मेलूर (विधानसभा क्षेत्र संख्या 188) मदुरै जिले के पूर्वी छोर पर स्थित एक प्रमुख ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है, जिसकी पहचान मजबूत कृषि आधार और विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है. मदुरै शहर और शिवगंगा क्षेत्र के बीच स्थित मेलूर एक ऐसा संक्रमण क्षेत्र है, जहां ग्रामीण परंपराएँ और शहरी प्रभाव एक-दूसरे से मिलते हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से धान की खेती, गन्ना उत्पादन, पशुपालन और छोटे स्तर के व्यापार पर निर्भर है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर टिकी हुई है.
मदुरै के करीब होने के बावजूद मेलूर को अपेक्षित विकास लाभ नहीं मिल पाए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में उपेक्षा की भावना गहराती गई है. समय के साथ जनता की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन बुनियादी ढाँचे, रोजगार और सेवाओं की उपलब्धता में ठोस सुधार न दिखने के कारण असंतोष बढ़ा है.
भौगोलिक दृष्टि से मेलूर उपजाऊ मैदानी इलाको में फैला हुआ है, जहां मौसमी टैंक, नहरें और बोरवेल सिंचाई का सहारा हैं. यह विधानसभा क्षेत्र राज्य राजमार्गों के माध्यम से मदुरै को शिवगंगा और रामनाथपुरम जिलों से जोड़ता है, जिससे व्यापार और आवागमन के लिहाज से इसकी रणनीतिक महत्ता बढ़ जाती है. हालांकि, अंदरूनी गाँवों की सड़कें बदहाल हैं और अंतिम छोर तक संपर्क आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है. गर्मियों में पेयजल संकट सिंचाई योजना और टैंकों के रखरखाव में खामियों को उजागर करता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में प्रसिद्ध और विशाल कल्लाझगर मंदिर शामिल है, जो अपनी वार्षिक चिथिरई उत्सव परंपरा के लिए जाना जाता है, जब भगवान नारायण के स्वरूप कल्लाझगर वैगई नदी में प्रवेश करते हैं और पूरे राज्य से हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं. इसके अलावा मेलूर टाउन मार्केट और बस स्टैंड, कीलवलवु जंक्शन, अरिट्टापट्टी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र, कृषि टैंकों के समूह, खदान-प्रभावित इलाके और मदुरै-शिवगंगा राज्य राजमार्ग भी क्षेत्र के प्रमुख बिंदु हैं.
मेलूर में इस समय कई गंभीर मुद्दे सामने हैं, जिनमें व्यापक सत्ताविरोधी भावना, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और टैंकों की गाद सफाई में देरी, खेती की बढ़ती लागत और ग्रामीण संकट, खराब आंतरिक सड़कें, मौसमी पेयजल की कमी, खनन गतिविधियों से होने वाला पर्यावरणीय प्रभाव, स्थानीय रोजगार के सीमित अवसर और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी शामिल हैं.
मतदाता की बात करें तो किसानवर्ग सुनिश्चित जल आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और टैंकों के पुनरुद्धार की मांग कर रहे हैं. युवा वर्ग रोजगार के अवसर और कौशल विकास सुविधाएं चाहता है. महिलाएं पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि छोटे व्यापारी बेहतर सड़कों और बाजार ढांचे की अपेक्षा रखते हैं. वहीं, खदान-प्रभावित क्षेत्रों के निवासी सख्त नियमन और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
Ravichandran T.
INC
Selvaraj A.
AMMKMNKZ
Karuppusamy P.
NTK
Kathiresan K.
MNM
Nota
NOTA
Pandi K.
IND
Balan T.
IND
Gobalakrishnan M.
IND
Mohanram C.
IND
Dhinakaran S.
IND
Senthilraj K.
MIDP
Kannan P.
IND
Nagendran N.
IND
Sivasamy R.
IND
Dharmar P.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.