूनिट्स धीमी पड़ जाएं या पानी की समस्या बढ़ जाए.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से इस क्षेत्र में कुछ खास वोटर समूह बहुत प्रभावशाली हैं. इनमें सबसे प्रमुख हैं कोंगु वेल्लालर गौंडर, जो संख्या में ज्यादा हैं और चुनावी नतीजों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा टेक्सटाइल उद्योग के मालिक और छोटे जॉब-वर्क यूनिट चलाने वाले, नॉय्यल नदी और नहरों से सिंचित खेती करने वाले किसान, पोल्ट्री और पशुपालन से जुड़े उद्यमी, अनुसूचित जाति (SC) के कृषि और उद्योग में काम करने वाले मजदूर, और शहर के व्यापारी व ट्रांसपोर्ट से जुड़े कामगार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक और कनेक्टिविटी के लिहाज से पल्लदम शहर इस क्षेत्र का मुख्य व्यापार और सेवा केंद्र है. इसके आसपास के इलाकों में टेक्सटाइल और जॉब-वर्क यूनिट्स के क्लस्टर फैले हुए हैं. कुछ गांव नॉय्यल नदी और नहरों से सिंचित हैं, जहां खेती अच्छी होती है, जबकि अंदरूनी सूखे इलाकों में लोग ज्यादा पशुपालन (लाइवस्टॉक) पर निर्भर हैं. इस क्षेत्र की एक खासियत यह भी है कि यहाँ से तिरुप्पुर और कोयंबटूर जैसे बड़े शहरों तक अच्छी सड़क कनेक्टिविटी है, जिससे व्यापार और रोजगार को मदद मिलती है.
इस विधानसभा क्षेत्र के कुछ प्रमुख हैं, टेक्सटाइल जॉब-वर्क और छोटे उद्योगों के इलाके, कोंगु समुदाय वाले कृषि प्रधान गांव, पोल्ट्री और डेयरी क्लस्टर, SC मजदूर बस्तियां, और पल्लादम शहर के वे वार्ड जहां वोट बदल सकते हैं. इन सभी इलाकों में लोगों की प्रतिक्रिया खास तौर पर बिजली की उपलब्धता, पानी की सुविधा, और लागत पर निर्भर करती है.
वोटरों के मुख्य मुद्दों में शामिल हैं, टेक्सटाइल यूनिट्स और खेतों के लिए भरोसेमंद बिजली सप्लाई, पानी की गुणवत्ता और नॉय्यल नदी का प्रदूषण, पोल्ट्री उद्योग में लागत बढ़ना और बीमारियों का नियंत्रण, गांवों की सड़कों की स्थिति, सरकारी स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की गुणवत्ता, और कृषि उत्पादों के दामों की स्थिरता.
वोटरों का मूड भी काफी साफ है, वे चाहते हैं कि उनका विधायक ऐसा हो जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखे और आसानी से उपलब्ध हो. उन्हें उम्मीद रहती है कि विधायक TNEB (बिजली विभाग), PWD (लोक निर्माण विभाग) और स्थानीय निकायों के साथ जल्दी दखल देकर समस्याएँ सुलझाए. साथ ही, यहां के लोग कोंगु जाति की सामाजिक संरचना का सम्मान भी चाहते हैं. जनता को ऐसे काम भी दिखने चाहिए जैसे सड़क, ड्रेनेज और पानी से जुड़े विकास कार्य, और जब उद्योग या खेती में कोई संकट आए तो सरकार और विधायक का सहयोग तुरंत मिले.
Muthurathinam K
DMK
Subramanian S
NTK
Mayilsamy G
MNM
Jothimani R
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Muthurathinam M
IND
Thuyamani R
IND
Annadurai R
BSP
Murugesan K
IND
Antony Mariaraj A
TNLK
Maruthasalam V
IND
Ramesh V
IND
Umanath R
USIP
Vijiyakumar M
IND
Thangaraj A
IND
Muthurathinam L
IND
Sivakumar G
APTADMK
Thinakaran K
ADK
Saratha T
IND
Shahul Hameed M
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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