राजपलायम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 202) तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के पश्चिमी हिस्से में, पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के पास स्थित है. यह एक बहुत महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से सक्रिय क्षेत्र है. यह इलाका अपने टेक्सटाइल मिल्स, पावरलूम क्लस्टर और व्यापारिक नेटवर्क के लिए जाना जाता रहा है. राजपालयम शहर लंबे समय से दक्षिण तमिलनाडु और केरल के बीच एक औद्योगिक और व्यापारिक गेटवे के रूप में काम करता आया है. वहीं, इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में आज भी खेती और पशुपालन की मजबूत परंपरा देखने को मिलती है.
यह क्षेत्र एक तरफ अपने पुराने औद्योगिक गौरव को दिखाता है, तो दूसरी तरफ आज की आर्थिक चुनौतियों को भी. पहले जहां यहां मिलों में संगठित रोजगार मिलता था, वहीं अब मिलों की धीमी गति, मजदूरों का विस्थापन और बढ़ती लागत ने लोगों की उम्मीदों और राजनीतिक सोच को बदल दिया है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से, यहां हमेशा से संगठित और जागरूक वोटिंग का माहौल रहा है. यहां के वोटर अलग-अलग वर्गों से आते हैं, जिनमें औद्योगिक मजदूर, व्यापारी, छोटे उद्यमी, खेतिहर मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार शामिल हैं. ट्रेड यूनियन, समुदाय आधारित संगठन और स्थानीय व्यापारिक नेटवर्क राजनीति को काफी प्रभावित करते हैं. यहां जाति का असर जरूर है, लेकिन अब चुनाव के नतीजे ज्यादा इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन नेता अच्छा काम करता है, रोजगार देता है और लोगों की जरूरतें पूरी करता है.
इस क्षेत्र के कुछ मुख्य इलाकों में टेक्सटाइल और पावरलूम क्लस्टर, शहर के बाजार और व्यावसायिक सड़कें, रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, पश्चिमी घाट के पास के गांव, मजदूरों की कॉलोनियां और मुख्य बस स्टैंड व ट्रैफिक जंक्शन शामिल है.
यहां की मुख्य समस्याओं में टेक्सटाइल और पावरलूम सेक्टर में रोजगार की कमी, पानी की अनियमित सप्लाई और भूजल का संकट, छोटे उद्योगों के लिए बढ़ती बिजली लागत, खराब सड़कें और ड्रेनेज, रोजगार के नए विकल्पों की कमी, युवाओं का पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव और कचरा प्रबंधन की दिक्कतें शामिल हैं.
वोटरों के मूड की बात करें तो टेक्सटाइल मजदूर नौकरी की सुरक्षा, स्थिर वेतन और बिजली सब्सिडी चाहते हैं. छोटे मिल मालिक और व्यापारी लागत कम करने और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग करते हैं. युवा नए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के अवसर चाहते हैं. महिलाएं पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं. मध्यम वर्ग के लोग सड़कों, ड्रेनेज और शहर की सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, जबकि ग्रामीण वोटर सिंचाई और सड़क कनेक्टिविटी की उम्मीद रखते हैं.
यहां के लोग आर्थिक सुधार में हो रही देरी से परेशान हैं और जल्दी बदलाव चाहते हैं. राजपालयम के वोटर अक्सर अलग-अलग पार्टियों के बीच बदलते रहते हैं. वे ज्यादा इस बात पर ध्यान देते हैं कि कौन उनके इलाके में विकास, पानी, रोजगार और सरकारी योजनाएं सही तरीके से पहुंचा रहा है. यहां नेता की छवि और पार्टी की ताकत दोनों मायने रखते हैं, लेकिन अंत में जनता उसी को समर्थन देती है जो काम करके दिखाता है.
Rajenthrabhalaji K.t
ADMK
Jeyaraj V.
NTK
Kalimuthu K.
AMMKMNKZ
Vivekananthan S.
MNM
Ayyar V.k.
PT
Nota
NOTA
Manikumar M.
IND
Jeyaprakash I.
IND
Thangapandi S.
IND
Vijayakumar E.
IND
Kalimuthu K.
IND
Thangapandi B.
IND
Dharmalingam K.
RPPRINAT
Selvaraj G.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.