उथंगाराय विधानसभा क्षेत्र (संख्या 51) तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है. यह क्षेत्र उत्तर तमिलनाडु का एक ऐसा इलाका है जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी दोनों तरह की विशेषताओं को दर्शाता है. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और मजदूरी पर आधारित है. अम्बूर या वानीयाम्बाड़ी जैसे इलाकों के विपरीत, जहां राजनीति पर निर्यात उद्योगों का प्रभाव ज्यादा होता है, उथंगाराय की राजनीति मुख्य रूप से जमीन की उपलब्धता, सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलना, ग्रामीण रोजगार, जातिगत समीकरण और स्थानीय प्रशासन की विश्वसनीयता पर निर्भर करती है. यहां के मतदाता खास तौर पर सरकारी योजनाओं के सही तरीके से लागू होने, लोगों की समस्याओं के समाधान और स्थानीय नेताओं की मौजूदगी को देखकर वोट करते हैं, न कि सिर्फ विचारधारा (आइडियोलॉजी) के आधार पर.
इस क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक बनावट भी काफी खास है. यहां के मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक भूमिका अनुसूचित जाति समुदाय की है. इसके अलावा पिछड़ा वर्ग (BC) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC) के किसान समूह, छोटे और सीमांत किसान, खेती से जुड़े मजदूर और दिहाड़ी कामगार, ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य, और युवा वर्ग, जो सरकारी नौकरियों, स्किल योजनाओं या बाहर काम (माइग्रेशन) पर निर्भर हैं, शामिल हैं. यहां राय बनाने वाले प्रमुख लोग होते हैं जैसे पंचायत अध्यक्ष और वार्ड सदस्य, स्थानीय जाति नेता और सामुदायिक आयोजक, महिला SHG समन्वयक, सहकारी समिति के प्रमुख, और स्कूल शिक्षक तथा VAO (Village Administrative Officer) स्तर के नेटवर्क.
भौगोलिक रूप से उथंगरई कृष्णगिरी और धर्मपुरी जिलों के बीच स्थित है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से राज्य राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों से जुड़ा हुआ है, जबकि रेल सुविधा बहुत सीमित है, इसलिए यहां के लोग सड़क परिवहन पर ज्यादा निर्भर हैं. कुछ हिस्सों में जंगल और पहाड़ी इलाकों की नजदीकी भी देखने को मिलती है, जिससे यहां की जीवनशैली और जरूरतें प्रभावित होती हैं. इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों में उथंगरई नगर, आसपास के राजस्व गांव, कृषि आधारित बस्तियां, पहाड़ी इलाकों के पास बसे गांव, और SC समुदाय की कॉलोनियां शामिल हैं. यहां के प्रमुख पर्यटन और दर्शनीय स्थल हैं क्रिस्टुकुला आश्रम, रामनाथस्वामी मंदिर, और सथानूर जलाशय (Reservoir), जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. हर गांव या इलाके की अपनी अलग-अलग समस्याएं हैं, इसलिए यहां चुनाव प्रचार भी स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर अलग-अलग तरीके से करना पड़ता है.
इस क्षेत्र की मुख्य समस्याओं में पीने के पानी की कमी और उसकी गुणवत्ता, अनियमित रोजगार और मजदूरी की अस्थिरता, खराब ग्रामीण सड़कें, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, स्कूलों की गुणवत्ता और उच्च शिक्षा तक पहुंच, और SC कॉलोनियों में आवास, सफाई और जल निकासी (ड्रेनेज) की समस्याएं शामिल हैं. यहां अगर सरकारी योजनाओं का सही लाभ लोगों तक नहीं पहुंचता, तो यह सीधे तौर पर मतदाताओं की नाराजगी में बदल जाता है.
मतदाताओं की सोच (वोटर मूड) को देखें तो SC समुदाय के लोग सम्मान (dignity), घर, पानी और योजनाओं के लाभ को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. किसान सिंचाई सुविधा, MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी और खेती के लिए सब्सिडी चाहते हैं. महिलाएं खासकर पानी की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाएं और पेंशन पर ध्यान देती हैं. वहीं युवा वर्ग नौकरी, स्किल ट्रेनिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग की मांग करता है. बुजुर्ग लोग पेंशन और स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं. कुल मिलाकर, उथंगाराय के मतदाता ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो आसानी से उपलब्ध हों, लोगों के बीच दिखें और उनकी समस्याओं को वास्तव में हल करें.
S.arumugam
INC
Elangovan
NTK
R.bakyaraj
DMDK
Nota
NOTA
K.murugesan
MNM
Nagaraj
BSP
C.jayaraman
IND
R.vivekanandhan
IND
S.perumal
APTADMK
T.tamilarasan
IND
R.manjunathan
IND
M.thenmozhi
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
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डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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