धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां गौरी चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होने लगती हैं. भक्तों का विश्वास है कि इससे संतान सुख की प्राप्ति में भी सहायता मिलती है. साथ ही, नियमित रूप से चालीसा का पाठ करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
॥ दोहा ॥
मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान।
गौरी मां मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधि न जानती,पर श्रद्धा है अपार।
प्रणाम मेरा स्वीकारिये,हे मां प्राण आधार।
॥ चौपाई ॥
नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरणागत न कभी घबराता, गौरी उमा शंकरी माता।
आपका प्रिय है आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल क्लेश मिटाओ।
सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मो से कभी हटूं ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।
हे मां भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहूं, ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।
परम आराध्या आप हो मेरी, फिर क्यों वर में इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोडे़ में बरकत भर दीजियो।
अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।
देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर मैं पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।
हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी मां आप स्नेह दिखलावे, निराश मन में आस जगावे।
शिव भी आपका काहा ना टाले, दया दृष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान, जग में पाए मान सम्मान।
सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया दृष्टि जब मां डाले, भव सागर से पार उतारे।
जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।
सात गुण की हो दाता आप, हर इक मन की ज्ञाता आप,
काटो हमरे सकल क्लेश, निरोग रहे परिवार हमेशा।
दुख संताप मिटा देना मां, मेघ दया के बरसा देना मां,
जबही आप मौज में आय, हठ जय मां सब विपदाएं।
जिस पे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।
अवगुण दृष्टि मेरे ढक देना मां, ममता आंचल कर देना मां,
कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।
बिन पाऊ न गुन मां तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम, सब धामो को मां प्राणम।
आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण में आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।
संतोष धन से दामन भर दो, असम्भव को मां सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।
आपकी महिमा अति निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनोकामना पुरन करती, मन की दुविधा पल मे हरती।
चालीसा जो भी पढें सुनाया, सुयोग वर वरदान में पाए,
आशा पूर्ण कर देना मां, सुमंगल साखी वर देना मां।
॥ दोहा ॥
गौरी मां विनती करूं, आना आपके द्वार।
ऐसी मां कृपा किजिये, हो जाए उद्धार।
हीं हीं हीं शरण में, दो चरणों का ध्यान।
ऐसी मां कृपा कीजिये, पाऊं मान सम्मान।
-------समाप्त-------