तिरुप्पुर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र (No. 113) एक महत्वपूर्ण शहरी और औद्योगिक सीट मानी जाती है, जहां चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं. यहां चुनावी नतीजे अक्सर निर्यात उद्योग के भरोसे, श्रमिकों की स्थिरता और कोंगु क्षेत्र के व्यापारिक वर्ग की सोच पर निर्भर करते हैं. सरकारी कल्याण योजनाओं की मौजूदगी जरूर दिखती है, लेकिन यहां के मतदाताओं के फैसलों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले मुद्दे रोजगार, बिजली की उपलब्धता, उद्योगों पर नियमों का दबाव (compliance pressure) और वैश्विक टेक्सटाइल बाजार के उतार-चढ़ाव होते हैं. इस सीट पर जीत का अंतर आमतौर पर बहुत कम रहता है और परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदल सकता है, खासकर जब निर्यात में मंदी या मजदूरों से जुड़े विवाद (labour unrest) जैसी स्थितियां पैदा होती हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से देखें तो इस क्षेत्र में कई प्रभावशाली मतदाता समूह मौजूद हैं. इनमें प्रमुख हैं कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय के उद्यमी, जो मुख्य रूप से निटवेयर उद्योग के मालिक हैं. इसके अलावा टेक्सटाइल से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योग (SME) के मालिक और जॉब वर्क करने वाले व्यवसायी, बड़ी संख्या में अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर, जो भले ही मतदान में कम हिस्सेदारी रखते हों लेकिन उनका माहौल और भावना सामाजिक माहौल को प्रभावित करती है. इसके साथ ही शहरी कामकाजी वर्ग, निजी क्षेत्र के कर्मचारी, शहरी इलाकों में रहने वाले अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के लोग, और व्यापारी व सेवा क्षेत्र से जुड़े मतदाता भी यहां की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक और संपर्क व्यवस्था की बात करें तो यह क्षेत्र मुख्य रूप से तिरुप्पुर शहर के घनी आबादी वाले शहरी वार्डों से मिलकर बना है. यहां निटवेयर उद्योग के बड़े क्लस्टर, जॉब वर्क करने वाली इकाइयों के इलाके, मजदूरों की आवासीय कॉलोनियां, व्यापारिक बाजार और लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्र मौजूद हैं. इस क्षेत्र में कृषि का प्रभाव बहुत कम है, क्योंकि यह लगभग पूरी तरह शहरी और औद्योगिक ढांचे पर आधारित है. यहां मतदान के रुझान भी अक्सर फैक्ट्री क्लस्टरों और औद्योगिक इलाकों के अनुसार बदलते हैं, यानी जिस इलाके में जिस तरह का उद्योग या मजदूर समुदाय अधिक है, वहां का मतदान व्यवहार भी उसी के अनुसार प्रभावित होता है.
इस क्षेत्र के कुछ प्रमुख हॉटस्पॉट भी हैं जो चुनावी माहौल को तेजी से प्रभावित करते हैं. इनमें निटवेयर निर्माण वाले औद्योगिक बेल्ट, जॉब वर्क और डाइंग यूनिट वाले इलाके, उद्योगपतियों के आवासीय क्षेत्र, मजदूरों की रिहायशी कॉलोनियां और ऐसे शहरी वार्ड जहां सेवा क्षेत्र के कर्मचारी रहते हैं शामिल हैं. इन इलाकों में बिजली कटौती, सरकारी जांच या नियमों के पालन को लेकर छापे (compliance raids), जीएसटी का दबाव या निर्यात से जुड़े संकेत मिलते ही लोगों की प्रतिक्रिया तुरंत देखने को मिलती है और इसका सीधा असर चुनावी माहौल पर पड़ता है.
मुख्य स्थानीय मुद्दों में सबसे पहले बिजली की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति तथा बिजली दरों की स्थिरता शामिल है, क्योंकि उद्योगों के लिए यह बेहद जरूरी है. इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियम और उनका पालन करने का दबाव, जीएसटी और श्रम कानूनों का कड़ाई से लागू होना, निर्यात में मंदी और ऑर्डर की अनिश्चितता, तथा शहरी बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़कें, ड्रेनेज और पानी की आपूर्ति भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. साथ ही सस्ते आवास और मजदूरों के लिए कल्याण योजनाएं भी यहां के लोगों की प्राथमिकताओं में शामिल हैं.
मतदाताओं की सोच और अपेक्षाओं की बात करें तो यहां के लोग चाहते हैं कि उनका विधायक उद्योगों के लिए आसानी से उपलब्ध और संवाद करने वाला हो. उद्योगों से जुड़े मुद्दों को तमिलनाडु बिजली बोर्ड (TNEB), तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) और श्रम विभाग जैसे विभागों के साथ मिलकर जल्दी सुलझाने की क्षमता हो. इसके साथ ही उद्योगों पर लागू नियम स्थिर, स्पष्ट और बिना अनावश्यक परेशान करने वाले होने चाहिए. लोग यह भी उम्मीद करते हैं कि औद्योगिक इलाकों के आसपास सड़क, ड्रेनेज और अन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो. खास तौर पर जब निर्यात में गिरावट या उद्योगों पर संकट का समय आता है, तब विधायक से समर्थन और समाधान देने वाली भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है.
Ravi (alias) Subramanian . M
CPI
Easwaran.s
NTK
Sivabalan.s
MNM
Selvakumar.m
DMDK
Nota
NOTA
Alaghusundaram.p
ADK
Chandrasekaran.r
BSP
Senthilkumar.v
APTADMK
Rangasamy.m
IND
Udhayakumar.s
IND
Senthilvel.a
IND
Muruga Pandi.s
IND
Deivasigamani.k
ETMK
Senthilkumar.r
IND
Senthilkumar.t.n
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
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स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
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