सेलम दक्षिण विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 90), सेलम शहर की सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से जागरूक और अपनी स्पष्ट राय रखने वाली सीट मानी जाती है. जहां सेलम उत्तर को श्रमिक वर्ग आधारित और सेलम पश्तिम को प्रशासनिक प्रभाव वाली सीट माना जाता है, वहीं सेलम दक्षिण नेतृत्व की छवि, वैचारिक स्पष्टता और शहरी शासन की विश्वसनीयता पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया देता है. सेलम शहर आम, पायल (एंकलेट) और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, और इस सांस्कृतिक पहचान का असर यहां की राजनीति पर भी दिखाई देता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग काफी विविध लेकिन जागरूक है. इसमें मुख्य रूप से मध्यमवर्गीय परिवार, छोटे और मध्यम व्यापारी, प्रोफेशनल्स और वेतनभोगी कर्मचारी, शिक्षित युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता शामिल हैं. साथ ही मंदिरों से जुड़े हिंदू समुदायों की अच्छी-खासी उपस्थिति है, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय भी मौजूद हैं लेकिन वे प्रभावी या निर्णायक संख्या में नहीं हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र सेलम शहर के दक्षिणी शहरी हिस्से में स्थित है. यहां विकसित रिहायशी इलाके हैं, सड़क संपर्क मजबूत है, और व्यावसायिक गलियारे व मंदिरों के समूह बड़ी संख्या में मौजूद हैं. हालांकि, शहरीकरण के साथ कुछ समस्याएं भी हैं जैसे ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कमी, अतिक्रमण, और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में कोट्टायम मडियम्मन मंदिर, स्थापित मध्यमवर्गीय रिहायशी कॉलोनियां, प्रमुख बाजार और व्यावसायिक सड़कें, शैक्षणिक संस्थानों के इलाके, मंदिर-केंद्रित मोहल्ले और तेजी से विकसित हो रहे अपार्टमेंट क्लस्टर शामिल हैं. इन इलाकों के मतदाता मुख्य रूप से जीवन-स्तर की गुणवत्ता और प्रशासनिक छवि को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों में ट्रैफिक और पार्किंग प्रबंधन, जल निकासी और बाढ़ रोकथाम, सड़कों की गुणवत्ता और शहर की सफाई, व्यापार करने में आसानी और स्पष्ट नियम, कानून-व्यवस्था की स्थिति, सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार मुक्त नगर प्रशासन शामिल हैं.
मतदाता मनोभाव की बात करें तो मध्यम वर्ग सुशासन, कर व्यवस्था और नागरिक अनुशासन को महत्व देता है. व्यापारी स्थिरता और स्पष्ट नियम चाहते हैं. युवा वर्ग रोजगार, बेहतर यातायात सुविधा और आगे बढ़ने के अवसरों पर ध्यान देता है. महिलाएं सुरक्षा, स्वच्छता और सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों को प्राथमिकता देती हैं. धार्मिक मतदाता अपनी परंपराओं के सम्मान की अपेक्षा रखते हैं. सेलम दक्षिण के मतदाता भावनात्मक उथल-पुथल की बजाय स्पष्ट, आत्मविश्वासी और ठोस नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं.
A.s.saravanan
DMK
M.prabu Manikandan
MNM
S.mariamma
NTK
Se.venkatajalam
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
S.murali
BSP
R.sundaram
IND
B.devi
IND
K.selvaraj
IND
Samundeswari.v
IND
R.velmurugan
CPI(ML)(L)
K.n.veerasenan
IND
M.sundar
APoI
Sathiyapriya
RPPRINAT
R.elavarasan
VTVTK
S.saravanan
IND
M.kumar
IND
M.periyasamy
IND
S.raji
DAMK
N.mayakannan
IND
S.krishnakumar
IND
K.yasin Basha
IND
D.m.mohammad Nazeerudeen
IND
K.mariappan
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.