कोयंबटूर नॉर्थ (विधानसभा क्षेत्र संख्या 118) एक पूरी तरह शहरी और राजनीतिक रूप से जागरूक सीट है, जहां चुनाव का नतीजा बड़े-बड़े विचारों से ज्यादा शहर के रोजमर्रा के कामकाज पर निर्भर करता है. यहां के मतदाता खासकर मिडिल क्लास की सेवाओं की उम्मीदें, अल्पसंख्यक समुदायों का एकजुट वोट, और कामगार वर्ग के भरोसे को ध्यान में रखकर वोट करते हैं. विचारधारा की मौजूदगी तो है, लेकिन असल में जीत-हार इस बात से तय होती है कि शहर की दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को कितना अच्छी तरह संभाला गया. यहां चुनावी अंतर अक्सर बहुत कम रहता है और परिणाम जल्दी बदल सकते हैं, क्योंकि पानी, ट्रैफिक, सफाई, कानून-व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे सीधे वोटिंग को प्रभावित करते हैं.
इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक बनावट में कई महत्वपूर्ण वोटर समूह शामिल हैं, जैसे शहरी मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और कारोबारी (थोक और खुदरा बाजारों से जुड़े लोग), मुस्लिम समुदाय (जो कुछ इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं), अनुसूचित जाति (SC) के शहरी बस्तियों में रहने वाले लोग, दिहाड़ी मजदूर और कामगार वर्ग, और छात्र व युवा मतदाता.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र शहर के घने वार्डों, व्यापारिक बाजार क्षेत्रों और मिश्रित उपयोग वाली सड़कों, पुरानी रिहायशी कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों और पुनर्विकसित आवासों से मिलकर बना है. यहां उद्योग सीमित है, इसलिए पूरे क्षेत्र का राजनीतिक माहौल काफी हद तक शहर के प्रबंधन पर निर्भर करता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख हॉटस्पॉट्स में मरुधमलाई अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के आसपास का इलाका, आदियोगी शिव प्रतिमा तक आसान पहुंच, बाजार और व्यापारियों के इलाके, अल्पसंख्यक बहुल मोहल्ले, मिडिल क्लास रिहायशी कॉलोनियां, SC बस्तियां, और मिश्रित शहरी वार्ड शामिल हैं. इन सभी क्षेत्रों में अगर शहर की सेवाओं में कोई गड़बड़ी होती है या कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो मतदाता तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं.
यहां के मुख्य मुद्दों में पीने के पानी और सीवरेज की समस्या, ट्रैफिक जाम और पार्किंग, कचरा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और रात की सुरक्षा, सरकारी अस्पतालों तक पहुंच, और महंगाई व जीवन-यापन की बढ़ती लागत शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड साफ है, उन्हें ऐसा विधायक चाहिए जो प्रशासनिक रूप से सक्षम हो, नगर निगम और पुलिस के साथ मजबूत तालमेल रखे, लोगों की शिकायतों का जल्दी समाधान करे, व्यापारियों और अल्पसंख्यकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करे, और शहर में किसी भी संकट के समय जमीन पर मौजूद दिखे. अगर शहर की सेवाएं खराब होती हैं, तो मतदाता तुरंत नाराज होकर चुनाव में इसका असर दिखा देते हैं.
Shanmugasundaram V.m
DMK
Thangavelu R
MNM
Balendran C.b
NTK
Nota
NOTA
Appathurai N.r
AMMKMNKZ
Durairaj K
TNLK
Balamurugan M
IND
Keerthiga Parthasarathi
IND
Balaji V
IND
Maharishi Mandharacsalam
IND
Navamani R
IND
Loganathan M
IND
Arul Murugan A
IND
Panneer Selvaraj M
NGPP
Kannapiran V
DRMRPMKKC
Kumar G.d.k
IND
Rajkumar M.p
MKLMNTRAPR
Shanmugasundaram K
IND
Dalit. Su. Jeyaraj
IND
Rameshkumar D
IND
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.
तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने का जोखिम, नए चेहरों पर भरोसा और एक गहरा राजनीतिक संदेश. विजय की चुनावी शुरुआत लीक से बिल्कुल हटकर है. मगर इस रणनीति के केंद्र में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या उनकी लोकप्रियता वास्तव में चुनावी जीत दिला पाएगी.
तमिलनाडु में डीएमके ने महिलाओं के लिए 8000 रुपये का कूपन देने का वादा किया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि कूपन इसलिए दिया जा रहा है ताकि लोग अपनी पसंद के अनुसार घरेलू सामान खरीद सकें. पार्टी की डिप्टी जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि यह मेनिफेस्टो पूरी तरह से लोगों से बातचीत और उनके सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है.