वीरापंडी (विधानसभा क्षेत्र संख्या 91) सलेम शहर के बाहरी हिस्से में स्थित एक अत्यंत सक्रिय और राजनीतिक रूप से जागरूक क्षेत्र है. यहां चुनावी नतीजे मीडिया की बहसों या प्रचार के दिखावे से ज्यादा जातीय समीकरण, सरकारी कल्याण योजनाओं की पहुंच, और शहरी-ग्रामीण जीवन के दबावों से तय होते हैं. इस क्षेत्र में बूथ स्तर की संगठन शक्ति और समुदायों के आपसी नेटवर्क चुनावी माहौल से ज्यादा प्रभावशाली माने जाते हैं.
वीरापंडी अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां स्थित 14वीं सदी का गौमारीअम्मन मंदिर, जिसे पांड्य राजा वीरापांडी ने बनवाया था, एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. हर साल आयोजित होने वाला चित्तिरई उत्सव हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. इसके अलावा पास में स्थित श्री कन्नीस्वरामुदैयार मंदिर, जो पांड्य राजा से जुड़ा माना जाता है, उस कथा के कारण प्रसिद्ध है जिसमें कहा जाता है कि राजा ने यहां पूजा के बाद अपनी दृष्टि वापस पाई थी. यह मंदिर भी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप की बात करें तो यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें गौंडर (कोंगु वेल्लालर) समुदाय प्रभावशाली और निर्णायक भूमिका में है. इसके अलावा दलित कृषि और औद्योगिक मजदूर, ओबीसी सेवा और व्यापार वर्ग, ग्रामीण महिला कल्याण योजना लाभार्थी, शहरी सीमा से जुड़े प्रवासी मजदूर, जातीय बुजुर्ग और गांव के मुखिया, सहकारी समिति के नेता, किसान संघ प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह (SHG) समन्वयक, और स्थानीय ठेकेदार व मध्यस्थ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां मतदान का व्यवहार आमतौर पर व्यक्तिगत संबंधों और निरंतरता पर आधारित होता है, यानी लोग भरोसे और पुराने रिश्तों को महत्व देते हैं.
भौगोलिक और संपर्क व्यवस्था की दृष्टि से वीरापंडी सलेम शहर से लगे परिधीय गांवों का मिश्रण है. यह राज्य राजमार्गों और सहायक सड़कों से जुड़ा हुआ है. यहां खेती योग्य भूमि और औद्योगिक क्षेत्र दोनों मौजूद हैं. हालांकि कई गांवों में संकरी सड़कें, पानी की कमी, औद्योगिक कचरे की समस्या और असमान नागरिक सुविधाएं जैसी चुनौतियां भी हैं.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों या हॉटस्पॉट्स में 14वीं सदी का गौमारीअम्मन मंदिर, श्री कन्नीस्वरामुदैयार मंदिर, वीरापांडी टाउन पंचायत, आसपास के कृषि प्रधान गांव, परिधीय शहरी आवासीय कॉलोनियां, और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं. हर इलाके की अलग सामाजिक और आर्थिक स्थिति होने के कारण यहां अलग-अलग मुद्दों पर अलग संदेश देने की जरूरत होती है.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता, किसानों को फसलों का उचित समर्थन मूल्य, सड़कों और संपर्क मार्गों का सुधार, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, रोजगार की निरंतरता, सरकारी अस्पतालों तक आसान पहुंच, और कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल हैं.
मतदाताओं का वर्तमान रुझान भी वर्ग के अनुसार अलग है. किसान जल सुरक्षा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सब्सिडी चाहते हैं. महिलाएं राशन, नकद सहायता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देती हैं. युवा स्थानीय रोजगार और कौशल प्रशिक्षण के अवसर चाहते हैं. दलित समुदाय सम्मान, समान पहुंच और सुरक्षा को अहम मुद्दा मानता है. वहीं बुजुर्ग मतदाता निरंतरता और परिचित नेतृत्व को महत्व देते हैं.
वीरापंडी एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां सामाजिक संतुलन, स्थानीय नेटवर्क और जमीनी मुद्दे चुनावी परिणाम तय करते हैं.
Tharun, A.k.
DMK
Rajeshkumar, S.
NTK
Selvam, S.k.
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Amutha, R.
IJK
Mohan, V.
IND
Chinnanann, M.
BSP
Venkat, A.
IND
Senthilmurugan, E.
IND
Rajarathinam, K.
IND
Indrajith Guptha
IND
Sekar, M.
IND
Mani, M.
MIDP
Mohan, P.
SUCI
Sathiyavani
DAMK
Senthilkumar, J.
IND
Prabakaran, P.
VTVTK
Vaithi, M.
IND
Manikandan, S.
AIJYMKG
Ramesh, C.
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.