INC
TVK
AIADMK
NTK
AIPTMMK
IND
नोटा
NOTA
PTM
IND
CPI(ML)(L)
IND
IND
IND
IND
Melur Results 2026 Live: मेलूर सीट के रिजल्ट का हुआ ऐलान, P.Viswanathan ने 2724 वोटों के अंतर से मार लिया मोर्चा
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मेलूर (विधानसभा क्षेत्र संख्या 188) मदुरै जिले के पूर्वी छोर पर स्थित एक प्रमुख ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है, जिसकी पहचान मजबूत कृषि आधार और विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है. मदुरै शहर और शिवगंगा क्षेत्र के बीच स्थित मेलूर एक ऐसा संक्रमण क्षेत्र है, जहां ग्रामीण परंपराएँ और शहरी प्रभाव एक-दूसरे से मिलते हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से धान की खेती, गन्ना उत्पादन, पशुपालन और छोटे स्तर के व्यापार पर निर्भर है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर टिकी हुई है.
मदुरै के करीब होने के बावजूद मेलूर को अपेक्षित विकास लाभ नहीं मिल पाए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में उपेक्षा की भावना गहराती गई है. समय के साथ जनता की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन बुनियादी ढाँचे, रोजगार और सेवाओं की उपलब्धता में ठोस सुधार न दिखने के कारण असंतोष बढ़ा है.
भौगोलिक दृष्टि से मेलूर उपजाऊ मैदानी इलाको में फैला हुआ है, जहां मौसमी टैंक, नहरें और बोरवेल सिंचाई का सहारा हैं. यह विधानसभा क्षेत्र राज्य राजमार्गों के माध्यम से मदुरै को शिवगंगा और रामनाथपुरम जिलों से जोड़ता है, जिससे व्यापार और आवागमन के लिहाज से इसकी रणनीतिक महत्ता बढ़ जाती है. हालांकि, अंदरूनी गाँवों की सड़कें बदहाल हैं और अंतिम छोर तक संपर्क आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है. गर्मियों में पेयजल संकट सिंचाई योजना और टैंकों के रखरखाव में खामियों को उजागर करता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में प्रसिद्ध और विशाल कल्लाझगर मंदिर शामिल है, जो अपनी वार्षिक चिथिरई उत्सव परंपरा के लिए जाना जाता है, जब भगवान नारायण के स्वरूप कल्लाझगर वैगई नदी में प्रवेश करते हैं और पूरे राज्य से हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं. इसके अलावा मेलूर टाउन मार्केट और बस स्टैंड, कीलवलवु जंक्शन, अरिट्टापट्टी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र, कृषि टैंकों के समूह, खदान-प्रभावित इलाके और मदुरै-शिवगंगा राज्य राजमार्ग भी क्षेत्र के प्रमुख बिंदु हैं.
मेलूर में इस समय कई गंभीर मुद्दे सामने हैं, जिनमें व्यापक सत्ताविरोधी भावना, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और टैंकों की गाद सफाई में देरी, खेती की बढ़ती लागत और ग्रामीण संकट, खराब आंतरिक सड़कें, मौसमी पेयजल की कमी, खनन गतिविधियों से होने वाला पर्यावरणीय प्रभाव, स्थानीय रोजगार के सीमित अवसर और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी शामिल हैं.
मतदाता की बात करें तो किसानवर्ग सुनिश्चित जल आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और टैंकों के पुनरुद्धार की मांग कर रहे हैं. युवा वर्ग रोजगार के अवसर और कौशल विकास सुविधाएं चाहता है. महिलाएं पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि छोटे व्यापारी बेहतर सड़कों और बाजार ढांचे की अपेक्षा रखते हैं. वहीं, खदान-प्रभावित क्षेत्रों के निवासी सख्त नियमन और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
Ravichandran T.
INC
Selvaraj A.
AMMKMNKZ
Karuppusamy P.
NTK
Kathiresan K.
MNM
Nota
NOTA
Pandi K.
IND
Balan T.
IND
Gobalakrishnan M.
IND
Mohanram C.
IND
Dhinakaran S.
IND
Senthilraj K.
MIDP
Kannan P.
IND
Nagendran N.
IND
Sivasamy R.
IND
Dharmar P.
IND
तमिलनाडु में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को सदन में वोट देने से रोक दिया, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पोस्टल बैलेट विवाद से जुड़ा यह मामला अब राज्य की सियासत के साथ संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है.
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तमिलनाडु चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर बगावत सामने आई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता CV शनमुगम से जुड़े विधायकों और पूर्व मंत्रियों के एक गुट ने पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर दी है. लगातार चुनावी हार की वजह से पार्टी के भीतर संभावित फूट की अटकलों को तेज कर दिया है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
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थलपति विजय और अरविंद केजरीवाल दोनों ही स्थापित व्यवस्था को चुनौती देने वाले 'डिसरप्टर्स' के रूप में उभरे, जहां विजय का करिश्मा सिनेमाई पर्दे से आता है, वहीं केजरीवाल का आधार ज़मीनी सक्रियता थी, लेकिन दोनों ही जनता की राजनीतिक हताशा और बदलाव की तीव्र आकांक्षा के प्रतीक हैं.
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तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सरकार गठन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि डीएमके ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. पहली बार चुनाव लड़कर 108 सीटें जीतने वाली टीवीके अब बहुमत जुटाने और नई सरकार बनाने की कोशिशों में लगी हुई है.