मेट्टूर तमिलनाडु के सलेम जिले का एक बेहद रणनीतिक और अहम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 85) है. इसकी पहचान कावेरी नदी पर बने मेट्टूर डैम (स्टेनली जलाशय) से जुड़ी है, जो तमिलनाडु की सिंचाई और बिजली व्यवस्था का एक बड़ा आधार माना जाता है. इस सीट की राजनीति में पानी का मुद्दा (हाइड्रो-पॉलिटिक्स), PSU से जुड़ी नौकरियां, थर्मल पावर पर निर्भरता, और डैम के नीचे वाले किसानों की भावनाएं सबसे ज्यादा प्रभाव डालती हैं. इसलिए यह सीट हमेशा हाई-स्टेक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहती है. यहां चुनावी नतीजे अक्सर कावेरी का पानी कब और कितना छोड़ा गया, नौकरी की सुरक्षा, और पर्यावरण व स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं पर निर्भर करते हैं.
इस क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक चरित्र भी काफी खास है. यहां मतदाताओं में कावेरी पर निर्भर किसान, थर्मल पावर प्लांट और PSU (सरकारी उपक्रम) में काम करने वाले कर्मचारी, सीमेंट और केमिकल जैसे उद्योगों के मजदूर, पिछड़ा वर्ग और MBC समुदाय, और शहर व गांवों में रहने वाले SC समुदाय शामिल हैं. यहां चुनाव में असर डालने वाले प्रमुख समूह हैं, किसान संगठन, PSU और बिजली विभाग की यूनियनें, औद्योगिक मजदूर यूनियनें, व्यापारी वर्ग, और स्थानीय निकायों के नेता शामिल है. इस कारण यहां वोटिंग अक्सर मुद्दों पर आधारित और यूनियन के प्रभाव वाली होती है.
भूगोल और कनेक्टिविटी की बात करें तो यह क्षेत्र पश्चिमी सलेम जिले में स्थित है और इसका केंद्र मेट्टूर डैम और स्टेनली रिजर्वायर है. यहां से सलेम और इरोड के लिए सड़क संपर्क मजबूत है, जबकि रेल की भूमिका सीमित मानी जाती है. इस क्षेत्र की चुनौतियों में उद्योगों के भारी ट्रैफिक का दबाव, पर्यावरण पर बढ़ता असर, और शहरी सुविधाओं की कमी शामिल है.
यहां कुछ खास इलाके चुनावी दृष्टि से बहुत निर्णायक हैं, जैसे डैम के आसपास के क्षेत्र, पावर प्लांट की कॉलोनियां, प्रदूषण से प्रभावित रिहायशी इलाके, और कावेरी आयाकट (सिंचाई वाले) गांव. इन्हीं क्षेत्रों से अक्सर मतदान प्रतिशत और स्विंग वोट तय होता है.
मुख्य मुद्दों में सबसे ऊपर है कावेरी के पानी को छोड़ने में पारदर्शिता, फिर PSU और थर्मल प्लांटों में नौकरी की सुरक्षा, प्रदूषण और उससे जुड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं, पीने के पानी की गुणवत्ता, शहरी जलनिकासी और सफाई व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों/स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता, और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं। कुल मिलाकर यहां चुनावी चर्चा में पानी और रोजगार सबसे बड़े मुद्दे बने रहते हैं.
मतदाता मनोभाव (Voter Mood) भी साफ है, किसान चाहते हैं कि पानी की रिलीज नियमित, अनुमानित और भरोसेमंद हो, पावर सेक्टर के कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा और काम के दौरान सुरक्षा (सेफ्टी) को लेकर चिंतित रहते हैं, औद्योगिक मजदूर बेहतर वेतन और स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग करते हैं. महिला मतदाता मुख्य रूप से पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं, जबकि युवा वर्ग तकनीकी कौशल, ट्रेनिंग और स्थायी नौकरी की तलाश में रहता है.
कुल मिलाकर, मेट्टूर के मतदाता उसी नेतृत्व को समर्थन देते हैं जो पानी, रोजगार और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच सही संतुलन बनाकर चल सके.
Srinivasaperumal.s
DMK
Manikandan.c
NTK
Anusuya.p
MNM
Selvan
IND
Nota
NOTA
Ramesh Aravind.m
DMDK
Thangavel. K
DAMK
Ambika.a
IND
Banupriya.p
GPI
Sadhasivam.p
IND
Dr.padmarajan.k
IND
Sekar.p
IND
Rasappan.k
MIDP
Arivazhagan.p
IND
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