तमिलनाडु के विलाथिकुलम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 213) यह थूथुक्कुडी जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है. यहां का इलाका ज्यादातर ग्रामीण है. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है, साथ ही छोटे-छोटे कस्बों में व्यापार भी चलता है और कई गांव सांस्कृतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं. इस क्षेत्र में टैंक (तालाब) आधारित सिंचाई, सूखी जमीन पर खेती और ऐसे गांव मिलते हैं जो काफी हद तक बारिश पर निर्भर रहते हैं. यहां मंदिर, मस्जिद और स्थानीय त्योहार लोगों को जोड़कर रखते हैं और सामाजिक एकता बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
यहां के मतदाताओं में ज्यादातर किसान, खेत मजदूर, छोटे व्यापारी और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं. वोट देने के फैसले पर जाति और समुदाय का असर, स्थानीय नेता की पहचान, और लोगों की समस्याओं को कितनी जल्दी हल किया जाता है, ये सब चीजें बहुत मायने रखती हैं. जो नेता लोगों के बीच रहते हैं और मुश्किल समय में मदद करते हैं, उसी के प्रति लोगों की वफादारी ज्यादा होती है. पंचायत, मंदिर और अन्य स्थानीय संस्थाएं लोगों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाती हैं.
भौगोलिक रूप से यह इलाका सूखी जमीन, तालाबों से सिंचित गांवों और कुछ अर्ध-शहरी बस्तियों का मिश्रण है. यहां धान, दालें, मोटे अनाज और पशुपालन प्रमुख हैं. लेकिन पानी की उपलब्धता मौसमी होती है, इसलिए तालाबों और नहरों का रखरखाव बहुत जरूरी है. सड़क संपर्क तिरुचेंदूर, थूथुक्कुडी और सथानकुलम से है. लेकिन अंदरूनी सड़कों की हालत खराब है और सार्वजनिक परिवहन भी सीमित है, जिससे दूर-दराज के लोगों को दिक्कत होती है.
इस क्षेत्र के मुख्य केंद्रों में विलाथिकुलम का टाउन मार्केट, बड़े सिंचाई टैंक और नहरें, पंचायत यूनियन और गांव की सड़कें, धार्मिक स्थल, स्कूल और सरकारी दफ्तर शामिल हैं.
यहां की प्रमुख समस्याओं में सिंचाई के पानी की अनियमित आपूर्ति, खेती के खर्चों में बढ़ोतरी, अंदरूनी सड़कों की खराब हालत, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, युवाओं में बेरोजगारी और पलायन, सार्वजनिक परिवहन की कमी, सूखे इलाकों में पीने के पानी की समस्या, सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने में देरी, और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का रखरखाव शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड भी इन समस्याओं के अनुसार तय होता है. किसान चाहते हैं कि उन्हें समय पर सिंचाई का पानी मिले, फसलों का सही दाम मिले और खेती के लिए सब्सिडी मिले. खेत मजदूर स्थिर मजदूरी और सरकारी योजनाओं के लगातार लाभ को प्राथमिकता देते हैं. युवा बेहतर शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और नौकरी के मौके चाहते हैं. महिलाएं पीने के पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा को ज्यादा महत्व देती हैं, जबकि बुजुर्ग पेंशन, इलाज और आने-जाने की सुविधा को अहम मानते हैं. अब यहां के मतदाता सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में काम और समस्याओं के समाधान के आधार पर अपने प्रतिनिधि का मूल्यांकन करने लगे हैं.
Chinnappan P
ADMK
Balaji R
NTK
Seeni Selvi K
AMMKMNKZ
Wilson X
MNM
Muthukumar C
PT
Nota
NOTA
Karuppasamy K
NIDP
Manikkaraj A
BSP
Marimuthu S
SIFB
Muruganantham M
IND
Chelladurai S
IND
Arumugam S
IND
Arumugaperumal K
IND
Gandhi M
BHUDRP
Rajamani P
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
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