वालपराई विधानसभा क्षेत्र (संख्या 124) एक विशिष्ट पहाड़ी क्षेत्र है, जहां चुनावी राजनीति आमतौर पर कृषि उत्पादों की कीमतों से कम और चाय बागान के मजदूरों के कल्याण, जंगल-मानव संपर्क से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक पहुंच जैसे विषयों से अधिक प्रभावित होती है. यहां मतदाताओं का व्यवहार आम तौर पर स्थिर रहता है, लेकिन रोजगार की सुरक्षा, वन्यजीवों के साथ टकराव, और चाय बागानों के प्रबंधन से जुड़ी नीतियों के प्रति भावनात्मक रूप से काफी संवेदनशील होता है. चुनावों में जीत-हार का अंतर अक्सर बहुत बड़ा नहीं होता, बल्कि मध्यम रहता है. कई बार अचानक बदलाव तब देखने को मिलते हैं जब चाय बागानों में मजदूरों की छंटनी हो जाए, वन्यजीवों के हमले की घटनाएं बढ़ जाएं, पहाड़ी सड़कों को बंद करना पड़े, या राशन और पेंशन जैसी सरकारी सुविधाओं में रुकावट आ जाए.
वालपराई अपनी हरी-भरी चाय बागानों, धुंध से ढके पहाड़ी नजारों और इंदिरा गांधी वन्यजीव अभयारण्य के लिए बेहद प्रसिद्ध है. यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशाल शोलायर डैम, और खूबसूरत व्यू पॉइंट जैसे नल्लामुडी और लोम शामिल हैं, जहां से आसपास की पहाड़ियों और चाय बागानों का शानदार दृश्य दिखाई देता है.
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से इस क्षेत्र में कुछ प्रमुख मतदाता समूह काफी प्रभावशाली हैं. इनमें सबसे बड़ा वर्ग चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों का है, जिनमें अधिकांश तमिल मूल के प्रवासी श्रमिक परिवारों के वंशज हैं. इसके अलावा जंगल के किनारे रहने वाले आदिवासी समुदाय, बागानों पर निर्भर सेवा क्षेत्र के परिवार, छोटे व्यापारी, ड्राइवर और पर्यटन से जुड़े कामगार, तथा सरकारी कल्याण योजनाओं पर निर्भर महिलाओं द्वारा संचालित परिवार भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक और संपर्क की दृष्टि से वलपाराई एक ऊंचाई पर स्थित पहाड़ी क्षेत्र है, जहां बड़े-बड़े चाय बागान और मजदूरों की बस्तियां (लेबर लाइन्स) फैली हुई हैं. कई गांव और बस्तियां घने जंगलों से घिरी हुई हैं, जो अक्सर हाथियों के आवागमन के रास्तों (एलिफेंट कॉरिडोर) के आसपास स्थित हैं. यहां का मुख्य शहरी केंद्र सिर्फ वलपाराई नगर है, जबकि बाकी इलाके काफी हद तक ग्रामीण और बागान आधारित हैं. इस क्षेत्र तक पहुंच मुख्य रूप से घाट सड़कों और जंगल से गुजरने वाले रास्तों पर निर्भर करती है, जहां कई बार समय की पाबंदियां और वन विभाग के नियम लागू होते हैं. इसके अलावा भारी मानसून बारिश के कारण यहां अक्सर सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और संपर्क व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
इस क्षेत्र के कुछ खास संवेदनशील स्थान या “हॉटस्पॉट” भी हैं, जिनका चुनावी और सामाजिक महत्व अधिक है. इनमें इंदिरा गांधी वन्यजीव अभयारण्य, शोलायर डैम, बड़े-बड़े चाय बागानों की मजदूर बस्तियां, जंगल के किनारे स्थित आदिवासी गांव, वलपाराई शहर के वार्ड, पर्यटन से जुड़े सड़क किनारे के छोटे कस्बे, और दूरस्थ आंतरिक बागान क्षेत्र शामिल हैं. इन सभी इलाकों में लोग खास तौर पर मजदूरी दर, बागान आवास की स्थिति, वन्यजीवों के हमले, सड़क आवागमन के नियम, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, और राशन वितरण जैसे मुद्दों पर बहुत संवेदनशील प्रतिक्रिया देते हैं.
वालपराई में मुख्य स्थानीय मुद्दों में चाय बागान मजदूरों की मजदूरी की सुरक्षा और उनके PF तथा ESI जैसी सुविधाओं का सही वितरण, मजदूर कॉलोनियों में आवास, पीने के पानी और स्वच्छता की व्यवस्था, हाथियों और तेंदुओं जैसे वन्यजीवों के साथ टकराव होने पर मुआवजा, घाट सड़कों के उपयोग के समय और आपातकालीन स्थिति में अनुमति, सरकारी अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता, तथा दूरस्थ बागानों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के राशन की नियमित आपूर्ति जैसे मुद्दे प्रमुख हैं.
मतदाताओं की अपेक्षाओं की बात करें तो यहां के लोग चाहते हैं कि उनका विधायक लगातार क्षेत्र में मौजूद, आसानी से मिलने वाला और संकट के समय तुरंत कार्रवाई करने वाला हो. साथ ही विधायक को वन विभाग, श्रम विभाग और राजस्व विभाग के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करना चाहिए ताकि स्थानीय समस्याओं का जल्दी समाधान हो सके. वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं में त्वरित मुआवजा मिलना भी लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके अलावा लोग चाहते हैं कि चाय बागानों के प्रबंधन द्वारा मनमाने फैसलों से मजदूरों की सुरक्षा हो, और कठिन पहाड़ी भूगोल के बावजूद सरकारी कल्याण योजनाएं और सुविधाएं नियमित और भरोसेमंद तरीके से पहुंचती रहें.
Arumugam M
CPI
Kohila C
NTK
Senthilraj D
MNM
Nota
NOTA
Murugaraj M S
DMDK
Rangasamy T M
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.