भवानी विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 107) नीलगिरि लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से एक बड़े धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, जिसे “दक्षिणा प्रयाग” कहा जाता है. यहां दक्षिण भारत का त्रिवेणी संगम माना जाता है, जहां भवानी, कावेरी और अदृश्य अमुधम नदियां मिलती हैं. इस संगम स्थल के कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां स्थित प्राचीन संगमेश्वरर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. इसके अलावा यह क्षेत्र अपने व्यस्त कालीन (कारपेट) उद्योग और वस्त्र उत्पादन के लिए भी जाना जाता है. विशेष रूप से यहां बनने वाली पारंपरिक भवानी जमक्कलम (फर्श पर बिछाई जाने वाली चटाइयाx) पूरे तमिलनाडु में प्रसिद्ध हैं.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र कृषि प्रधान है. यहां के किसान मुख्य रूप से गन्ना, हल्दी, केला और धान की खेती करते हैं. कावेरी और भवानी नदियों की सिंचाई व्यवस्था पर यहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर करती है, इसलिए इसे नदी-आधारित अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र भी कहा जाता है. कृषि के साथ-साथ यहां टेक्सटाइल और हैंडलूम उद्योग, छोटे व्यापारी, राइस मिल और शुगर मिल भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. सामाजिक रूप से मतदाता अपेक्षाकृत मध्यम रूप से परंपरावादी (कंजरवेटिव) माने जाते हैं और यह एक कैडर-प्रभावित विधानसभा क्षेत्र है, जहां संगठित पार्टी ढांचे का प्रभाव चुनावों में साफ दिखाई देता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में संगमेश्वरर मंदिर, सक्रिय कालीन उद्योग और वस्त्र उत्पादन केंद्र शामिल हैं. मतदाताओं की सोच की बात करें तो यहां लोग स्थानीय नेतृत्व और सामुदायिक प्रभाव का गहरा सम्मान करते हैं. सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की सराहना तो की जाती है, लेकिन चुनावों में किसानों से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक प्रभाव डालते हैं.
मुख्य स्थानीय समस्याओं में कावेरी जल बंटवारा और सिंचाई नहरों का प्रबंधन, गन्ने का उचित मूल्य और शुगर मिलों द्वारा भुगतान में देरी, तथा मानसून के दौरान बाढ़ नियंत्रण प्रमुख मुद्दे हैं. मतदाताओं का रुझान ऐतिहासिक रूप से AIADMK और DMK गठबंधनों के बीच कड़े मुकाबले का रहा है. महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच आवाजाही में सुविधा हुई है. साथ ही, राशन वितरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं की पहुंच में सुधार देखा गया है. हालांकि, गन्ना किसानों को भुगतान में देरी अब भी चिंता का विषय है. रोजगार के बेहतर अवसरों की तलाश में युवा वर्ग का तिरुप्पुर और कोयंबटूर जैसे शहरों की ओर पलायन भी बढ़ रहा है. इसके अलावा, क्षेत्र में बेहतर बाढ़ नियंत्रण ढांचे की मांग लगातार उठाई जा रही है.
Durairaj.k.p
DMK
Sathya.m
NTK
Sadhanandham.k
MNM
Nota
NOTA
Satheesh Kumar.p
IND
Radhakrishnan.m
AMMKMNKZ
Ammasai.k
KDMMK
Gopal.m
BSP
Perumal.v.m
IND
Janarthanam.r.p
TMTHK
Stanley.g
IND
Karthikeyan.p
IND
Abdul Kadher.a
IND
Appichi.t.k
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.