BJP
CPI(M)
JSP
IND
IND
नोटा
NOTA
IND
AAP
JSJD
DJP
BHDRP
BSP
IND
IND
Bihar Election Result 2025 Live: हायाघाट विधानसभा सीट पर BJP को दोबारा मिली जीत
Bihar Assembly Election Results 2025 Live: दिग्गज कैंडिडेट्स के क्या हैं हाल?
Hayaghat Election Results 2025 Live: हायाघाट सीट पर उलटफेर! CPI(M) भारी अंतर से पीछे
Hayaghat Vidhan Sabha Result Live: हायाघाट विधानसभा सीट पर BJP विशाल जीत की ओर! जानिए CPI(M) कितना पीछे?
Hayaghat Vidhan Sabha Chunav Result Live: बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Hayaghat Election Result 2025 Live: हायाघाट का रिजल्ट जानना है? यहां मिलेगा हर अपडेट
हायाघाट, दरभंगा जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है. इसकी स्थापना वर्ष 1967 में हुई थी और अब तक यहां 14 विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं. यह सीट हायाघाट प्रखंड और बहेरी प्रखंड के 18 ग्राम पंचायतों से मिलकर बनी है। हायाघाट, समस्तीपुर (अनुसूचित जाति) संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है.
पूरा क्षेत्र ग्रामीण है, यहां कोई भी शहरी मतदाता पंजीकृत नहीं है. हायाघाट सड़क मार्ग से उत्तर-मध्य बिहार के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. जिला मुख्यालय दरभंगा की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है. समस्तीपुर 29 किलोमीटर दक्षिण में, रोसड़ा 43 किलोमीटर, मधुबनी 57 किलोमीटर और मुजफ्फरपुर लगभग 84 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है. राज्य की राजधानी पटना हायाघाट से लगभग 175 किलोमीटर दूर है.
हायाघाट का चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का दबदबा रहा और 1967 से 1972 तक लगातार तीन बार पार्टी ने जीत दर्ज की. कांग्रेस के बलेश्वर राम तीन बार यहां से विजयी रहे और सबसे सफल उम्मीदवार साबित हुए. इसके बाद राजनीति में बदलाव आया और राजद के हरिनंदन यादव ने दो बार जीत हासिल की. अमरनाथ गामी ने 2010 में भाजपा से और 2015 में जदयू से जीत दर्ज की. अब तक कांग्रेस, जनता दल, भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी- सभी ने दो-दो बार यह सीट जीती है, जबकि जनता पार्टी और जदयू ने एक-एक बार कब्जा जमाया है.
2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामचंद्र प्रसाद ने राजद के भोला यादव को 10,252 मतों से हराया. इससे पहले 2015 में महागठबंधन की ओर से जदयू के अमरनाथ गामी ने लोजपा के रमेश चौधरी को 33,231 वोटों से पराजित किया था.
2024 के लोकसभा चुनाव में लोजपा (रामविलास) की उम्मीदवार सम्भावी ने हायाघाट खंड में 14,870 मतों की बढ़त बनाई. हालांकि यह बढ़त 2019 के 25,384 वोटों की तुलना में कम रही, लेकिन एनडीए ने अपनी स्थिति बनाए रखी.
2020 विधानसभा चुनाव में यहां कुल 2,42,053 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 40,713 (16.82%) अनुसूचित जाति और 41,875 (17.30%) मुस्लिम मतदाता थे. यादव मतदाताओं की संख्या 29,046 रही, जो कुल का लगभग 12% है. 2024 तक मतदाता संख्या बढ़कर 2,55,322 हो गई. मतदान प्रतिशत हमेशा 56 से 59 प्रतिशत के बीच रहा है, 2020 में 59.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
हायाघाट का भूभाग समतल और उपजाऊ है. यहां मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का और दलहन की खेती होती है. औद्योगिक ढांचा न होने के कारण अर्थव्यवस्था कृषि और छोटे पैमाने के व्यापार पर निर्भर है. पास की कमला और बागमती नदियों से आने वाली बाढ़ यहां की सबसे बड़ी चुनौती है, जो हर साल आजीविका और आवागमन को प्रभावित करती है.
शिक्षा और रोजगार की तलाश में युवाओं का पलायन पटना, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर आम है. हालांकि छोटे पैमाने पर व्यापार और सेवा क्षेत्र मौजूद हैं, लेकिन कृषि-आधारित उद्योगों और ग्रामीण उद्यमों में अभी तक ठोस निवेश नहीं हो सका है.
आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा-नीत एनडीए हायाघाट में हल्की बढ़त के साथ उतर रहा है. दूसरी ओर, विपक्षी महागठबंधन को सीट वापस पाने के लिए ठोस रणनीति, प्रभावशाली उम्मीदवार और जातीय व सामुदायिक आधार पर मतदाताओं की मजबूत लामबंदी की जरूरत होगी.
(अजय झा)
Bhola Yadav
RJD
Abdus Salam Khan
JAP(L)
Ravindra Nath Singh
IND
Nota
NOTA
Geeta Devi
IND
Paramajit Kumar
IND
Janki Nandan Chaudhary
IND
Rushan Nayak
BSP
Om Prakash Mandal
RJVP
Ganesh Kumar Choudhary
YKP
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
इंडिया टुडे ने चुनाव आयोग के डेटा की गहराई से जांच की और पाया कि SIR और चुनाव नतीजों के बीच कोई सीधा या समझ में आने वाला पैटर्न दिखता ही नहीं. हर बार जब एक ट्रेंड बनता लगता है, तुरंत ही एक दूसरा आंकड़ा उसे तोड़ देता है. बिहार चुनाव में NDA ने 83% सीटें जीतीं, पर SIR से जुड़े नतीजे अलग कहानी कहते हैं.