पेन्नागरम धर्मपुरी जिले की एक प्रमुख रूप से ग्रामीण विधानसभा सीट (संख्या 58) है. यह इलाका सूखी खेती, जंगल से सटे गांवों, पहाड़ी-वन क्षेत्र की बसावटों और बड़ी आदिवासी आबादी के लिए जाना जाता है. यहां चुनावी नतीजे ज्यादातर पानी की सुरक्षा, जंगल तक पहुंच और वन अधिकार, सरकारी योजनाओं की सही डिलीवरी, और लोगों की रोजी-रोटी की स्थिरता जैसे मुद्दों पर निर्भर करते हैं. इसलिए यह सीट पूरी तरह जमीनी मुद्दों से चलने वाली और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है. नहर-आधारित इलाकों की तरह यहां राजनीति नहर के पानी पर नहीं टिकती, बल्कि बारिश, तालाब/टैंक, जंगल और सरकारी योजनाओं की पहुंच के इर्द-गिर्द घूमती है.
इस सीट के मतदाताओं में BC और MBC की कृषि आधारित समुदायों के लोग, SC के गांवों व बस्तियों के समूह, जंगल और पहाड़ी गांवों में रहने वाली ST (आदिवासी) आबादी, छोटे किसान और खेतिहर मजदूर शामिल हैं. यहां राय बनाने वाले और प्रभावशाली लोग आमतौर पर पंचायत स्तर के नेता, आदिवासी बुज़ुर्ग, कोऑपरेटिव/सहकारी समितियों के पदाधिकारी, SHG (स्वयं सहायता समूह) की समन्वयक महिलाएं, शिक्षक, और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं. मतदान व्यवहार अक्सर समुदाय आधारित, कल्याणकारी योजनाओं से प्रभावित, और गांव-केंद्रित होता है.
भौगोलिक रूप से यह सीट धामरपुरी जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित है. इसमें जंगल क्षेत्र, पहाड़ी इलाका, और कई अंदरूनी (इंटीरियर) गांव आते हैं. लोगों की आवाजाही काफी हद तक राज्य राजमार्गों (State Highways) और ग्रामीण सड़कों पर निर्भर रहती है. यहां रेल कनेक्टिविटी सीमित है. बड़ी चुनौतियों में अंदरूनी इलाकों की कमजोर सड़क कनेक्टिविटी, मानसून के दौरान कुछ गांवों का कट जाना, और सार्वजनिक परिवहन का कम और अनियमित होना शामिल है.
इस सीट के कुछ “हॉटस्पॉट” क्षेत्र चुनावी माहौल और टर्नआउट पर खास असर डालते हैं. इनमें जंगल से सटे आदिवासी गांव, पानी की भारी कमी वाले सूखे बेल्ट, SC कॉलोनियां जहां बुनियादी ढांचे की कमी है, और अंदरूनी सड़क-विहीन वाले छोटे हमलेट शामिल हैं. इन्हीं इलाकों से कई बार मतदान प्रतिशत और सत्ता विरोधी माहौल के संकेत भी मजबूत होकर निकलते हैं.
मतदाता मनोभाव की बात करें तो किसानों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा पानी की पक्की व्यवस्था और फसल की सुरक्षा है. आदिवासी समुदाय के लिए वन अधिकार, सम्मान, और जंगल से जुड़े जीवन पर फैसलों में उनकी हिस्सेदारी बहुत महत्वपूर्ण है. मजदूर वर्ग स्थायी काम, मनरेगा जैसे रोजगार, और सरकारी सहायता का सही समय पर मिलना चाहता है. महिलाओं की प्राथमिकताएं पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, और पेंशन जैसी सुविधाएं हैं. वहीं युवा वर्ग कौशल प्रशिक्षण (skills), और अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर चाहता है. कुल मिलाकर पेन्नागरम के मतदाता ऐसे नेता को पसंद करते हैं जो आसानी से मिलने वाला, संवेदनशील, और जमीनी स्तर पर लगातार मौजूद रहने वाला हो.
Inbasekaran. P.n.p
DMK
Tamilazhagan. R
NTK
Uthayakumar. R
DMDK
Periyananjappan. A
IND
Nota
NOTA
Shakila. K
MNM
Thirumurugan. P
IND
Munusamy. S
IND
Moorthi. S
BSP
Dharuman. K
IND
Mani. K.g.
IND
Annadurai. C
DMSK
Annadurai. V
IND
Mani. P
IND
Sivalingam. N
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.