तिरुचुली विधानसभा क्षेत्र संख्या 208, विरुधनगर जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है. यह एक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है. यह इलाका अपनी गहरी कृषि परंपरा और बाहर काम के लिए लोगों के पलायन के लिए जाना जाता है. इसका नाम प्रसिद्ध तिरुचुली नाथर मंदिर के नाम पर पड़ा है, जो इस क्षेत्र को सांस्कृतिक पहचान देता है.
यहां की अर्थव्यवस्था अभी भी खेती, उससे जुड़े कामों और सरकारी नौकरियों पर काफी हद तक निर्भर है. औद्योगिक या शहरी इलाकों से अलग, यहां की राजनीति पानी की उपलब्धता, फसलों की स्थिरता, सरकारी योजनाओं का सही लाभ और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर टिकी रहती है. यह क्षेत्र तमिलनाडु के अंदरूनी ग्रामीण इलाकों की उम्मीदों और चिंताओं को दिखाता है, जहां विकास की अपेक्षाएं ज्यादा बड़ी नहीं, लेकिन बहुत व्यक्तिगत और जरूरी होती हैं.
यहां के सामाजिक और राजनीतिक माहौल में किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और सरकारी योजनाओं पर निर्भर लोग बड़ी संख्या में हैं. वोटिंग अक्सर स्थानीय नेताओं की पहचान, जातीय समीकरण और योजनाओं के सही वितरण पर निर्भर करती है. यहां चुनाव बहुत स्थानीय स्तर पर और कड़े मुकाबले वाले होते हैं, जहां विधायक की जनता तक पहुंच, समस्याओं का समाधान और संकट के समय मदद करना, पार्टी के नाम से भी ज्यादा मायने रखता है.
भौगोलिक रूप से यह इलाका ज्यादातर सूखी खेती पर आधारित है, हालांकि कुछ जगहों पर तालाबों (टैंकों) के जरिए सिंचाई होती है. यहां पानी की उपलब्धता मौसम पर निर्भर रहती है, जिससे धान, दालें, कपास और मोटे अनाज जैसी फसलें उगाई जाती हैं. सड़क मार्ग से यह क्षेत्र अरुप्पुकोट्टई, करियापट्टी और मदुरै से जुड़ा हुआ है. लेकिन गांवों के अंदर की सड़कों की हालत अभी भी कमजोर है. सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध तो है, लेकिन उसकी संख्या और समय सीमित है, जिससे दूर के गांवों के लोगों को दिक्कत होती है.
यहां की प्रमुख समस्याओं में सिंचाई के पानी की अनियमित आपूर्ति, खेती के खर्च का बढ़ना, गांवों की सड़कों की खराब स्थिति, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, युवाओं का पलायन और स्थानीय रोजगार की कमी शामिल हैं. इसके अलावा दूर-दराज के गांवों में बस सेवा कम होना, पीने के पानी की मौसमी कमी, सरकारी योजनाओं के लागू होने में देरी, बारिश पर निर्भर खेती, विशेष इलाज की सुविधा का अभाव, सरकारी हॉस्टल और उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी, किसानों को अपनी उपज के सही बाजार तक पहुंच न मिलना, गांवों में स्ट्रीट लाइट की कमी, जमीन के कागजात और राजस्व सेवाओं में देरी, युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की कमी, बारिश में शहर में जलभराव और पशुपालन करने वाले परिवारों के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं की कमी जैसी समस्याएं भी शामिल हैं.
मतदाताओं के नजरिए से देखें तो किसान चाहते हैं कि उन्हें समय पर सिंचाई का पानी मिले, फसल का सही दाम मिले और खेती के लिए सब्सिडी मिले. खेतों में काम करने वाले मजदूर रोजगार की स्थिरता और सरकारी योजनाओं की निरंतरता चाहते हैं. युवा रोजगार, स्किल ट्रेनिंग और स्थानीय कॉलेज की मांग करते हैं. महिलाएं पीने के पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं. बुजुर्ग लोग पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और आने-जाने की व्यवस्था को ज्यादा महत्व देते हैं. अब यहां के लोग अपने प्रतिनिधियों को पार्टी के नाम से नहीं, बल्कि इस बात से आंकने लगे हैं कि वे कितने आसानी से उपलब्ध हैं और लोगों की समस्याओं को कितनी जल्दी हल करते हैं.
Rajasekar S
ADMK
Anandhajothi A
NTK
Sivasamy K K
AMMKMNKZ
Arunkumar V
IND
Murugan S
MNM
Adaikalam R
IND
Nota
NOTA
Ramathilagam A
IND
Thirumurugan Palanisamy K
PT
Malaialagu M
IND
Thirumurugan G
IND
Advocate. Thangapandian M
IND
Rajangam C
IND
Rajendran R
IND
Indira B
IND
Harikrishnan K
IND
Manivasagam S
BHUDRP
Sethuramalingam S
IND
Chennakesavan P
IND
Kalimuthu S
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.